{"_id":"294d4f487a2f8eff7ecf235006244807","slug":"xen-pot-boil-in-office","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक्सईएन आफिस में फोड़ा मटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक्सईएन आफिस में फोड़ा मटका
अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 10 Dec 2013 10:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानीपत के नांगल खेड़ी की महिलाओं ने जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन के
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यालय में उनकी कुर्सी के सामने मटके फोड़े और गांव में पेयजल किल्लत का
समाधान कराने की मांग की।
महिलाओं का आरोप है कि गांव में एक साल से ट्यूबवेल खराब है। लेकिन अधिकारी आश्वासन ही दे रहे हैं। अधिकारियों ने महिलाओं को समझाकर शांत किया।
नांगल खेड़ी की एक साल से ट्यूबवेल की मांग कर रही महिलाओं का मंगलवार को गुस्सा फूट गया। वे सिविल अस्पताल स्थित जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में पहुंची और एक्सईएन के कार्यालय में मटका फोड़ा। महिला श्यामो, गुड्डी, बीरमती, प्रेमो, निर्मला, प्यारी, कमला, चमेली और संतरो ने बताया कि उनके गांव का ट्यूबवेल जनवरी माह में खराब हो गया था।
अधिकारियों जल्द ही ट्यूबवेल लगवाने का भरोसा दिया था। लेकिन गांव में ट्यूबवेल नहीं लगा। वे कई बार अधिकारियों से मिलीं। लेकिन अधिकारियों ने उनको आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं दिया। गांव में ट्यूबवेल पर तीन सौ घर लगते हैं।
उनको पानी को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है। वे दूर से पानी लाकर अपने परिवार को चलाने को मजबूर हैं। लेकिन अधिकारी उनकी परेशानी समझने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने गत सप्ताह भी ट्यूबवेल को लेकर मशीन पहुंचाने की बात कही थी। लेकिन गांव में मशीन नहीं पहुंची। वे ट्यूबवेल की मांग को लेकर जल्द ही प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगी।
महिलाओं का आरोप है कि गांव में एक साल से ट्यूबवेल खराब है। लेकिन अधिकारी आश्वासन ही दे रहे हैं। अधिकारियों ने महिलाओं को समझाकर शांत किया।
नांगल खेड़ी की एक साल से ट्यूबवेल की मांग कर रही महिलाओं का मंगलवार को गुस्सा फूट गया। वे सिविल अस्पताल स्थित जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में पहुंची और एक्सईएन के कार्यालय में मटका फोड़ा। महिला श्यामो, गुड्डी, बीरमती, प्रेमो, निर्मला, प्यारी, कमला, चमेली और संतरो ने बताया कि उनके गांव का ट्यूबवेल जनवरी माह में खराब हो गया था।
अधिकारियों जल्द ही ट्यूबवेल लगवाने का भरोसा दिया था। लेकिन गांव में ट्यूबवेल नहीं लगा। वे कई बार अधिकारियों से मिलीं। लेकिन अधिकारियों ने उनको आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं दिया। गांव में ट्यूबवेल पर तीन सौ घर लगते हैं।
विज्ञापन
उनको पानी को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है। वे दूर से पानी लाकर अपने परिवार को चलाने को मजबूर हैं। लेकिन अधिकारी उनकी परेशानी समझने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने गत सप्ताह भी ट्यूबवेल को लेकर मशीन पहुंचाने की बात कही थी। लेकिन गांव में मशीन नहीं पहुंची। वे ट्यूबवेल की मांग को लेकर जल्द ही प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगी।
विज्ञापन