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लगाव: पालतू कुत्ते की मौत पर पूजन और सत्रहवीं का भोज, परिवार के साथ पड़ोसियों ने भी की अरदास
Tue, 01 Feb 2022 01:03 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 01 Feb 2022 01:03 AM IST
सार
पालतू कुत्ते शेरू की मौत के बाद रविवार को उसकी सत्रहवीं का भोज आयोजित किया गया। इससे पूर्व हवन और पूजन की रस्म भी अदा की।
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कुत्ते की तस्वीर पर चढ़ाया हार।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
इंसान और कुत्तों के बीच प्रेम के कई उदाहरण समाज में देखे और सुने जाते हैं। ऐसी कई कहानियां रुपहले परदे पर भी उतारी जा चुकी हैं। इसी प्रकार के एक प्रेम की कहानी हरियाणा के पानीपत जिले के गांव बबैल निवासी महाबीर सिंह और उनके परिवार में भी देखने को मिली। उनके पालतू कुत्ते शेरू की मौत के बाद रविवार को उसकी सत्रहवीं का भोज आयोजित किया गया। इससे पूर्व हवन और पूजन की रस्म भी अदा की।
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मूल रूप से गांव बबैल और हाल में वार्ड नंबर-6 स्थित भारत नगर के रहने वाले महाबीर अहलावत और उनके परिवार ने इंसान और पशु प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने 15 वर्षीय पालतू कुत्ते शेरू की मौत पर उसकी आत्मा की शांति के लिए हवन करवाया। दोबारा उनके घर ही आने के लिए पूजा अर्चना की। साथ ही शेरू की सत्रहवीं मनाते हुए लोगों को हलवा-पूड़ी का भोज करवाया।
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खास बात यह है कि इस हवन, पूजा और भोज में महाबीर के परिवार के साथ उनके रिश्तेदार और पड़ोसी भी शामिल हुए। सभी ने शेरू की वफादारी के बारे में बताया। सभी ने शेरू की फोटो पर पुष्प अर्पित करते हुए उसे श्रद्धांजलि भी दी।
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महाबीर अहलावत ने बताया कि करीब 15 साल पहले महज 15 दिन के शेरू को वह घर लाए थे। परिवार ने उसे बड़े चाव से पाला और उसे ‘शेरू’ नाम दिया। परिवार के सभी लोगों ने हमेशा शेरू को परिवार के सदस्य की तरह माना। शेरू उनके घर, दुकान यहां तक कि खेतों और आस-पड़ोस की भी रखवाली करता था। 15 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद 27 जनवरी को शेरू की मौत हो गई। इसके बाद दुखी परिजनों ने दफनाकर उसे अंतिम विदाई दी। रविवार शाम को परिवार वालों ने उसे याद करते हुए उनकी सत्रहवीं मनाई और भोज दिया गया।