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Panipat News: मस्जिद में शेड तले चल रहे दो स्कूल, शिक्षकों के लिए शौचालय तक नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 02:49 AM IST
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Two schools operating under a shed in the mosque; no toilets even for teachers.
अमर भवन चौक के पास जर्जर हालत में चल रहा राजकीय विद्यालय। संवाद - फोटो : samvad
स्वीटी सांगवान
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पानीपत। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के गृह जिले में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी दावों की पोल खोलती एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक लाल मस्जिद परिसर में एक नहीं, बल्कि दो-दो सरकारी प्राथमिक स्कूल बिना किसी पक्के कमरे के सिर्फ शेड के नीचे चल रहे हैं। कमरों पर ताला लटके होने के कारण भीषण गर्मी और मौसम की मार के बीच करीब 260 से अधिक मासूम बच्चे खुले आसमान के नीचे शेड तले बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं।

लाल मस्जिद परिसर में वार्ड-आठ का प्राथमिक स्कूल और राजपुताना बाजार का प्राथमिक स्कूल एक साथ संचालित हो रहे हैं। जगह की भारी कमी और कमरों के अभाव के कारण प्रशासन ने इन्हें दो अलग-अलग शिफ्टों में बांट रखा है। सुबह की शिफ्ट में वार्ड-आठ का सरकारी स्कूल चलता है। इसमें करीब 135 छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं। दोपहर बाद की शिफ्ट में राजपुताना बाजार का स्कूल लगता है। इसमें 127 विद्यार्थी नामांकित हैं। पहले मस्जिद परिसर के अंदर बने कमरों में कक्षाएं लगा करती थीं, लेकिन वर्तमान में उन सभी कमरों पर ताले लटके हुए हैं। इसका नतीजा यह है कि दोनों शिफ्टों के बच्चे खुले शेड के नीचे ज़मीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
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बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव, स्टाफ के लिए टॉयलेट तक नहीं

स्कूल परिसर में बच्चों और शिक्षकों के लिए मूलभूत सुविधाओं का भी घोर अभाव है। विद्यार्थियों के लिए तो जैसे-तैसे दो शौचालय बने हुए हैं, लेकिन स्कूल में कार्यरत महिला व पुरुष स्टाफ के लिए एक भी अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में शिक्षकों को भी छोटे बच्चों के लिए बने टॉयलेट का ही इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि मासूम बच्चों के लिए तैयार होने वाला मिड-डे-मील जर्जर कमरे में बनाया जा रहा है। किसी भी वक्त कोई हादसा होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रशासन इस ओर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है।
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शिक्षकों की भारी कमी: 127 बच्चों पर महज दो शिक्षक

कमरों की कमी के साथ-साथ यह स्कूल शिक्षकों के टोटे से भी जूझ रहा है। सायंकालीन शिफ्ट में पढ़ने वाले 127 बच्चों की पांच अलग-अलग कक्षाओं को संभालने के लिए सिर्फ दो शिक्षक तैनात हैं। इन दो में से भी एक शिक्षक पर स्कूल इंचार्ज का प्रशासनिक कार्यभार है। ऐसे में पढ़ाई की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा है।

कानूनी अड़चन के कारण रुका भवन निर्माण

यह स्कूल कोई नया नहीं है। लाल मस्जिद परिसर में यह सरकारी स्कूल आजादी के बाद से ही लगातार चल रहा है। हालांकि, अब यह भूमि वक्फ बोर्ड के अधीन आती है और इस संपत्ति को लेकर न्यायालय में मामला लंबित (केस) चल रहा है। कानूनी विवाद और पेंच फंसा होने के कारण शिक्षा विभाग चाहकर भी मस्जिद परिसर में नए कमरों का निर्माण या कोई पक्का ढांचा खड़ा नहीं कर पा रहा है।

वर्जन

विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए कमरों के निर्माण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के सुधार के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है ताकि जल्द से जल्द कोई वैकल्पिक मार्ग निकाला जा सके।

नरेश कुमार, इंचार्ज, राजकीय प्राथमिक पाठशाला राजपुताना।

वर्जन

लाल मस्जिद में दो अलग-अलग शिफ्टों में बिना कमरों के शेड के नीचे कक्षाएं चल रही हैं। वहां कमरों का अभाव है और समस्या के समाधान के लिए प्रस्ताव बनाकर आला अधिकारियों को प्रेषित किया जा चुका है।


राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी।

अब देखना यह होगा कि शिक्षा मंत्री के गृह जिले की इस बदहाली पर सरकार और प्रशासन कब जागता है और शेड के नीचे पढ़ने वाले इन मासूमों को पक्की छत और मूलभूत सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।

अमर भवन चौक के पास जर्जर हालत में चल रहा राजकीय विद्यालय। संवाद

अमर भवन चौक के पास जर्जर हालत में चल रहा राजकीय विद्यालय। संवाद- फोटो : samvad

अमर भवन चौक के पास जर्जर हालत में चल रहा राजकीय विद्यालय। संवाद

अमर भवन चौक के पास जर्जर हालत में चल रहा राजकीय विद्यालय। संवाद- फोटो : samvad

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