प्रिंस हत्याकांड : गुनाह पुलिसकर्मियों से हुआ, सजा भुगत रहा बस कंडक्टर और उसका परिवार
गुरुग्राम के भोंडसी स्थित एक निजी स्कूल में करीब साढ़े तीन साल पहले हुई सात वर्षीय मासूम प्रिंस की हत्या मामले में सीबीआई ने चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ पंचकूला की विशेष कोर्ट में चालान पेश कर दिया। सीबीआई के मुताबिक, बस कंडक्टर को फंसाने के लिए इन पुलिसकर्मियों ने अदालत में चार झूठे बयान भी दर्ज कराए। पुलिस के इस गुनाह की सजा पीड़ित बस कंडक्टर अशोक कुमार और उसके परिवार का भुगतनी पड़ी। पीड़ित अशोक को जेल से बाहर आने पर कहीं काम नहीं मिला, परिवार सड़क पर आ गया और उसके बच्चों को स्कूल से निकाल दिया।
हाल ही में गुरुग्राम के स्कूल में हुए प्रिंस हत्याकांड मामले में सीबीआई ने तत्कालीन सोहना एसीपी ब्रह्मसिंह समेत कुल चार पुलिस अधिकारियों, भोंडसी थाने के तत्कालीन प्रभारी नरेंद्र खटाना, सब-इंस्पेक्टर शमशेर सिंह एवं ईएएसआई सुभाष चंद के खिलाफ पंचकूला की विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में सीबीआई ने इन चारों को तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने का दोषी माना है। सीबीआई के मुताबिक, बस कंडक्टर को फंसाने के लिए अदालत में चार झूठे बयान दर्ज कराने की बात भी जांच में सामने आई थी। वहीं इस मामले में स्कूल प्रबंधन को क्लीनचिट दे दी है।
मन और शरीर पर लगी चोट
सीबीआई ने कहा कि गुरुग्राम पुलिस ने बस कंडक्टर अशोक कुमार को प्रिंस हत्याकांड मामले में झूठा फंसाया। आशोक के परिवार ने कहा कि मामले में करीब तीन साढ़े तीन साल बाद अभी भी शारीरिक और मानसिक दोनों पर चोट है, दोनों को ठीक करना बाकी है। परिवार ने कहा कि अशोक पुलिस हिरासत में इस कदर पीटा गया कि अब वह कोई काम करने लायक नहीं बचा और ना ही कोई उसे काम देने को तैयार है।
अशोक के परिवार में पत्नी, 12 साल व नौ साल के दो बच्चे और बुजुर्ग पिता हैं। अशोक की मां की एक जनवरी को मौत हो गई। अशोक की चार बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। परिवार गुरुग्राम के गमरोज गावं में रहता है। कुमार की छोटी बहन सुनीता ने कहा कि भइया ने अपनी गिरफ्तारी के बाद से काम नहीं किया है। हिरासत के दौरान उसे इतना पीटा गया कि अब वह भारी सामन नहीं उठा सकता। सर्दियां आते ही दर्द से परेशान रहता है, उसका उठना-बैठना भी मुश्किल हो जाता है। हमारे भाई का परिवार सड़क पर आ गया है। हम चारों बहने और कुछ स्थानीय लोग उसकी मदद करते हैं।
पत्नी को नौकरी और बच्चों को स्कूल से निकाला
अशोक के परिवार ने बताया कि प्रिंस हत्याकांड में गिरफ्तारी में के बाद से वह किसी भी बाहरी व्यक्ति से बात नहीं करता है। अशोक की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी को गांव के स्कूल में सफाईकर्मी की नौकरी खोनी पड़ी और तब से अब तक उसे कहीं काम नहीं मिला है। वहीं बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया।
बूढ़े पिता के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी
मदद भी रोज-रोज नहीं मिलती। अशोक और पत्नी की नौकरी चले जाने और बाद में कोई काम नहीं मिलने के बाद उसके बुजुर्ग पिता अमीरचंद्र के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आई गई। अमीरचंद्र 6000 रुपये प्रतिमाह के वेतन पर सिक्योरिट गार्ड की नौकरी करते थे। लेकिन कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान यह आय भी बंद हो गई।
अमीरचंद्र जिस स्कूल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। उसी स्कूल में बच्चों का दाखिला करवा दिया, लेकिन लॉकडाउन में स्कूल बंद हो गए और ऑनलाइन कक्षाएं चलने लगीं। अमीरचंद ने बताया, हमारे पास ऑनलाइन कक्षाओं के लिए मोबाइल फोन नहीं हैं, इसलिए बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई।
2017 में हुआ था यह खौफनाक मर्डर
8 सितंबर, 2017 को सात साल के बच्चे प्रिंस (काल्पनिक नाम) का मर्डर हुआ था। उसका गला रेता गया था, खून से सनी बॉडी शौचालय में मिली थी। पुलिस ने इस मामले में स्कूल बस के कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार किया था। कहा जा रहा था कि कंडक्टर अशोक ने गलत काम करते देख लेने पर बच्चे के मर्डर की बात कबूली थी। परिजनों ने फंसाने का आरोप लगा इस केस की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई।
12 सितंबर, 2017 को चश्मदीद सुभाष गर्ग ने बताया कि अशोक की गोद में बच्चा जिंदा था। 15 सितंबर को हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने केस की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान किया। 22 सितंबर को बच्चे के पिता सुप्रीम कोर्ट जाने लगे तो सीबीआई ने एफआईआर कराई। 23 सितंबर को स्कूल पहुंचकर सीन री-क्रिएट किए और फॉरेंसिक टीम की मदद से सबूत जुटाए। 7 नवंबर को सीबीआई ने स्कूल के 11वीं कक्षा के छात्र को आरोपी मानते हुए हिरासत में लिया। 21 नवंबर को कंडक्टर अशोक की जमानत मंजूर हुई तो 22 की शाम वह जेल से रिहा हो गया। 13 दिसंबर को आरोपी छात्र की जमानत याचिका रद्द, 20 दिसंबर को जुवेनाइल बोर्ड ने बालिग माना था। तभी से आरोपी न्यायिक हिरासत में है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक स्वजन पहुंच चुके हैं, लेकिन कहीं से भी जमानत नहीं मिली।