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Panipat News: बारिश से तटबंध मजबूत करने का कार्य बाधित
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यमुना में पड़े पत्थर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सनौली। क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही तेज बारिश के चलते बाढ़ बचाव प्रबंधन के तहत यमुना तटबंध को मजबूत करने का कार्य पूरी तरह बाधित हो गया है। बारिश के कारण तटबंध की मिट्टी अत्यधिक गीली और दलदली होने की वजह से पत्थरों से लदे भारी-भरकम डंपर और पोकलेन मशीनें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही बरसात से यमुना नदी के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है। इससे तटबंध के आसपास लगते करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीण गहरी चिंता में डूब गए हैं।
सिंचाई विभाग द्वारा बाढ़ सुरक्षा पुख्ता करने के लिए करीब 9.60 करोड़ रुपये की लागत से गांव तामशाबाद, गोयला, खोजकीपुर व बिलासपुर में पत्थरों की नई ठोकरें (स्टड) लगाने, पुरानी ठोकरों की मरम्मत और रिवेटमेंट का कार्य करवाया जा रहा है। तीन जुलाई को ही पानीपत के उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने अधिकारियों के साथ यमुना तटबंध का दौरा कर सभी कार्य युद्धस्तर पर पूरे करने के निर्देश दिए थे।
नवादा आर के पूर्व सरपंच ताहिर और तामशाबाद के पूर्व सरपंच गजे सिंह सहित ग्रामीणों का कहना है कि यह काम हर हाल में 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए था। अब यमुना के पुल के पास जहां पहले सिर्फ एक खाने में नाममात्र पानी चल रहा था, वहीं अब तीन खानों में पानी बहने लगा है। ग्रामीणों को डर है कि यदि नदी का पानी तटबंध के पास आ गया, तो पानी के भीतर पत्थरों की ठोकरें कैसे लग पाएंगी। गौरतलब है कि 11 जुलाई 2023 को नवादा आर के पास ही यमुना का बांध टूटा था, जिससे दो दर्जन से अधिक गांवों की फसलें और घर तबाह हो गए थे।
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22 गांवों पर रहता है सीधे बाढ़ का खतरा
पानीपत जिले में राणा माजरा से लेकर हथवाला व राक्सेडा तक यमुना नदी करीब 37 किलोमीटर के दायरे में बहती है। इससे सटे 22 गांवों पर हमेशा बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है। सरपंच संजय त्यागी (सनौली खुर्द), राजदीप (रिशपुर), सलीम अहमद (पत्थरगढ़), जोगेंद्र (नवादा आर) तथा यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष रत्तन सिंह रावल एडवोकेट और जिला पार्षद प्रतिनिधि विपिन पांचाल ने प्रशासन से मांग की है कि जहां भी पत्थर डाले गए हैं, वहां तार काटने व ठोकरें बनाने का काम जल्द निपटाया जाए, वरना पानी और बढ़ने पर काम असंभव हो जाएगा।
वर्जन
दो दिन से हो रही बारिश के कारण तटबंध पर पत्थरों से लोड डंपर नहीं चल पा रहे हैं। जैसे ही मौसम साफ होगा और तटबंध की मिट्टी थोड़ी सूखेगी। इसके बाद बाढ़ बचाव प्रबंधन के कार्यों को बेहद तेजी से दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।
सतीश कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग।
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सनौली। क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही तेज बारिश के चलते बाढ़ बचाव प्रबंधन के तहत यमुना तटबंध को मजबूत करने का कार्य पूरी तरह बाधित हो गया है। बारिश के कारण तटबंध की मिट्टी अत्यधिक गीली और दलदली होने की वजह से पत्थरों से लदे भारी-भरकम डंपर और पोकलेन मशीनें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही बरसात से यमुना नदी के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है। इससे तटबंध के आसपास लगते करीब दो दर्जन गांवों के ग्रामीण गहरी चिंता में डूब गए हैं।
सिंचाई विभाग द्वारा बाढ़ सुरक्षा पुख्ता करने के लिए करीब 9.60 करोड़ रुपये की लागत से गांव तामशाबाद, गोयला, खोजकीपुर व बिलासपुर में पत्थरों की नई ठोकरें (स्टड) लगाने, पुरानी ठोकरों की मरम्मत और रिवेटमेंट का कार्य करवाया जा रहा है। तीन जुलाई को ही पानीपत के उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने अधिकारियों के साथ यमुना तटबंध का दौरा कर सभी कार्य युद्धस्तर पर पूरे करने के निर्देश दिए थे।
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नवादा आर के पूर्व सरपंच ताहिर और तामशाबाद के पूर्व सरपंच गजे सिंह सहित ग्रामीणों का कहना है कि यह काम हर हाल में 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए था। अब यमुना के पुल के पास जहां पहले सिर्फ एक खाने में नाममात्र पानी चल रहा था, वहीं अब तीन खानों में पानी बहने लगा है। ग्रामीणों को डर है कि यदि नदी का पानी तटबंध के पास आ गया, तो पानी के भीतर पत्थरों की ठोकरें कैसे लग पाएंगी। गौरतलब है कि 11 जुलाई 2023 को नवादा आर के पास ही यमुना का बांध टूटा था, जिससे दो दर्जन से अधिक गांवों की फसलें और घर तबाह हो गए थे।
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22 गांवों पर रहता है सीधे बाढ़ का खतरा
पानीपत जिले में राणा माजरा से लेकर हथवाला व राक्सेडा तक यमुना नदी करीब 37 किलोमीटर के दायरे में बहती है। इससे सटे 22 गांवों पर हमेशा बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है। सरपंच संजय त्यागी (सनौली खुर्द), राजदीप (रिशपुर), सलीम अहमद (पत्थरगढ़), जोगेंद्र (नवादा आर) तथा यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष रत्तन सिंह रावल एडवोकेट और जिला पार्षद प्रतिनिधि विपिन पांचाल ने प्रशासन से मांग की है कि जहां भी पत्थर डाले गए हैं, वहां तार काटने व ठोकरें बनाने का काम जल्द निपटाया जाए, वरना पानी और बढ़ने पर काम असंभव हो जाएगा।
वर्जन
दो दिन से हो रही बारिश के कारण तटबंध पर पत्थरों से लोड डंपर नहीं चल पा रहे हैं। जैसे ही मौसम साफ होगा और तटबंध की मिट्टी थोड़ी सूखेगी। इसके बाद बाढ़ बचाव प्रबंधन के कार्यों को बेहद तेजी से दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।
सतीश कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग।

यमुना में पड़े पत्थर। संवाद