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Panipat News: मुख्य अतिथि के इंतजार में चार घंटे धूप में बैठे रहे 12 स्कूल बच्चे
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आर्य कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को धूप में बैठने के लिए कहती अध्यापिका। संवाद
पानीपत। शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम प्रशासनिक व्यवस्थाओं के कारण विकसित भारत 2047 के विजन को लेकर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 108 मीटर लंबी मानव रंगोली में शामिल होने आए शहर के 12 स्कूलों के करीब 3200 विद्यार्थी सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे बैठे रहे। इस दौरान बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए खुद अपनी पानी की बोतलें साथ लानी पड़ी। बच्चे परेशान होकर मुख्य अतिथि के आने से 15 मिनट पहले ही उठकर चले गए।
बच्चों को सुबह सात बजे ही पंजीकरण के लिए बुला लिया गया था, लेकिन काउंटर पर कोई कर्मचारी नहीं मिलने के कारण वे चक्कर काटते रहे। इस दौरान धूप में चार घंटे तक जमीन पर बैठने वाले छात्र-छात्राएं मुख्य अतिथि के मंच पर पहुंचने का इंतजार करते रहे। वे दोपहर करीब एक बजे उठने लगे तो कुछ तो वहीं मैदान में ही लेट गए। इसके बाद मुख्यातिथि के आने से महज 10 मिनट पहले ही वहां से उठकर चले गए। इससे बच्चों की मेहनत का उद्देश्य ही अधूरा रह गया।
अभिभावक और शिक्षक बाहर गेट पर हुए परेशान
राज्य स्तरीय भाषण और पेंटिंग प्रतियोगिता में सुरक्षा के नाम पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। इसके चलते बच्चों के साथ आए अभिभावकों और शिक्षकों को कॉलेज परिसर के अंदर प्रवेश ही नहीं करने दिया गया। उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक लिया गया। इससे वे पूरे पांच घंटे तक बाहर धूप में भटकने को मजबूर हुए। दूर-दराज से पहुंचे शिक्षकों और परिजनों में इसको लेकर गहरा रोष देखा गया।
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कुरुक्षेत्र से आई शिक्षित डॉ. ऋतु ने बताया कि हम बच्चों को लेकर सुबह सात ही पहुंच गए थे, लेकिन अंदर प्रवेश न मिलने के कारण गेट के बाहर ही खड़े रहना पड़ा। पंजीकरण के नाम पर भी खानापूर्ति थी। बच्चों को रिफ्रेशमेंट तक नहीं मिला। भाषण प्रतियोगिता के दौरान ऑडिंश के तौर पर भी नहीं जाने दिया। जींद से आए अभिभावक रमेश ने कहा कि बच्चों के खाने-पीने और बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई थी। इससे छोटे बच्चों को काफी दिक्कतें हुईं। रोहतक से आए शिक्षक दीपक ने बताया कि पंजीकरण के वक्त भारी भागदौड़ करनी पड़ी और बच्चों को घंटों धूप में बैठने के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी उठानी पड़ी।संवाद
वर्जन
राज्य स्तरीय समारोह की सभी तैयारियां पूरी की गई थी। बच्चों और शिक्षकों के जलपान के अलावा पानी की व्यवस्था की गई थी। समारोह में बच्चों की ओर से तैयार की गई मानव रंगोली आकर्षित करने वाली थी।
-जयपाल सरोहा, खंड शिक्षा अधिकारी, पानीपत
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बच्चों को सुबह सात बजे ही पंजीकरण के लिए बुला लिया गया था, लेकिन काउंटर पर कोई कर्मचारी नहीं मिलने के कारण वे चक्कर काटते रहे। इस दौरान धूप में चार घंटे तक जमीन पर बैठने वाले छात्र-छात्राएं मुख्य अतिथि के मंच पर पहुंचने का इंतजार करते रहे। वे दोपहर करीब एक बजे उठने लगे तो कुछ तो वहीं मैदान में ही लेट गए। इसके बाद मुख्यातिथि के आने से महज 10 मिनट पहले ही वहां से उठकर चले गए। इससे बच्चों की मेहनत का उद्देश्य ही अधूरा रह गया।
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अभिभावक और शिक्षक बाहर गेट पर हुए परेशान
राज्य स्तरीय भाषण और पेंटिंग प्रतियोगिता में सुरक्षा के नाम पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। इसके चलते बच्चों के साथ आए अभिभावकों और शिक्षकों को कॉलेज परिसर के अंदर प्रवेश ही नहीं करने दिया गया। उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक लिया गया। इससे वे पूरे पांच घंटे तक बाहर धूप में भटकने को मजबूर हुए। दूर-दराज से पहुंचे शिक्षकों और परिजनों में इसको लेकर गहरा रोष देखा गया।
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कुरुक्षेत्र से आई शिक्षित डॉ. ऋतु ने बताया कि हम बच्चों को लेकर सुबह सात ही पहुंच गए थे, लेकिन अंदर प्रवेश न मिलने के कारण गेट के बाहर ही खड़े रहना पड़ा। पंजीकरण के नाम पर भी खानापूर्ति थी। बच्चों को रिफ्रेशमेंट तक नहीं मिला। भाषण प्रतियोगिता के दौरान ऑडिंश के तौर पर भी नहीं जाने दिया। जींद से आए अभिभावक रमेश ने कहा कि बच्चों के खाने-पीने और बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई थी। इससे छोटे बच्चों को काफी दिक्कतें हुईं। रोहतक से आए शिक्षक दीपक ने बताया कि पंजीकरण के वक्त भारी भागदौड़ करनी पड़ी और बच्चों को घंटों धूप में बैठने के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी उठानी पड़ी।संवाद
वर्जन
राज्य स्तरीय समारोह की सभी तैयारियां पूरी की गई थी। बच्चों और शिक्षकों के जलपान के अलावा पानी की व्यवस्था की गई थी। समारोह में बच्चों की ओर से तैयार की गई मानव रंगोली आकर्षित करने वाली थी।
-जयपाल सरोहा, खंड शिक्षा अधिकारी, पानीपत

आर्य कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को धूप में बैठने के लिए कहती अध्यापिका। संवाद

आर्य कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को धूप में बैठने के लिए कहती अध्यापिका। संवाद