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Panipat News: यमुना का जल स्तर स्थिर, आज से फिर से बढोतरी के आसार
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पानीपत। यमुना नदी के जल स्तर में रविवार को स्थिर रहा है। पहाड़ों में हो रही बारिश के चलते सोमवार फिर से यमुना के जल स्तर में बढोत्तरी होने की संभावना जताई जा रही है। इसको लेकर सिंचाई विभाग अलर्ट हो गया हैं। यमुना में बाढ़ बचाव को लेकर सभी विभाग के एसडीओ, जेई, मैट, बेलदारों की टीम यमुना बांध पर तैनात कर दिया गया है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन सुरेश सैनी, एसडीओ सतीश कुमार, जेई मोहित और प्रदीप का कहना है कि यमुना में बाढ़ बचाव को लेकर बांध पर पत्थरों के ठोकरे लगाई जा रही हैं। बाढ़ बचाव के पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। जिससे आमजन को कोई परेशानी न हो।
यमुना से सटे राणा माजरा, पत्थरगढ, नवादा, तामशाबाद, नन्हेडा, खोजकीपुर गांव के लोगों का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा यमुना में पत्थर अभी देरी से आ रहे है और कई जगहों पर पत्थरों की ठोकरों के स्थान पर अस्थाई रूप से मिट्टी के कट्टे लगाए जा रहे हैं जबकि पत्थरों की ठोकरें ज्यादा मजबूत होती है और यमुना के पानी से वही मिट्टी के कटाव को रोक सकती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग द्वारा 15 जुलाई तक बाढ़ बचाओ प्रबंध पूरे करने होते हैं लेकिन अभी बचे एक सप्ताह में विभाग द्वारा ठेकेदार से सभी पत्थरों की ठोकरे लगवाने को लेकर पत्थर कम आ रहे हैं।
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पानीपत में यमुना का तटबंध टूटने से 2013 में भी बाढ़ आई थी और उस समय पत्थरगढ, नवादा और गोयला गांव के पास तीन जगहों पर यमुना का तटबंध टूट गया था। उसके अलावा ड्रेन नंबर दो यमुना के पानी के दबाव के चलते भलौर गांव के पास से टूट गई थी।
उस समय भी बहुत से गांव के किसानों की बाढ़ के पानी से फसल बर्बाद हो गई थी। तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बाढ़ से प्रभावित गांव का दौरा किया था। वही वर्ष 2023 में नवादा-आर गांव के पास भी यमुना का तटबंध टूटने से दर्जनों गावों में बाढ़ आने से नुकसान हो गया था।
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सिंचाई विभाग के एक्सईएन सुरेश सैनी, एसडीओ सतीश कुमार, जेई मोहित और प्रदीप का कहना है कि यमुना में बाढ़ बचाव को लेकर बांध पर पत्थरों के ठोकरे लगाई जा रही हैं। बाढ़ बचाव के पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। जिससे आमजन को कोई परेशानी न हो।
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यमुना से सटे राणा माजरा, पत्थरगढ, नवादा, तामशाबाद, नन्हेडा, खोजकीपुर गांव के लोगों का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा यमुना में पत्थर अभी देरी से आ रहे है और कई जगहों पर पत्थरों की ठोकरों के स्थान पर अस्थाई रूप से मिट्टी के कट्टे लगाए जा रहे हैं जबकि पत्थरों की ठोकरें ज्यादा मजबूत होती है और यमुना के पानी से वही मिट्टी के कटाव को रोक सकती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग द्वारा 15 जुलाई तक बाढ़ बचाओ प्रबंध पूरे करने होते हैं लेकिन अभी बचे एक सप्ताह में विभाग द्वारा ठेकेदार से सभी पत्थरों की ठोकरे लगवाने को लेकर पत्थर कम आ रहे हैं।
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पानीपत में यमुना का तटबंध टूटने से 2013 में भी बाढ़ आई थी और उस समय पत्थरगढ, नवादा और गोयला गांव के पास तीन जगहों पर यमुना का तटबंध टूट गया था। उसके अलावा ड्रेन नंबर दो यमुना के पानी के दबाव के चलते भलौर गांव के पास से टूट गई थी।
उस समय भी बहुत से गांव के किसानों की बाढ़ के पानी से फसल बर्बाद हो गई थी। तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बाढ़ से प्रभावित गांव का दौरा किया था। वही वर्ष 2023 में नवादा-आर गांव के पास भी यमुना का तटबंध टूटने से दर्जनों गावों में बाढ़ आने से नुकसान हो गया था।