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गुरु बिन ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिले ने मोक्ष

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Sep 2021 02:02 AM IST
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Without guru knowledge does not arise, without guru we will not get salvation.
शिक्षक दिवस जीवन में गुरु के महत्व को प्रकट करने का दिवस है। गुरु पूजन, अभिनंदन और कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है। शिक्षक दिवस पर शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने उनके जीवन में गुरु के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि गुरु बिना जीवन में आगे नहीं बढ़ा जा सकता। गुरु ही सभी को सही राह दिखाता है।
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डीईओ रमेश कुमार ने बताया कि जिंदगी में शिक्षक का बड़ा महत्व होता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाई में ही बच्चों की मदद करते हैं बल्कि वह जिंदगी में आगे और सही दिशा में बढ़ने की राह भी दिखाते हैं। मेरे जीवन में आदर्श प्राइमरी के अध्यापक रतन सिंह धनखड़ रहे। वे गांव खुबड़ू से मेरे पैतृक गांव अहीर माजरा में पढ़ाने आते थे। वे हमारे मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक रहे। मैं जीवन भर सीखता रहा हूं क्योंकि मैं अभी भी एक महान शिक्षक से प्रेरित हूं।
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डॉ. संजय अंतिल, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग ने बताया कि आधुनिक युग में शिक्षक की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। शिक्षक वह पथ प्रदर्शक होता है जो हमें किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है। जीवन में भी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा का महत्वपूर्ण स्थान है। मैंने अपने शिक्षा में मार्गदर्शन, दोस्ती, अनुशासन और प्यार, सब कुछ पाया।
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सरोजबाला, पूर्व उपनिदेशक, शिक्षा विभाग पानीपत ने कहा कि शिक्षक को समाज के व्यक्तित्व विकास का दायित्व सौंपा है। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं। एक समृद्ध हर्षित राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। छठी कक्षा में सुखवर्षा दुआ कक्षा इंचार्ज थीं, जिन्होंने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। उनके मार्गदर्शन से जीवन में मेहनत करने की प्रेरणा मिली।
डॉ. वीरेंद्र आर्य, उपनदिशक, कृषि विभाग ने बताया कि पानीपत। शिक्षक का दर्जा समाज में हमेशा से ही सम्मानित व्यक्ति का रहा है। शिक्षक शब्द एक ऐसे व्यक्ति को चित्रित करता हैं, जो सभी को ज्ञान देता है, सिखाता है और जिसका योगदान किसी भी देश या राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है। जीवन में प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र सिंह श्योकंद ने विशेष प्रभाव डाला और जीवन को सही दिशा दी। एग्रीकल्चर कॉलेज कौल, जिला कैथल से बीएससी की थी। डॉ. राजेंद्र सिंह श्योकंद की प्रेरणा और मार्गदर्शन ने जीवन में सफलता की राह दिखाई।

प्रो. दिनेश गाहल्याण, आर्य कॉलेज का कहना है कि एक सफल इंसान के पीछे खुद की मेहनत तो है ही, लेकिन गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग की भी बड़ी भूमिका होती है। एक शिक्षक ही शिक्षार्थी के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है। शिक्षक को ईश्वर तुल्य माना जाता है। आज भी बहुत से शिक्षक शिक्षकीय आदर्शों पर चलकर एक आदर्श मानव समाज की स्थापना में भूमिका निभा रहे हैं।
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