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बैंकों में काम ठप, भटके उपभोक्ता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:48 AM IST
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Work in banks stalled, stray consumers
पानीपत। जीटी रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के बाहर गेट पर लगा हुआ हड़ताल का पोस्टर। - फोटो : Panipat
पानीपत। राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण के विरोध में विभिन्न बैकों के कर्मचारी वीरवार को हड़ताल पर रहे है। शुक्रवार को भी हड़ताल रहेगी। इस मौके पर बैंककर्मियों ने कहा कि बैंकों की हड़ताल की सरकार जिम्मेदार है। अगर उनकी सुनवाई करते हुए निजीकरण की प्रक्रिया को टाला नहीं किया गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।
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स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, कैनरा बैंक, सेंट्रल बैंक समेत अन्य राष्ट्रीय बैंक के कर्मचारी वीरवार को यूनियन बैंक के सामने दो दिवसीय हड़ताल को लेकर एकत्र हुए। हड़ताल के पहले दिन वीरवार को कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो किसानों की तरह धरने पर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी बैंक घाटे में नहीं है। इसके बाद भी सरकार घाटे में जाने की बात कहकर बैंकों का निजीकरण करना चाह रही है। निजी बैंक होते ही उन्हें नौकरियों से निकाल दिया जाएगा। कोई सरकारी लाभ भी नहीं मिलेगा।
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बैंक कर्मियों का कहना है कि जब भी निजी बैंक डूबते हैं तो सरकारी बैंक ही संभालता है। सभी बैंक निजी हो गए तो गरीब इंसान बैंक में खाता तक नहीं खुलवा सकेगा। निजी बैंक में 10 हजार रुपये से खाता खोला जाता है और उसमें से भी पांच हजार रुपये हमेशा खाते में रखने होते हैं। सरकारी बैंक में शून्य से लेकर 1000 हजार रुपये तक से खाता खुल सकता है।
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हड़ताल में मुख्य तौर पर यूनियन बैंक से रणधीर पंवार, पंजाब एंड सिंध से प्रद्युम्न, एसबीआई से नरेश देशवाल, पीएनबी से सुभाष, सेंट्रल बैंक से प्रदीप, और एसबीआई से सोनू रावल मुख्य तौर पर मौजूद रहे।
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