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एक दर्जन गांव के लिंक रोड को बंद किए जाने पर दूसरे दिन भी जारी रहा ग्रामीणों का धरना, काम रखा बंद
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राष्ट्रीय राज मार्ग बनानी वाली कंपनी द्वारा गांव उझा से रसालपुर जाने वाले और 12 से अधिक गांव को जोड़ने वाले लिंक रोड को स्थायी तौर पर बंद करने के मामले में शनिवार को दूसरे दिन भी ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राज मार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों को स्पष्ट तौर पर चेतावनी दी कि जब तक वे अंडर पास और सर्विस रोड नहीं बनाएंगे तब तक उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। इससे नाराज ग्रामीण कंपनी द्वारा किए जाने वाले रोड निर्माण के काम को भी नहीं होने देंगे। इस पर कंपनी मैनेजर ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वे सर्विस रोड बना देंगे लेकिन ग्रामीण अंडर पास को लेकर अड़े रहे।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि यह रास्ता गांव रसलापुर से गांव ऊझा की ओर जाता है। इस रोड से एक दर्जन से भी ज्यादा गांव जुड़ते हैं। निर्माण करने वाली कंपनी इस रास्ते को स्थायी तौर पर बंद करना चाहती है। जिससे इन सभी गांव के हजारों ग्रामीणों को एक दूसरे गांव में आने जाने के लिए दो किलोमीटर का चक्कर लगाना होगा। उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा परेशानी गांव उझा और रसलापुर के लोगों को होगी। इस रोड पर उनके खेत भी हैं और ग्रामीण एक दूसरे गांव में रोजाना आते जाते भी हैं। अगर केवल इन दोनों गांव की बात करें तो इन लोगों को भी एक दूसरे गांव में आने जाने के लिए दो किलोमीटर का चक्कर लगाना होगा। गौरतलब है कि शनिवार को भी धरना जारी रखा। लेकिन दो दिन धरने पर बैठे ग्रामीणों की सुध लेने अब तक कोई जिला प्रशासन का प्रतिनिधि या कोई राजनेता तक नहीं पहुंचा। इससे भी ग्रामीणों में खासा रोष देखने को मिला है। इस मौके पर धरना देने वाले ग्रामीणों में पूर्व सरपंच श्याम लाल, शुभम गुर्जर राजू, पूर्व पंच रामकिशन, पूर्व पंच विपिन, रामकुमार, भगता, रामचंद्र, सलिंद्र , बबलू मास्टर, बिटू, राजबीर, पूर्व पंच बाबू समेत अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।
सर्विस रोड का आश्वासन, अंडर पास की मांग
नेशनल हाई-वे का निर्माण करने वाली कंपनी के मैनेजर गौरव जैन मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे उनकी सुविधा के लिए यहां सर्विस रोड बना देंगे लेकिन ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि कंपनी को यहां अंडर पास भी बनाना होगा। अगर अंडर पास नहीं बना तो उनका लिंक दूसरे गांव से टूट जाएगा। जिससे उझा और रसलापुर के करीब 50 हजार लोगों को रोजाना आने जाने में परेशानी होगी।
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प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि यह रास्ता गांव रसलापुर से गांव ऊझा की ओर जाता है। इस रोड से एक दर्जन से भी ज्यादा गांव जुड़ते हैं। निर्माण करने वाली कंपनी इस रास्ते को स्थायी तौर पर बंद करना चाहती है। जिससे इन सभी गांव के हजारों ग्रामीणों को एक दूसरे गांव में आने जाने के लिए दो किलोमीटर का चक्कर लगाना होगा। उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा परेशानी गांव उझा और रसलापुर के लोगों को होगी। इस रोड पर उनके खेत भी हैं और ग्रामीण एक दूसरे गांव में रोजाना आते जाते भी हैं। अगर केवल इन दोनों गांव की बात करें तो इन लोगों को भी एक दूसरे गांव में आने जाने के लिए दो किलोमीटर का चक्कर लगाना होगा। गौरतलब है कि शनिवार को भी धरना जारी रखा। लेकिन दो दिन धरने पर बैठे ग्रामीणों की सुध लेने अब तक कोई जिला प्रशासन का प्रतिनिधि या कोई राजनेता तक नहीं पहुंचा। इससे भी ग्रामीणों में खासा रोष देखने को मिला है। इस मौके पर धरना देने वाले ग्रामीणों में पूर्व सरपंच श्याम लाल, शुभम गुर्जर राजू, पूर्व पंच रामकिशन, पूर्व पंच विपिन, रामकुमार, भगता, रामचंद्र, सलिंद्र , बबलू मास्टर, बिटू, राजबीर, पूर्व पंच बाबू समेत अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।
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सर्विस रोड का आश्वासन, अंडर पास की मांग
नेशनल हाई-वे का निर्माण करने वाली कंपनी के मैनेजर गौरव जैन मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि वे उनकी सुविधा के लिए यहां सर्विस रोड बना देंगे लेकिन ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि कंपनी को यहां अंडर पास भी बनाना होगा। अगर अंडर पास नहीं बना तो उनका लिंक दूसरे गांव से टूट जाएगा। जिससे उझा और रसलापुर के करीब 50 हजार लोगों को रोजाना आने जाने में परेशानी होगी।
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