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स्कंदमाता की पूजा-अर्चना कर मांगी खुशहाली
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Worshiping Skandmata sought happiness
- फोटो : Panipat
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पानीपत। नवरात्र के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना कर पारिवारिक शांति की कामना की। श्रद्धालु सुबह ही माता के मंदिरों में पहुंचे। वहां विधि-विधान से पूजा कर मां से आशीर्वाद मांगा। शहर के ऐतिहासिक देवी मंदिर, अवध धाम मंदिर, राधा रमण मंदिर, गीता मंदिर सहित अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वीरवार को शहर स्थित ऐतिहासिक देवी मंदिर में नवरात्र उत्सव मनाया जाएगा।
अवध धाम मंदिर से पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि मां स्कंदमाता की पूजा संतान सुख के लिए की जाती है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों की रक्षा पुत्र के समान करती है। नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां की कृपा से बुद्धि का विकास होता है और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां की कृपा से पारिवारिक शांति की प्राप्ति होती है। मां की आराधना से सुख और शांति की प्राप्ति होती है।
आज होगी मां कात्यायनी की पूजा
अवध धाम मंदिर से पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि महर्षि कात्यायन ने आदिशक्ति की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद मां ने उन्हें पुत्री रूप में उनके यहां जन्म लेने का वरदान दिया था। ऋषि कात्यायन के घर जन्म लेने के कारण ही मां को कात्यायनी नाम से जाना जाता है। मां कात्यायनी की पूजा से कुंडली की स्थिति सुधरती है। आज्ञा चक्र जागृत होता है, जिसकी वजह से सभी सिद्धियों की प्राप्ति साधक को स्वयं ही हो जाती है। मां की उपासना से शोक, संताप, भय सब नष्ट होते हैं।
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अवध धाम मंदिर से पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि मां स्कंदमाता की पूजा संतान सुख के लिए की जाती है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों की रक्षा पुत्र के समान करती है। नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां की कृपा से बुद्धि का विकास होता है और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां की कृपा से पारिवारिक शांति की प्राप्ति होती है। मां की आराधना से सुख और शांति की प्राप्ति होती है।
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आज होगी मां कात्यायनी की पूजा
अवध धाम मंदिर से पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि महर्षि कात्यायन ने आदिशक्ति की कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद मां ने उन्हें पुत्री रूप में उनके यहां जन्म लेने का वरदान दिया था। ऋषि कात्यायन के घर जन्म लेने के कारण ही मां को कात्यायनी नाम से जाना जाता है। मां कात्यायनी की पूजा से कुंडली की स्थिति सुधरती है। आज्ञा चक्र जागृत होता है, जिसकी वजह से सभी सिद्धियों की प्राप्ति साधक को स्वयं ही हो जाती है। मां की उपासना से शोक, संताप, भय सब नष्ट होते हैं।
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