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Panipat News: ऐसे तो यमुना रह जाएगी मैली
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पानीपत। सरकार के छह विभागों में तालमेल की कमी से यमुना में प्रदूषण पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। विभागों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव के कड़े निर्देशों के बाद भी ड्रेन की निगरानी शुरू नहीं की। इससे पहले फरवरी व मार्च में इस संबंध में दो बार बैठकों में चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने विभागों के अधिकारियों से मास्टर प्लान की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक मास्टर प्लान ही तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में यमुना को कैमिकलयुक्त पानी से बचाना बड़ी चुनौती है। स्थिति यह है कि अब भी ड्रेन में अनट्रीटेड पानी छोड़ा जा रहा है। बृहस्पतिवार को सेक्टर-25 स्थित बैंकेट हाल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में भी चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने इस संबंध में प्रशासन को कड़े निर्देश जारी करते हुए ग्राउंड स्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
देवी मंदिर से कुटानी रोड तक ढाई किलोमीटर में 70 से अधिक ऐसे प्वाइंट हैं, जहां घरों व फैक्टरी संचालकों ने पाइप लगाकर सीधा पानी ड्रेन में छोड़ा है। इसलिए ड्रेन केमिकल युक्त हो रही है, जो सीधे यमुना में गिरती है, इसलिए यमुना प्रदूषित हो रही है। खासतौर से दिसंबर और जनवरी में यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। वहीं इसका आरोप सोनीपत, पानीपत, करनाल और यमुनानगर पर लगता है। कारण कि इन जिलों में शहर के नालों का पानी ट्रीट किए बिना छोड़ा जा रहा है। इसका मुख्य कारण विभागों में तालमेल की कमी को माना जा रहा है। सभी विभाग एक दूसरे पर ड्रेन को अनट्रीटेड पानी से बचाने की जिम्मेदारी थोप देते हैं। ड्रेन में बिना ट्रीटेड पानी ना छोड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम, पंचायती राज विभाग, एचएसआईआईडीसी, एचएसवीपी, सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है, लेकिन अब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को छोड़कर अब तक दूसरे विभागों ने अपना प्लान तैयार नहीं किया हे।
पानीपत में वैसे तो 17 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं, जो नगर निगम और एचएसवीपी के अंतर्गत आते हैं । दूसरी ओर दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक हरियाणा में डीडी -1 व डीडी -2 नहरें हैं। इन नहरों से दूषित पानी यमुना में पहुंचता है। ये नहर गांव शिमला गुजरान के पास एक दूसरे से मिलती हैं। शिमला गुजरान से नहर गांव खोजकीपुर के पास यमुना में आकर मिलती हैं।
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सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ यमुना की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मास्टर प्लान मांगा गया है। इसके तहत उन प्वाइंतों को चिह्नित करना होगा, जहां से नाले ड्रेन में गिरते हैं। हर विभाग की जिम्मेदारी है कि वह यमुना को स्वच्छ बनाने में योगदान करें, लेकिन अभी तक अपेक्षित काम नहीं हो पाया है।
-कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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देवी मंदिर से कुटानी रोड तक ढाई किलोमीटर में 70 से अधिक ऐसे प्वाइंट हैं, जहां घरों व फैक्टरी संचालकों ने पाइप लगाकर सीधा पानी ड्रेन में छोड़ा है। इसलिए ड्रेन केमिकल युक्त हो रही है, जो सीधे यमुना में गिरती है, इसलिए यमुना प्रदूषित हो रही है। खासतौर से दिसंबर और जनवरी में यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। वहीं इसका आरोप सोनीपत, पानीपत, करनाल और यमुनानगर पर लगता है। कारण कि इन जिलों में शहर के नालों का पानी ट्रीट किए बिना छोड़ा जा रहा है। इसका मुख्य कारण विभागों में तालमेल की कमी को माना जा रहा है। सभी विभाग एक दूसरे पर ड्रेन को अनट्रीटेड पानी से बचाने की जिम्मेदारी थोप देते हैं। ड्रेन में बिना ट्रीटेड पानी ना छोड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम, पंचायती राज विभाग, एचएसआईआईडीसी, एचएसवीपी, सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है, लेकिन अब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को छोड़कर अब तक दूसरे विभागों ने अपना प्लान तैयार नहीं किया हे।
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पानीपत में वैसे तो 17 प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं, जो नगर निगम और एचएसवीपी के अंतर्गत आते हैं । दूसरी ओर दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक हरियाणा में डीडी -1 व डीडी -2 नहरें हैं। इन नहरों से दूषित पानी यमुना में पहुंचता है। ये नहर गांव शिमला गुजरान के पास एक दूसरे से मिलती हैं। शिमला गुजरान से नहर गांव खोजकीपुर के पास यमुना में आकर मिलती हैं।
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सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ यमुना की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मास्टर प्लान मांगा गया है। इसके तहत उन प्वाइंतों को चिह्नित करना होगा, जहां से नाले ड्रेन में गिरते हैं। हर विभाग की जिम्मेदारी है कि वह यमुना को स्वच्छ बनाने में योगदान करें, लेकिन अभी तक अपेक्षित काम नहीं हो पाया है।
-कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड