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Panipat News: तेज हवाओं से बदला मौसम, कई इलाकों में बिजली गुल
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। शनिवार रात जिले में मौसम अचानक बिगड़ गया। दिनभर धूप खिलने के बाद रात को आसमान में काले बादल छा गए। इस बीच गरज-चमक के साथ करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं। तेज हवाओं के बीच शहर के कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। कई स्थानों पर पेड़ भी गिर गए।
रेलवे रोड फीडर की बिजली रात करीब 8:30 बजे गुल हो गई, जो रात 10 बजे बहाल हुई। वहीं, जाटल रोड फीडर की बिजली रात करीब 10:30 बजे बंद हो गई और देर रात तक बहाल नहीं हो पाई। इससे संधापुर, ज्योति कॉलोनी, दत्त कॉलोनी और वर्क नगर सहित आसपास की कई कॉलोनियों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
आंधी थमने के बाद बिजली निगम की टीमें आपूर्ति बहाल करने के लिए जुट गईं। बिजली लाइनों, फीडरों और अन्य उपकरणों की जांच कर फॉल्ट तलाशने का काम शुरू किया गया।
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मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण एक दिन पहले ही पानीपत समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का यलो अलर्ट जारी किया था।
कृषि विज्ञान केंद्र उझा के जिला समन्वयक डॉ. सतपाल ने किसानों और आढ़तियों को मंडियों में रखी फसल को तिरपाल से ढककर सुरक्षित रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खेतों में कटी हुई फसल को भी जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके।
मंडी में खुले में पड़ा धान, किसान चिंतित
अनाज मंडियों में सरकारी खरीद एजेंसियों हैफेड और हरियाणा राज्य भंडारण निगम ने अब तक 11,140 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। इसके मुकाबले केवल 4,046 मीट्रिक टन धान का उठान हो पाया है। खरीदे गए धान में से 7,094 मीट्रिक टन अभी भी मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा है। मौसम में बदलाव के बीच उठान की धीमी रफ्तार किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। बारिश होने पर खुले में रखी फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
पिछले दो दिनों से मंडी में धान लेकर बैठे हैं, लेकिन अभी तक सरकारी खरीद नहीं हो पाई है। धान खुले में पड़ा है। शाम को बादल गरजने और तेज हवाएं चलने से चिंता बढ़ गई है। बारिश हुई तो फसल को नुकसान हो सकता है।
-रामकरण, किसान, गांव अहर
धान के उठान में तेजी लानी चाहिए। हर साल खरीद सीजन में मौसम खराब होने का खतरा बना रहता है। उठान धीमा होने से परेशानी बढ़ जाती है। मंडियों में बारिश होने पर फसल को नुकसान से बचाया जा सके। -सतबीर सिंह, किसान, गांव नौल्था
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पानीपत। शनिवार रात जिले में मौसम अचानक बिगड़ गया। दिनभर धूप खिलने के बाद रात को आसमान में काले बादल छा गए। इस बीच गरज-चमक के साथ करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं। तेज हवाओं के बीच शहर के कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। कई स्थानों पर पेड़ भी गिर गए।
रेलवे रोड फीडर की बिजली रात करीब 8:30 बजे गुल हो गई, जो रात 10 बजे बहाल हुई। वहीं, जाटल रोड फीडर की बिजली रात करीब 10:30 बजे बंद हो गई और देर रात तक बहाल नहीं हो पाई। इससे संधापुर, ज्योति कॉलोनी, दत्त कॉलोनी और वर्क नगर सहित आसपास की कई कॉलोनियों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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आंधी थमने के बाद बिजली निगम की टीमें आपूर्ति बहाल करने के लिए जुट गईं। बिजली लाइनों, फीडरों और अन्य उपकरणों की जांच कर फॉल्ट तलाशने का काम शुरू किया गया।
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मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण एक दिन पहले ही पानीपत समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का यलो अलर्ट जारी किया था।
कृषि विज्ञान केंद्र उझा के जिला समन्वयक डॉ. सतपाल ने किसानों और आढ़तियों को मंडियों में रखी फसल को तिरपाल से ढककर सुरक्षित रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खेतों में कटी हुई फसल को भी जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में नुकसान से बचा जा सके।
मंडी में खुले में पड़ा धान, किसान चिंतित
अनाज मंडियों में सरकारी खरीद एजेंसियों हैफेड और हरियाणा राज्य भंडारण निगम ने अब तक 11,140 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। इसके मुकाबले केवल 4,046 मीट्रिक टन धान का उठान हो पाया है। खरीदे गए धान में से 7,094 मीट्रिक टन अभी भी मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा है। मौसम में बदलाव के बीच उठान की धीमी रफ्तार किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। बारिश होने पर खुले में रखी फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
पिछले दो दिनों से मंडी में धान लेकर बैठे हैं, लेकिन अभी तक सरकारी खरीद नहीं हो पाई है। धान खुले में पड़ा है। शाम को बादल गरजने और तेज हवाएं चलने से चिंता बढ़ गई है। बारिश हुई तो फसल को नुकसान हो सकता है।
-रामकरण, किसान, गांव अहर
धान के उठान में तेजी लानी चाहिए। हर साल खरीद सीजन में मौसम खराब होने का खतरा बना रहता है। उठान धीमा होने से परेशानी बढ़ जाती है। मंडियों में बारिश होने पर फसल को नुकसान से बचाया जा सके। -सतबीर सिंह, किसान, गांव नौल्था