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Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Weather blow to the textile industry

टेक्सटाइल उद्योग को मौसम का झटका

Sat, 08 Feb 2014 11:47 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
अमर उजाला, पानीपत Updated Sat, 08 Feb 2014 11:47 PM IST
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पानीपत। कोहरे के उम्मीद से लंबा दौर चलते और अब रह-रहकर बूंदाबांदी होने के कारण वातावरण में व्याप्त नमी के कारण टेक्सटाइल उद्योग की रंगे धागे की नियमित सप्लाई ने मिलने से झटका लगा है। 
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इसका सीधा असर टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ रहा है। निर्यातकाें की माने तो डेढ़ माह की अवधि में होने वाले उत्पादन में 70 फीसदी तक की कमी आई है। ऐसे में निर्यातकाें को समय पर विदेशी आर्डर पूरा करने में पसीने छूट रहे हैं।
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आए दिन बदलते मौसम के कारण पानीपत के विश्व विख्यात टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिष्ठा दाव पर हैं। इस स्थिति से पार पाने के लिए निर्यातकाें व डाई हाउस मालिक  को कुछ नहीं सूझ रहा है।
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पानीपत से करीब 4500 करोड़ रूपये के टेक्सटाइल उत्पाद निर्यात होते हैं। इसके अलावा कई हजार करोड़ रुपये का घरेलू बाजार में कारोबार है। मगर करीब डेढ़ माह से कोहरे व बारिश के चलते नमी 85 से 100 प्रतिशत तक पहुंचने से टेक्सटाइल उद्योग की ‘मां’ कहे जाने वाला डाई उद्योग लड़खड़ा गया।

अत्यधिक ठंड ने जिले में  प्रति दिन औसतन डेढ़ लाख क्विंटल धागे और कपडे़ की रंगाई करने वाले करीब एक हजार डाई हाउस काम बंद करने पर मजबूूर कर रखा था। कारण धागे और कपडे़ की डाई (रंगाई) करने के बाद उसे धूप में सुखाया जाता है।

धूप में सूखने पर ही कपडे़ और धागे पर चढ़ाए गए रंग की सही गुणवत्ता का पता चलता है। लेकिन लगातार गिर रहे घने कोहरे, बाद में बारिश का दौर चलने के कारण धूप नहीं खिलने से रंगाई के कपडे़ और धागे पर चमक नहीं आ रही थी। इससे खासकर एक्सपोर्ट होने वाले आइटम के लिए धागा डाई करने वाले करीब 300 डाई हाउसाें में कामकाज लगभग बंद है।

डाई किए धागे की आपूर्ति न मिलने से टेक्सटाइल उद्योग लड़खड़ा गया है। जब समय पर कच्चा माल ही नहीं मिलेगा तो उत्पादन कैसे होगा। यही सब टेक्सटाइल उद्योग के साथ हो रहा है। धागे के रेट में आए दिन उतार-चढ़ाव होने के कारण निर्यातक धागे का अधिक स्टॉक नहीं कर पाते।

ऐसे में उनके सामने समय पर आर्डर पूरा करने की चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा होने के कारण उनकी प्रतिष्ठा दाव पर लगी है।

कोट्स
कोहरा व नमी बढ़ने से समय पर धागा नहीं सूख पा रहा था। जब धागा ही नहीं सूखेगा तो आगे माल कैसे तैयार होगा और तय समय पर डिलीवरी कैसे दे पाएंगे। समय पर माल नहीं देने से मार्केट में प्रतिष्ठा तो प्रभावित होती है साथ ही कई बार निर्यातक भुगतान पर भी रोक दिया जाता है। इससे निजात पाने को सूर्य की रोशनी के बजाय हीटर की ताप में धागा सूखाकर समय पर काम पूरा किया। जिससे कॉस्ट बढ़कर कई गुणा हो गया है। कॉस्ट बढ़ने से मुनाफे की बजाय नुकसान हो रहा है।
तरुण गांधी, डायर्स हाउस संचालक

कोट्स
खराब मौसम के कारण टेक्सटाइल उद्योग को नुकसान की ओर ले जा रहा है। एक अनुमान के अनुसान डेढ़ माह की अवधि में होने वाले प्रोक्डशन में 70 फीसदी तक कमी आ चुकी है। किसी भी कारोबार के लिए यह एक बड़ा ड्रा बैक हो सकता है। इसकी रिकवरी के लिए आने वाले महीनाें में उत्पादन बढ़ाना होगा।
सुरेश मित्तल, निर्यातक टेक्सटाइल

कोट्स
इस बार उम्मीद से ज्यादा लंबे समय से खराब चल रहा है। इससे डाई हाउस में धागा सूख नहीं पा रहा। समय पर रंगे हुए धागे की डिलीवरी न मिल पाने से टेक्सटाइल इंडस्ट्री लड़खड़ा रही है। ऐसे में समय पर आर्डर पूरा करने में बेहद परेशानी आ रही है। एक्सपोर्टर समझ नहीं पा रहे कि आर्डर समय पर कैसे पूरे होंगे।

रमेश वर्मा, प्रधान हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन

कोट्स
कोहरे और वातावरण में बढ़ी नमी का लंबा दौर चलने के कारण माल पर की गई रंगाई की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित हो जाती है। बिना धूप के माल सूख नहीं पाता ऐसे में खासकर एक्सपोर्ट हाउसाें के लिए काम करने वाले करीब 300 डाई हाउसाें में डेढ़ माह से काम लगभग बंद था। लेबर को खाली बैठे बिठाए वेतन देना पड़ रहा है। काम बंद होने से डाई हाउसाें को रोजाना करीब सात-आठ करोड़ की चपत लग गई।
यशपाल मलिक, अध्यक्ष पानीपत डायर्स एसोसिएशन, पानीपत
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