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ट्रेकोमा, ब्लैक फंगस, मोतियाबिंद का खतरा, जागरूकता ही बचाव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 01:42 AM IST
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Trachoma, Black fungus, Cataract risk, Awareness is the only prevention
पानीपत। जागरूकता के अभाव व अनदेखी के कारण हम आंखों की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। आंखों पर ट्रेकोमा, ब्लैक फंगस और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का खतरा है। जिले में पांच हजार से अधिक लोग अंधकार में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इनमें से 50 प्रतिशत लोग जन्मजात अंधेपन का शिकार हैं। 60 से अधिक आयु वाले प्रति 10 बुजुर्गों में से एक को मोतियाबिंद है। जिले में ब्लैक फंगस ने 15 लोगों की आंखों पर भी प्रभाव डाला है। एम्स की टीम पानीपत में ट्रेकोमा के मरीजों को चिह्नित कर रही है। अब तक तीन हजार लोगों की जांच की जा चुकी है। हालांकि पानीपत में जहां ट्रेकोमा का कोई मरीज नहीं मिला, वहीं प्रदेश में 12 संभावित मरीज मिले हैं।
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इस साल अब तक आठ लोगों की आंखें मरणोपरांत दान कराई गईं है, जबकि 650 लोगों ने जिले में मरणोपरांत नेत्रदान करने का शपथ फार्म भरा है। लोगों को नेत्रदान करने के प्रति जागरूक करने में स्वास्थ्य विभाग भी सफल नहीं हो पाया है। विभाग की ओर से ऐसे कदम नहीं उठाए गए जिससे लोगों में नेत्र जांच के प्रति जागरूकता आए। विभाग की ओर से पिछले पांच साल में लगभग 25 लोगों के नेत्रदान कराए गए जबकि जन सेवा दल ने मरणोपरांत 50 से अधिक लोगों के नेत्रदान करवाए हैं।
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प्री मैच्योर डिलीवरी अंधेपन का बड़ा कारण
2015 में स्वास्थ्य विभाग ने अंधेपन को रोकने के लिए प्री मैच्योर डिलीवरी के केस में हर नवजात की आंखों की जांच करने के निर्देश दिए थे, क्योंकि प्री मैच्योर डिलीवरी में 90 प्रतिशत ये भय होता है कि बच्चे की आंखों की पुतली पूर्ण रूप से विकसित हुई है या नहीं । आंखें पूर्ण रूप से विकसित ना होने से अंधेपन का खतरा अधिक बढ़ जाता है। सिविल अस्पताल में हर रोज औसतन 30-35 महिलाओं की डिलीवरी होती है। इनमें से तीन-चार महिलाएं समय से पूर्व बच्चे को जन्म देती हैं।
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चार साल से सिविल अस्पताल के पास नहीं रहा आई डोनेट करने का लाइसेंस
2011 में सिविल अस्पताल का आई डोनेट करने का लाइसेंस एक्सपायर हो गया था। 2015 तक विभाग की ओर से दोबारा लाइसेंस लेने की कोशिश नहीं की गई। 2015 में दोबारा लाइसेंस के लिए अप्लाई किया गया, 2016 में लाइसेंस मिला। उसके बाद से 25 लोगों की आंखे डोनेट कराई गई है।

आंखों की बीमारियों के खिलाफ जागरूकता जरूरी
आंखों की बीमारियों के खिलाफ जागरूकता जरूरी है। बच्चें भी आंखों की बीमारियों से घिर रहे हैं। सिविल अस्पताल में हर रोज 80-90 लोगों की जांच हो रही है। कोरोना के कारण इस साल कम सर्जरी हुई है। अस्पताल में मोतियाबिंद के रोगियों के लिए सर्जरी की सुविधा है। लोगों से अपील है कि अगर उनको आंखों में कोई दिक्कत है तो सिविल अस्पताल में जांच जरूर कराएं। -डॉ. शालिनी मेहता, नेत्र रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल
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