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Panipat News: विक्रांत मलिक ने वर्ल्ड कॉन्टीनेंटल टूर प्रतियोगिता में जीता कांस्य
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पानीपत। पानीपत के उग्राखेड़ी गांव के एथलीट विक्रांत मलिक ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा के नक्शे कदम पर है। व्रिकांत मलिक ने पिछले मई में तीन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। व्रिकांत मलिक ने रविवार को जर्मनी में आयोजित वर्ल्ड कॉन्टीनेंटल टूर प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है।
विक्रांत ने यहां 80 मीटर का थ्रो किया, हालांकि यह उनके बेस्ट प्रदर्शन से कम रहा है। उनका व्यक्तिगत सर्वाधिक थ्रो 82 मीटर है। इससे पहले विक्रांत ने 18 मई को लिसबॉन पुर्तगाल मीट में 80.30 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता था। दूसरे नंबर में एक्वाडोर देश के जोस एसकोबर रहे थे। आठ दिन बाद ही विक्रांत ने एक और पदक भारत की झोली में डाला है। वर्ल्ड कॉन्टीनेंटल टूर प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतने पर उग्राखेड़ी गांव में जश्न का माहौल है। विक्रांत ने पिछले साल ही नेशनल जेवलिन प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। विक्रांत ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा की राह पर हैं। विक्रांत मलिक ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को अपना आदर्श मानते हैं। विक्रांत मलिक के पिता राजेंद्र सेना से नायक सूबेदार के पद से रिटायर हैं। वह अपने समय पर राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती व वाॅलीबॉल में मेडल जीत चुके हैं। राजेंद्र मलिक ही बेटे विक्रांत के कोच हैं। राजेंद्र मलिक ने बताया कि विक्रांत पिछले सात साल से जी तोड़ मेहनत कर रहा है। गांव के स्टेडियम में प्रतिदिन पांच पांच घंटे अभ्यास करता है। अनुशासन से विक्रांत सफलता की सीढि़यां चढ़ रहा है। विक्रांत का सपना ओलंपिक में देश को मेडल दिलाना है। इसके अनुसार ही विक्रांत मेहनत कर रहा है। विक्रांत का बेस्ट थ्रो 82 मीटर है। उम्मीद है कि आने वाले समय पर विश्व भर में व्रिकांत देश का नाम रोशन करेगा।
बॉक्स
व्रिकांत मलिक की उपलिब्धयां
- 22 मार्च 2024 को ओपन थ्रो चैंपियनशिप पटियाला में गोल्ड मेडल ।
- 11 मई 2024 मेमोरियल मीटिंग सलोवेनिया में रजत पदक।
- 18 मई 2024 को लिसबोन पुर्तगाल मीट में गोल्ड मेडल।
- 26 मई 2024 को वर्ल्ड कॉन्टीनेंटल टूर प्रतियोगिता में कांस्य पदक।
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विक्रांत ने यहां 80 मीटर का थ्रो किया, हालांकि यह उनके बेस्ट प्रदर्शन से कम रहा है। उनका व्यक्तिगत सर्वाधिक थ्रो 82 मीटर है। इससे पहले विक्रांत ने 18 मई को लिसबॉन पुर्तगाल मीट में 80.30 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता था। दूसरे नंबर में एक्वाडोर देश के जोस एसकोबर रहे थे। आठ दिन बाद ही विक्रांत ने एक और पदक भारत की झोली में डाला है। वर्ल्ड कॉन्टीनेंटल टूर प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतने पर उग्राखेड़ी गांव में जश्न का माहौल है। विक्रांत ने पिछले साल ही नेशनल जेवलिन प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। विक्रांत ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा की राह पर हैं। विक्रांत मलिक ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा को अपना आदर्श मानते हैं। विक्रांत मलिक के पिता राजेंद्र सेना से नायक सूबेदार के पद से रिटायर हैं। वह अपने समय पर राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती व वाॅलीबॉल में मेडल जीत चुके हैं। राजेंद्र मलिक ही बेटे विक्रांत के कोच हैं। राजेंद्र मलिक ने बताया कि विक्रांत पिछले सात साल से जी तोड़ मेहनत कर रहा है। गांव के स्टेडियम में प्रतिदिन पांच पांच घंटे अभ्यास करता है। अनुशासन से विक्रांत सफलता की सीढि़यां चढ़ रहा है। विक्रांत का सपना ओलंपिक में देश को मेडल दिलाना है। इसके अनुसार ही विक्रांत मेहनत कर रहा है। विक्रांत का बेस्ट थ्रो 82 मीटर है। उम्मीद है कि आने वाले समय पर विश्व भर में व्रिकांत देश का नाम रोशन करेगा।
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व्रिकांत मलिक की उपलिब्धयां
- 22 मार्च 2024 को ओपन थ्रो चैंपियनशिप पटियाला में गोल्ड मेडल ।
- 11 मई 2024 मेमोरियल मीटिंग सलोवेनिया में रजत पदक।
- 18 मई 2024 को लिसबोन पुर्तगाल मीट में गोल्ड मेडल।
- 26 मई 2024 को वर्ल्ड कॉन्टीनेंटल टूर प्रतियोगिता में कांस्य पदक।