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Panipat News: एक ही भवन में चल रहे तीन स्कूल, पार्क के हॉल में लग रहीं कक्षाएं
Fri, 28 Aug 2026 02:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:45 AM IST
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राजकीय स्कूल में टीन के नीचे चल रही कक्षा। संवाद
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स्वीटी सांगवान
पानीपत। 70 साल पुराने जर्जर भवन से छुटकारा दिलाकर विद्यार्थियों को बेहतर माहौल देने का शिक्षा विभाग का दावा जमीनी धरातल पर हवा-हवाई साबित हो रहा है। विभाग ने बदहाल शुगर मिल सरकारी स्कूल को अग्रवाल मंडी स्थित सरकारी मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्थानांतरित तो कर दिया, लेकिन इससे समस्या सुलझने के बजाय और विकराल हो गई है। अब स्थिति यह है कि एक ही परिसर में तीन-तीन सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। महज 8 से 10 कमरों वाले इस भवन में 550 से अधिक बच्चे ठूंस दिए गए हैं। इससे पढ़ाई से लेकर बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं।
कमरों की भारी कमी, पार्क के हॉल में चल रहीं कक्षाएं
पहले शुगर मिल स्कूल दो शिफ्टों (सुबह और शाम) में संचालित होता था। अब स्थानांतरण के बाद दोनों शिफ्टों के बच्चे एक ही स्थान पर आ गए हैं। इससे अग्रवाल मंडी स्कूल में जगह कम पड़ गई है। कमरों का अकाल ऐसा है कि मजबूरी में दो कक्षाओं को सामने स्थित सार्वजनिक पार्क के हॉल में लगाया जा रहा है। पार्क के हॉल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को पीने के पानी, भोजन और शौचालय के लिए बार-बार मुख्य स्कूल भवन तक दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे उनकी सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
550 विद्यार्थियों के लिए महज छह शौचालय, छात्राएं बेहाल
स्कूल में आधारभूत ढांचा पूरी तरह नाकाफी साबित हो रहा है। करीब 550 विद्यार्थियों के लिए मात्र छह शौचालय उपलब्ध हैं। इसके चलते हर ब्रेक में शौचालयों के बाहर लंबी लाइनें लग जाती हैं। सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को झेलनी पड़ रही है। छात्रा शिखा सहित अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल पहले से दूर हो गया है और पार्क से बार-बार शौचालय के लिए मुख्य भवन में आना-जाना बेहद कठिन कार्य बन चुका है।
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एक रसोई से 500 बच्चों का खाना, व्यवस्था रामभरोसे
तीन स्कूलों के एक जगह मिलने से मिड-डे मील व्यवस्था भी पूरी तरह बिगड़ गई है। 15 शिक्षकों और आठ मिड-डे मील कर्मचारियों के सामने 500 से अधिक बच्चों को खाना परोसना चुनौती बन गया है। मिड-डे मील वर्कर परवीन कुमारी ने बताया कि एक छोटी सी रसोई में तीन स्कूलों का खाना बनता है। तीनों स्कूलों के बर्तन एक साथ होने से रोजाना अव्यवस्था रहती है और छोटे बच्चे दूसरे स्कूल की लाइन में लग जाते हैं।
वर्जन
शुगर मिल स्कूल की हेड मंजीत ने बताया कि कमरों की कमी के कारण मजबूरी में पार्क के हॉल में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। अतिरिक्त शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है।
वर्जन
शुगर मिल स्कूल के भवन की जर्जर हालत को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए यह फैसला लिया गया था। जगह की कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं का संज्ञान लिया गया है। जल्द ही अतिरिक्त कमरों और सुविधाओं की वैकल्पिक व्यवस्था कराकर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी।
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पानीपत। 70 साल पुराने जर्जर भवन से छुटकारा दिलाकर विद्यार्थियों को बेहतर माहौल देने का शिक्षा विभाग का दावा जमीनी धरातल पर हवा-हवाई साबित हो रहा है। विभाग ने बदहाल शुगर मिल सरकारी स्कूल को अग्रवाल मंडी स्थित सरकारी मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में स्थानांतरित तो कर दिया, लेकिन इससे समस्या सुलझने के बजाय और विकराल हो गई है। अब स्थिति यह है कि एक ही परिसर में तीन-तीन सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं। महज 8 से 10 कमरों वाले इस भवन में 550 से अधिक बच्चे ठूंस दिए गए हैं। इससे पढ़ाई से लेकर बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं।
कमरों की भारी कमी, पार्क के हॉल में चल रहीं कक्षाएं
पहले शुगर मिल स्कूल दो शिफ्टों (सुबह और शाम) में संचालित होता था। अब स्थानांतरण के बाद दोनों शिफ्टों के बच्चे एक ही स्थान पर आ गए हैं। इससे अग्रवाल मंडी स्कूल में जगह कम पड़ गई है। कमरों का अकाल ऐसा है कि मजबूरी में दो कक्षाओं को सामने स्थित सार्वजनिक पार्क के हॉल में लगाया जा रहा है। पार्क के हॉल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को पीने के पानी, भोजन और शौचालय के लिए बार-बार मुख्य स्कूल भवन तक दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे उनकी सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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550 विद्यार्थियों के लिए महज छह शौचालय, छात्राएं बेहाल
स्कूल में आधारभूत ढांचा पूरी तरह नाकाफी साबित हो रहा है। करीब 550 विद्यार्थियों के लिए मात्र छह शौचालय उपलब्ध हैं। इसके चलते हर ब्रेक में शौचालयों के बाहर लंबी लाइनें लग जाती हैं। सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को झेलनी पड़ रही है। छात्रा शिखा सहित अन्य विद्यार्थियों ने बताया कि स्कूल पहले से दूर हो गया है और पार्क से बार-बार शौचालय के लिए मुख्य भवन में आना-जाना बेहद कठिन कार्य बन चुका है।
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एक रसोई से 500 बच्चों का खाना, व्यवस्था रामभरोसे
तीन स्कूलों के एक जगह मिलने से मिड-डे मील व्यवस्था भी पूरी तरह बिगड़ गई है। 15 शिक्षकों और आठ मिड-डे मील कर्मचारियों के सामने 500 से अधिक बच्चों को खाना परोसना चुनौती बन गया है। मिड-डे मील वर्कर परवीन कुमारी ने बताया कि एक छोटी सी रसोई में तीन स्कूलों का खाना बनता है। तीनों स्कूलों के बर्तन एक साथ होने से रोजाना अव्यवस्था रहती है और छोटे बच्चे दूसरे स्कूल की लाइन में लग जाते हैं।
वर्जन
शुगर मिल स्कूल की हेड मंजीत ने बताया कि कमरों की कमी के कारण मजबूरी में पार्क के हॉल में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। अतिरिक्त शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है।
वर्जन
शुगर मिल स्कूल के भवन की जर्जर हालत को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए यह फैसला लिया गया था। जगह की कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं का संज्ञान लिया गया है। जल्द ही अतिरिक्त कमरों और सुविधाओं की वैकल्पिक व्यवस्था कराकर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी।