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शहर की सफाई के लिए दो जोन का टेंडर खुला
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पानीपत। शहर की सफाई के लिए दो जोन के टेंडर की तकनीकी बिड को सोमवार शाम को खोल दिया गया है। इसमें पांच फर्मों ने हिस्सा लिया था। इनमें से तीन फर्मों के दस्तावेजों में कमी या औपचारिकताएं पूरी न होने पर बाहर का रास्ता दिखाया गया है। दो एजेंसी के दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी मिली हैं। अब इस टेंडर की फाइनेंशियल बिड को खोलने के बाद वर्क ऑर्डर जारी होगा।
इस टेंडर के खुलने की प्रक्रिया निगम की कमेटी की ओर से की गई। इसकी अध्यक्षता नगर निगम के सुपरिंटेंडेंट ने की। इस प्रक्रिया से बाहर हुई एक फर्म ने इस टेंडर के खुलने पर आपत्ति जताई है। एजेंसी मालिक का कहना है कि निगम कमेटी ने जिस एजेंसी को टेंडर दिया है, उसके दस्तावेज अधूरे थे। आरोप है कि अन्य एजेंसी के दस्तावेज अपना अनुभव गिनाते हुए लगाए हैं।
एजेंसी मालिक का यह भी आरोप है कि उनकी एवं दो अन्य फर्म को इस प्रक्रिया से जानबूझकर बाहर किया गया हैं। उन्होंने एक करोड़ रुपये प्रति जोन के हिसाब से टेंडर भरा था। दो जोन की सफाई का टेंडर करीब दो करोड़ रुपये में होना था। निगम कमेटी ने जिस एजेंसी को टेंडर की तकनीकी बिड में पास किया है, उस एजेंसी ने दो करोड़ रुपये का सिर्फ एक जोन का टेंडर भरा है। यानी दो जोन का टेंडर चार करोड़ रुपये का होगा। इससे शहर की सफाई का बजट भी दो गुना हो जाएगा।
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निगम को दी शिकायत
आरोप लगाने वाली एजेंसी के मालिक मुनीष अहमद अंसारी ने कहा कि उन्होंने इस प्रकरण की शिकायत निगम आयुक्त को भी दी है। उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत विजिलेंस को भी देंगे और इस प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा तक खटखटाएंगे।
इन फर्म ने लिया था हिस्सा
इस टेंडर में बालाजी इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट, चाहर कंस्ट्रक्शन कंपनी, गणेशा इंटरप्राइजेज, मुनीष अहमद और पूजा कान्सूलेशन कंपनी ने भाग लिया था। इसमें से चाहर कंस्ट्रक्शन कंपनी और गणेशा इंटरप्राइजेज ही तकनीकी बिड को पास कर पाई है, बाकी की तीन फर्मों को तकनीकी बिड में ही प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा है।
टेंडर को खोलने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। इसके लिए निगम ने अलग से एक कमेटी का गठन भी किया था। जब तक फाइनेंशियल बिड ही नहीं खुलेगी तब तक ये नहीं कहा जा सकता कि किस एजेंसी ने सफाई का टेंडर कितने का भरा है। - आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम
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इस टेंडर के खुलने की प्रक्रिया निगम की कमेटी की ओर से की गई। इसकी अध्यक्षता नगर निगम के सुपरिंटेंडेंट ने की। इस प्रक्रिया से बाहर हुई एक फर्म ने इस टेंडर के खुलने पर आपत्ति जताई है। एजेंसी मालिक का कहना है कि निगम कमेटी ने जिस एजेंसी को टेंडर दिया है, उसके दस्तावेज अधूरे थे। आरोप है कि अन्य एजेंसी के दस्तावेज अपना अनुभव गिनाते हुए लगाए हैं।
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एजेंसी मालिक का यह भी आरोप है कि उनकी एवं दो अन्य फर्म को इस प्रक्रिया से जानबूझकर बाहर किया गया हैं। उन्होंने एक करोड़ रुपये प्रति जोन के हिसाब से टेंडर भरा था। दो जोन की सफाई का टेंडर करीब दो करोड़ रुपये में होना था। निगम कमेटी ने जिस एजेंसी को टेंडर की तकनीकी बिड में पास किया है, उस एजेंसी ने दो करोड़ रुपये का सिर्फ एक जोन का टेंडर भरा है। यानी दो जोन का टेंडर चार करोड़ रुपये का होगा। इससे शहर की सफाई का बजट भी दो गुना हो जाएगा।
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निगम को दी शिकायत
आरोप लगाने वाली एजेंसी के मालिक मुनीष अहमद अंसारी ने कहा कि उन्होंने इस प्रकरण की शिकायत निगम आयुक्त को भी दी है। उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत विजिलेंस को भी देंगे और इस प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा तक खटखटाएंगे।
इन फर्म ने लिया था हिस्सा
इस टेंडर में बालाजी इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट, चाहर कंस्ट्रक्शन कंपनी, गणेशा इंटरप्राइजेज, मुनीष अहमद और पूजा कान्सूलेशन कंपनी ने भाग लिया था। इसमें से चाहर कंस्ट्रक्शन कंपनी और गणेशा इंटरप्राइजेज ही तकनीकी बिड को पास कर पाई है, बाकी की तीन फर्मों को तकनीकी बिड में ही प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा है।
टेंडर को खोलने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। इसके लिए निगम ने अलग से एक कमेटी का गठन भी किया था। जब तक फाइनेंशियल बिड ही नहीं खुलेगी तब तक ये नहीं कहा जा सकता कि किस एजेंसी ने सफाई का टेंडर कितने का भरा है। - आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम