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Panipat News: मंडी में भीगे मिले गेहूं के दो हजार कट्टे
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पानीपत। अनाज मंडियों में खरीद एजेंसियों द्रारा उठान को लेकर पहले दिन से चल रहा ढुलमुल रवैया अब बड़ी समस्या बन गई है। मंडियों से खरीदे गए गेहूं का अब तक पचास फीसदी ही उठान हो पाया है। इस दौरान पिछले दिनों बारिश के चलते पानीपत मंडी में करीब दो हजार कट्टे भीग गए थे। एजेंसियों ने कट्टों को उठाना चाहा तो नीचे से गीले मिले। ऐसे में इस गेहूं को स्टोर में रखा गया तो इसके खराब होने की आशंका रहेगी।
जिले की 12 मंडियों और केंद्रों पर गेहूं खरीद कार्य चल रहा है। नौल्था स्थित खरीद केंद्र पर अभी तक गेहूं नहीं लाया जा सका। इसका बड़ा कारण इसके नजदीक ही इसराना की अनाज मंडी होना भी है। शुक्रवार शाम को पानीपत में दो एमएम बारिश हुई थी।
इसमें किसानों व एजेंसी का खरीदा गेहूं भीग गया था। एजेंसियों ने कट्टे उठाने चाहे तो एक लंबी लाइन में करीब दो हजार कट्टे नीचे से बारिश के पानी में भीगे मिले। इन कट्टों के नीचे बारिश का पानी जमा हो गया था। एक कट्टे में दो से तीन किलोग्राम तक गेहूं खराब होने का अनुमान है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान दिनेश भौक्कर ने बताया कि मंडी में उठान अपेक्षाकृत गति नहीं पकड़ पा रहा है। इससे मंडी में गेहूं उतारने की जगह पर्याप्त नहीं मिल पा रही है। मौसम के लगातार बदलने से किसानों की चिंता बनी हुई है।
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219 करोड़ रुपये किए भुगतान : जिले की मंडियों में 253366 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई। इसमें से 233127 मीट्रिक टन की खरीद की गई। प्रशासन ने 58 प्रतिशत गेहूं के उठान का दावा किया है। वहीं किसानों को 219.0 करोड़ रुपये भुगतान किया गया है।
खाद्य एवं पूर्ति विभाग ने 23 करोड़, हैफेड़ ने 128 और एचडब्ल्यूसी ने 68 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों की है। मंडी में गेहूं की आवक की स्थिति देखें तो सबसे अधिक समालखा अनाज मंडी में 73003 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। मतलौडा में यह 48686 मीट्रिक टन है जबकि पानीपत अनाज मंडी में 26995 मीट्रिक टन गेहूं पहुंचा है।
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जिले की 12 मंडियों और केंद्रों पर गेहूं खरीद कार्य चल रहा है। नौल्था स्थित खरीद केंद्र पर अभी तक गेहूं नहीं लाया जा सका। इसका बड़ा कारण इसके नजदीक ही इसराना की अनाज मंडी होना भी है। शुक्रवार शाम को पानीपत में दो एमएम बारिश हुई थी।
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इसमें किसानों व एजेंसी का खरीदा गेहूं भीग गया था। एजेंसियों ने कट्टे उठाने चाहे तो एक लंबी लाइन में करीब दो हजार कट्टे नीचे से बारिश के पानी में भीगे मिले। इन कट्टों के नीचे बारिश का पानी जमा हो गया था। एक कट्टे में दो से तीन किलोग्राम तक गेहूं खराब होने का अनुमान है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान दिनेश भौक्कर ने बताया कि मंडी में उठान अपेक्षाकृत गति नहीं पकड़ पा रहा है। इससे मंडी में गेहूं उतारने की जगह पर्याप्त नहीं मिल पा रही है। मौसम के लगातार बदलने से किसानों की चिंता बनी हुई है।
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219 करोड़ रुपये किए भुगतान : जिले की मंडियों में 253366 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई। इसमें से 233127 मीट्रिक टन की खरीद की गई। प्रशासन ने 58 प्रतिशत गेहूं के उठान का दावा किया है। वहीं किसानों को 219.0 करोड़ रुपये भुगतान किया गया है।
खाद्य एवं पूर्ति विभाग ने 23 करोड़, हैफेड़ ने 128 और एचडब्ल्यूसी ने 68 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों की है। मंडी में गेहूं की आवक की स्थिति देखें तो सबसे अधिक समालखा अनाज मंडी में 73003 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। मतलौडा में यह 48686 मीट्रिक टन है जबकि पानीपत अनाज मंडी में 26995 मीट्रिक टन गेहूं पहुंचा है।