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‘जो कथा से आकर्षित कर ले, वो श्रीकृष्ण’
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प्रवचन देते हुए श्री कांत शास्त्री।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। गीता जयंती के उपलक्ष्य में श्रीराम शिशु विद्या मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकांत शास्त्री महाराज ने श्रीकृष्ण लीला का गुणगान किया। उन्होंने बताया कि दो जो सभी को अपनी कथा व नाम से अपनी और आकर्षित कर लें, उसे श्रीकृष्ण कहते हैं। ऐसे प्रभु श्री कृष्ण ने बाल लीला व माखन चोरी के माध्यम से गोपियों के मन को चुरा लिया था। इससे गोपियां सदा श्रीकृष्ण में तन्मय रहतीं और सदा श्रीकृष्ण दर्शन के लिए लालायित रहती थीं।
उन्होंने कहा कि यदि जीव भगवान में तन्मय हो जाए और श्रीकृष्ण दर्शन को लालायित रहे तो मानो उसने जीवन का वास्तविक फल पा लिया। उन्होंने कहा कि जो जीवन श्रीकृष्ण की सेवा में न लगे, वह व्यर्थ है। जीव भले ही सांसारिक कार्यों की पूर्ति करता रहे लेकिन मन का तार प्रभु चरणों से जोड़ कर रखना चाहिए क्योंकि गोपियां गृह के सभी कार्य करती थीं लेकिन मन कन्हैया के चरणों में रहता था। यह स्थिति पाने पर फिर भगवान भगत के कार्यों को पूरा करते हैं। इसलिए भगवान ने ग्वाल बाल व गोपियों के अनेक संकटों का हरण करते हुए तमाम असुरों का संहार किया और गायों को बढ़ाने वाले गिरी गोवर्धन नाथ का पूजन कराया। बाद में सभी भक्तों ने दुग्ध धारा से गिरी गोवर्धन नाथ का अभिषेक किया और 56 व्यंजनों का भोग लगाया। सभी भक्त निहाल होकर झूम उठे और गोवर्धन नाथ की जय जयकार की।
स्वर सम्राट लेखराज जताना ने गोवर्धन पूजा पर खुशी के भजन गाए। सभी श्रद्धालु पानीपत बैठे-बैठे गोवर्धन की दर्शन कर आए। ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने भी भागवत कथा का आनंद लिया। श्रीराम शिशु विद्या मंदिर के प्रधान श्याम सुंदर बत्रा, पार्षद अशोक नारंग, कथा आयोजक राजकुमार कत्याल, इंद्रा कत्याल, तरुणा कत्याल ने सभी श्रोताओं का दिल से धन्यवाद किया। इस मौके पर श्रीराम शिशु विद्या मंदिर के सभी सेवादार, जन सेवा दल से चमन गुलाटी, किशन मनचंदा आदि भी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि यदि जीव भगवान में तन्मय हो जाए और श्रीकृष्ण दर्शन को लालायित रहे तो मानो उसने जीवन का वास्तविक फल पा लिया। उन्होंने कहा कि जो जीवन श्रीकृष्ण की सेवा में न लगे, वह व्यर्थ है। जीव भले ही सांसारिक कार्यों की पूर्ति करता रहे लेकिन मन का तार प्रभु चरणों से जोड़ कर रखना चाहिए क्योंकि गोपियां गृह के सभी कार्य करती थीं लेकिन मन कन्हैया के चरणों में रहता था। यह स्थिति पाने पर फिर भगवान भगत के कार्यों को पूरा करते हैं। इसलिए भगवान ने ग्वाल बाल व गोपियों के अनेक संकटों का हरण करते हुए तमाम असुरों का संहार किया और गायों को बढ़ाने वाले गिरी गोवर्धन नाथ का पूजन कराया। बाद में सभी भक्तों ने दुग्ध धारा से गिरी गोवर्धन नाथ का अभिषेक किया और 56 व्यंजनों का भोग लगाया। सभी भक्त निहाल होकर झूम उठे और गोवर्धन नाथ की जय जयकार की।
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स्वर सम्राट लेखराज जताना ने गोवर्धन पूजा पर खुशी के भजन गाए। सभी श्रद्धालु पानीपत बैठे-बैठे गोवर्धन की दर्शन कर आए। ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने भी भागवत कथा का आनंद लिया। श्रीराम शिशु विद्या मंदिर के प्रधान श्याम सुंदर बत्रा, पार्षद अशोक नारंग, कथा आयोजक राजकुमार कत्याल, इंद्रा कत्याल, तरुणा कत्याल ने सभी श्रोताओं का दिल से धन्यवाद किया। इस मौके पर श्रीराम शिशु विद्या मंदिर के सभी सेवादार, जन सेवा दल से चमन गुलाटी, किशन मनचंदा आदि भी मौजूद रहे।
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