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Panipat News: हक और सम्मान के लिए अपनों से ही लड़ रहीं महिलाएं

Fri, 27 Mar 2026 03:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Fri, 27 Mar 2026 03:33 AM IST
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Women fighting against their own people for their rights and respect
पानीपत। महिला सशक्तिकरण के दावों के बीच महिलाओं का संघर्ष कम नहीं हो रहा है। वे आज भी अपने हक और सम्मान के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। महिला संरक्षण अधिकारी कार्यालय में पहुंचने वाली ज्यादातर शिकायतें सम्मान से जुड़ी हैं। खास तौर पर पति की मौत के बाद महिलाओं को ससुराल में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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महिला संरक्षण कार्यालय में करीब एक साल में महिलाओं की शिकायतों पर काउंसिलिंग की गई तो कई तथ्य सामने आएं। 30 से ज्यादा शिकायतें ऐसी रही जिनमें महिलाओं ने अपने हक और सम्मान के लिए शिकायतें की हैं। इनमें भी ज्यादातर महिलाएं ऐसी थी जिनके पति की मौत हो चुकी थी। शिकायतों की सुनवाई के दौरान सामने आया है कि पति की मौत के बाद महिलाओं को ससुराल में उतना सम्मान नहीं मिल रहा। कई बार तो उन्हें बच्चों से भी दूर कर दिया जाता है। जिस कारण महिलाओं को हक के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती हैं। ब्यूरो
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केस-1
पानीपत की एक महिला ने महिला संरक्षण अधिकारी के कार्यालय में शिकायत दी कि उनके पति की मौत हो चुकी है। छह माह बाद ही ससुराल वालों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद उसके बेटे को अपने पास रखकर उसे मायके भेज दिया। बार-बार मांग करने के बावजूद भी अब बच्चे से मुलाकात नहीं करने देते। परेशान होकर उन्होंने महिला संरक्षण कार्यालय में शिकायत दी। जहां पर दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की गई।
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केस-2
पानीपत के थाना किला क्षेत्र की एक महिला ने शिकायत में बताया कि पति से अनबन होने के बाद वह अपने मायके में रहने लगी। जिस कारण ससुराल वालों ने उसका हाल-चाल लेना भी बंद कर दिया। अब वह अपना हक मांगती है तो उसे उसका हक नहीं दिया जा रहा। इस मामले में भी दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की गई है। जिससे परिवार को टूटने से बचाया जा सके।


--वर्जन
महिलाओं की शिकायतों में बड़ी संख्या ऐसी है जो अपने हक की मांग की है। हक न मिलने पर महिलाएं ससुराल या मायके वालों के खिलाफ शिकायत देती हैं। उनका प्रयास रहता है कि काउंसिलिंग के बाद परिवारों को जोड़ा जाए।
-रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी।
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