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ग्राहक पंचायत: ई-कॉमर्स से बढ़ रहा साइबर अपराध, ग्राहकों के अधिकार व सुरक्षा पर बल

Mon, 11 Sep 2023 01:09 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 11 Sep 2023 01:09 AM IST
सार

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत संगठन का दो दिनी अधिवेशन संपन्न हो गया। स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग की जगह स्टैंडर्ड ऑफ लाइफ पर जोर दिया गया।

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Two day session of All India Customer Panchayat Organization concluded in Panipat
पुस्तक का विमोचन करते कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेयी और अन्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के पानीपत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत संगठन ने ग्राहकों के हित सुरक्षित रखने के साथ ही उनको अधिकार दिलाने पर जोर दिया गया। साथ ही स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग की बजाय स्टैंडर्ड ऑफ लाइफ की दिशा में काम करने की आवश्यकता जताई।

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वक्ताओं ने साफ किया कि ई-कॉमर्स के आने से साइबर क्राइम बढ़ा है और स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग की होड़ में सेहत की चिंता पीछे छूट गई है। उन्होंने कहा कि भारत में यूरोप की 1930 के मॉडल आधारित अर्थव्यवस्था ढोने की जरूरत नहीं रह गई है।
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पानीपत के पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में रविवार को अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत संगठन की ओर से आयोजित दो दिवसीय अधिवेशन का समापन हो गया। दूसरे दिन मुख्य वक्ता राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने उपभोक्ता अधिकार एवं खाद्य अधिनियम पर बात रखी।
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उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन का 50 वर्ष तक निरंतर कार्य करते रहना उसके परिश्रम और ध्येय के साथ कार्य को दर्शाता है। ग्राहक संरक्षण अधिनियम 1986 और ग्राहक संरक्षण अधिनियम 2019 ग्राहक पंचायत की स्वर्णिम उपलब्धि है। खाद्य पदार्थों में मिलावट में आज भी अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। ई-कॉमर्स के बढ़ने पर साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है।

अमेरिका और चीन की वार्षिक आय को छोड़ दें तो उससे अधिक साइबर क्राइम हो रहा है। ऐसे में ग्राहक को सुरक्षा देना जरूरी है। आज ऑनलाइन ऑर्डर पर सामान मंगवाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। हम इसके खतरे और चुनौतियों से अनभिज्ञ हैं।

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत संगठन के सम्मेलन में अपनी बात रखते जस्टिस अरुण मिश्रा।
हमें यह तक नहीं पता होता कि यह सामान किस कंपनी से आया है या फिर छोटे दुकानदार ने दिया है। इसकी उपस्थिति देश में है या फिर किसी दूसरे देश में है। ग्राहक पंचायत को इन विषयों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मानवाधिकार के उल्लंघन पर भी चिंता जताई।

वहीं अटल बिहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. एडीएन बाजपेयी ने सुमंगलम अर्थव्यवस्था और ग्राहक की संतुष्टि पर विस्तार से बात रखी। उन्होंने कहा कि यूरोप में 1930 की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। उस समय केन्स ने अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए करीब 35 पुस्तक लिखी, जिनमें उपभोग को आधार बनाकर विकास करने का माॅडल था, लेकिन हम आज भी विकास के उस उपभोग आधारित मॉडल को ढो रहे हैं।

केन्स का सिद्धांत सार्वभौम नहीं है। वह किसी एक परिस्थिति के कारण उत्पन्न विचार है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का भी रक्त रंजित इतिहास है। इससे पहले वक्ताओं का स्वागत किया गया तथा तमिल भाषा में ग्राहकों के लिए लिखी पुस्तक का विमोचन हुआ।

लागत से कीमत तय करने पर जोर
जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि देश में निर्मित जो वस्तु हमें 400 से 500 रुपये में मिल जाती है, उसी वस्तु पर विदेश के ब्रांड की मुहर लगते ही कीमत 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। ऐसे में हमें उसकी लागत के अनुसार कीमत तय करने पर ध्यान देना चाहिए। ग्राहक पंचायत इस दिशा में काम कर सकती है।

उपयोग पर कम दिखावे पर अधिक खर्च
एडीएन बाजपेई ने कहा कि हम किसी वस्तु का उपभोग कम करते हैं जबकि दिखावा अधिक करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तव में 10 से 20 प्रतिशत धन ही वास्तविक उपभोग पर खर्च होता है। आज विज्ञापनों का उपयोग, ग्राहकों का मूड बनाने व वस्तु को फैशन डिजाइन में डालने के लिए किया जाता है। हम सब कुछ छोड़कर फैशन के साथ कदमताल करने लगते हैं। सेवा क्षेत्र की वस्तुओं में ग्राहकों का सर्वाधिक शोषण होता है। इसमें शिक्षा, चिकित्सा और अदालत तीनों हैं। इससे लड़ने की आवश्यकता है।


हर जिले में एक लाख परिवारों तक जाएगी ग्राहक पंचायत
ग्राहक पंचायत के संगठन मंत्री दिनकर सबनीस ने पैकिंग मैटेरियल को अपनाने को गलत बताया और वस्तुओं के विक्रय मूल्य तय करने की नीति बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में एक लाख परिवारों से संपर्क करना है। उन्हें अपने साथ खड़ा करना है। ग्राहक आंदोलन को हमें जन आंदोलन बनाना है। स्वर्ण जयंती समारोह समिति के अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा कि ग्राहक सिर्फ सही कीमत पर उचित वस्तु चाहता है।

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