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छह दिन के लिए दो हजार उद्योगों पर लगा ताला
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पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोयले से संचालित सभी उद्योगों को 12 दिसंबर तक बंद करने के निर्देश दे दिए हैं। इससे पानीपत के करीब दो हजार उद्योग प्रभावित होंगे, एक लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे। एक दिन में पानीपत को 500 करोड़ रुपये का नुकसान का अनुमान है। उद्यमियों ने विदेशों से मिले करोड़ों रुपये के ऑर्डर कैंसल होने की आशंका जताई है।
दरअसल, कई विदेशियों ने पानीपत को ऑर्डर के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में उद्यमियों ने सोनीपत में मीटिंग कर सरकार व सीपीसीबी के खिलाफ आंदोलन करने का एलान कर दिया है। पानीपत के बड़े उद्यमियों ने एनसीआर से पलायन करने का भी मन बना लिया है। उत्तराखंड सरकार उद्यमियों को नए उद्योग लगाने पर सब्सिडी दे रही है, इसलिए वह उद्यमियों की पहली पसंद बन रहा है। सीपीसीबी के इस फैसले से उद्यमी नाराज है और वे वीरवार को इस संबंध में सीएम मनोहर लाल से मिल सकते हैं। वे मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
मंगलवार को भी बंद रही डाइंग यूनिट
उद्यमियों ने सीपीसीबी के इस फैसले के खिलाफ मंगलवार को डाइंग यूनिट बंद रखी। किसी भी फैक्टरी में बॉयलर नहीं चले। सिर्फ डाइंग यूनिट को एक दिन में 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। मंगलवार को 500 फैक्टरियां बंद होने के बावजूद शहर का एक्यूूआई 189 दर्ज किया गया है। वायू में धुएं व धूल के कणों की मात्रा अधिक थी।
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शहर पर ये पड़ेगा प्रभाव
- करीब एक लाख लोग बेरोजगार होंगे।
- विदेशों से मिले ऑर्डर पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन व श्रीलंका के उद्यमियों को मिलेंगे।
- विदेशों से मिले ऑर्डर कैंसल हो सकते हैं।
- समय पर माल न पहुंचने से उद्यमियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है।
- ये कंबल का पीक सीजन है, कंबल मार्केट पर बुरा असर पड़ेगा।
कंस्ट्रक्शन पर रोक जरूरी
बोर्ड ने कंस्ट्रक्शन के कार्यों पर रोक लगाई है, लेकिन इसका कोई खास फायदा नहीं हो रहा है। हर जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं। सड़कों पर धूल उड़ रही है। प्रशासन की ओर से पेड़-पौधों पर पानी का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। इसलिए एक्यूआई नहीं घट रहा है। बोर्ड का फोकस सिर्फ डाइंग यूनिट पर ही है।
सिर्फ 45 उद्योग ही चलेंगे -
पानीपत में करीब दो हजार उद्योग कोयले पर चलते हैं। सिर्फ 45 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। सीपीसीबी की टीमें फील्ड में उद्योगों की मॉनीटरिंग भी कर रही है। उद्यमियों का कहना है कि पानीपत का एक्यूआई बहुत ज्यादा नहीं है। इसलिए पानीपत को 24 घंटे उद्योग चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो वे दो दिन उद्योग बंद भी रख सकते हैं। सरकार के सख्त नियमों के लागू होने से कंबल, चादर, डाइंग व प्रिटिंग के कारोबार पर खासा प्रभाव पड़ेगा।
कंबल का पीक सीजन चल रहा
कोरोना, लॉकडाउन व किसान आंदोलन में टेक्सटाइल नगरी को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अब उद्यमियों को विदेशों को अच्छे ऑर्डर मिले हैं। कंबल का पीक सीजन चल रहा है। उद्यमियों बायर के ऑर्डर पूरा करने में जुटे हैं। पानीपत का एक्सपोर्ट भी तीन हजार करोड़ रुपये बढ़ा है। अब अच्छे आर्डर मिलने से उद्योग को संजीवनी मिली थी। अब सीपीसीबी के आदेशों से उद्योगों को बड़ा नुकसान होने का भय है।
करोड़ों रुपये का हो रहा नुकसान
सीपीसीबी के निर्देशों का उद्योगों पर बुरा असर पड़ रहा है। अब सीपीसीबी ने तीनों शिफ्ट को बंद कर दिया है। पानीपत में महज 45 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। उद्यमियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। विदेशों से मिले ऑर्डर कैंसल होने का भय है। -भीम राणा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन
यहां से पलायन करने को हैं मजबूर
हम यहां से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। पहले कोरोना, फिर लॉकडाउन और फिर किसान आंदोलन से करोड़ों का नुकसान हुआ। विदेशों से अच्छे ऑर्डर मिले तो सीपीसीबी ने उद्योगों को बंद कर दिया। कैसे ऑर्डर पूरे करेंगे। ये ऑर्डर दूसरे देशों को मिलेंगे। -प्रीतम सचदेवा, प्रधान पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
मामले में हस्तक्षेप करें सरकार
सरकार से अपील की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें। कोरोना काल के बाद इस बार अच्छे ऑर्डर मिले थे लेकिन निर्देश आड़े आ रहे हैं। यदि समय पर उत्पादन नहीं हुआ तो ऑर्डर कैंसल हो जाएंगे। ऐसे में उद्यमियों को करोड़ों का नुकसान होगा। -धनराज बंसल, एक्सपोर्टर पानीपत।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आठ फैक्टरियों का किया निरीक्षण
पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मंगलवार को सेक्टर 29 पार्ट वन में आठ फैक्टरियों का निरीक्षण किया। सभी का रिकॉर्ड व लॉग बुक चेक की गई। उद्योगों में कौन सा ईंधन प्रयोग हो रहा है, ये भी जांच की गई। जांच के दौरान उद्योगों में प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग नहीं मिला। टीम का नेतृत्व सीपीसीबी की अधिकारी विनिता ने किया। उनके साथ एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी कमलजी सैनी भी मौजूद रहे।
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दरअसल, कई विदेशियों ने पानीपत को ऑर्डर के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में उद्यमियों ने सोनीपत में मीटिंग कर सरकार व सीपीसीबी के खिलाफ आंदोलन करने का एलान कर दिया है। पानीपत के बड़े उद्यमियों ने एनसीआर से पलायन करने का भी मन बना लिया है। उत्तराखंड सरकार उद्यमियों को नए उद्योग लगाने पर सब्सिडी दे रही है, इसलिए वह उद्यमियों की पहली पसंद बन रहा है। सीपीसीबी के इस फैसले से उद्यमी नाराज है और वे वीरवार को इस संबंध में सीएम मनोहर लाल से मिल सकते हैं। वे मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
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मंगलवार को भी बंद रही डाइंग यूनिट
उद्यमियों ने सीपीसीबी के इस फैसले के खिलाफ मंगलवार को डाइंग यूनिट बंद रखी। किसी भी फैक्टरी में बॉयलर नहीं चले। सिर्फ डाइंग यूनिट को एक दिन में 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। मंगलवार को 500 फैक्टरियां बंद होने के बावजूद शहर का एक्यूूआई 189 दर्ज किया गया है। वायू में धुएं व धूल के कणों की मात्रा अधिक थी।
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शहर पर ये पड़ेगा प्रभाव
- करीब एक लाख लोग बेरोजगार होंगे।
- विदेशों से मिले ऑर्डर पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन व श्रीलंका के उद्यमियों को मिलेंगे।
- विदेशों से मिले ऑर्डर कैंसल हो सकते हैं।
- समय पर माल न पहुंचने से उद्यमियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है।
- ये कंबल का पीक सीजन है, कंबल मार्केट पर बुरा असर पड़ेगा।
कंस्ट्रक्शन पर रोक जरूरी
बोर्ड ने कंस्ट्रक्शन के कार्यों पर रोक लगाई है, लेकिन इसका कोई खास फायदा नहीं हो रहा है। हर जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं। सड़कों पर धूल उड़ रही है। प्रशासन की ओर से पेड़-पौधों पर पानी का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। इसलिए एक्यूआई नहीं घट रहा है। बोर्ड का फोकस सिर्फ डाइंग यूनिट पर ही है।
सिर्फ 45 उद्योग ही चलेंगे -
पानीपत में करीब दो हजार उद्योग कोयले पर चलते हैं। सिर्फ 45 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। सीपीसीबी की टीमें फील्ड में उद्योगों की मॉनीटरिंग भी कर रही है। उद्यमियों का कहना है कि पानीपत का एक्यूआई बहुत ज्यादा नहीं है। इसलिए पानीपत को 24 घंटे उद्योग चलाने की अनुमति मिलनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो वे दो दिन उद्योग बंद भी रख सकते हैं। सरकार के सख्त नियमों के लागू होने से कंबल, चादर, डाइंग व प्रिटिंग के कारोबार पर खासा प्रभाव पड़ेगा।
कंबल का पीक सीजन चल रहा
कोरोना, लॉकडाउन व किसान आंदोलन में टेक्सटाइल नगरी को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अब उद्यमियों को विदेशों को अच्छे ऑर्डर मिले हैं। कंबल का पीक सीजन चल रहा है। उद्यमियों बायर के ऑर्डर पूरा करने में जुटे हैं। पानीपत का एक्सपोर्ट भी तीन हजार करोड़ रुपये बढ़ा है। अब अच्छे आर्डर मिलने से उद्योग को संजीवनी मिली थी। अब सीपीसीबी के आदेशों से उद्योगों को बड़ा नुकसान होने का भय है।
करोड़ों रुपये का हो रहा नुकसान
सीपीसीबी के निर्देशों का उद्योगों पर बुरा असर पड़ रहा है। अब सीपीसीबी ने तीनों शिफ्ट को बंद कर दिया है। पानीपत में महज 45 उद्योगों में ही पीएनजी की सप्लाई है। उद्यमियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। विदेशों से मिले ऑर्डर कैंसल होने का भय है। -भीम राणा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन
यहां से पलायन करने को हैं मजबूर
हम यहां से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। पहले कोरोना, फिर लॉकडाउन और फिर किसान आंदोलन से करोड़ों का नुकसान हुआ। विदेशों से अच्छे ऑर्डर मिले तो सीपीसीबी ने उद्योगों को बंद कर दिया। कैसे ऑर्डर पूरे करेंगे। ये ऑर्डर दूसरे देशों को मिलेंगे। -प्रीतम सचदेवा, प्रधान पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
मामले में हस्तक्षेप करें सरकार
सरकार से अपील की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें। कोरोना काल के बाद इस बार अच्छे ऑर्डर मिले थे लेकिन निर्देश आड़े आ रहे हैं। यदि समय पर उत्पादन नहीं हुआ तो ऑर्डर कैंसल हो जाएंगे। ऐसे में उद्यमियों को करोड़ों का नुकसान होगा। -धनराज बंसल, एक्सपोर्टर पानीपत।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आठ फैक्टरियों का किया निरीक्षण
पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मंगलवार को सेक्टर 29 पार्ट वन में आठ फैक्टरियों का निरीक्षण किया। सभी का रिकॉर्ड व लॉग बुक चेक की गई। उद्योगों में कौन सा ईंधन प्रयोग हो रहा है, ये भी जांच की गई। जांच के दौरान उद्योगों में प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग नहीं मिला। टीम का नेतृत्व सीपीसीबी की अधिकारी विनिता ने किया। उनके साथ एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी कमलजी सैनी भी मौजूद रहे।