{"_id":"69558424b79361629d033d74","slug":"three-out-of-five-doctors-of-the-board-did-not-come-the-disabled-kept-wandering-to-get-their-certificates-made-panipat-news-c-244-1-pnp1007-149785-2026-01-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: बोर्ड के पांच में से तीन चिकित्सक नहीं आए, प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भटकते रहे दिव्यांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: बोर्ड के पांच में से तीन चिकित्सक नहीं आए, प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भटकते रहे दिव्यांग
Thu, 01 Jan 2026 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Thu, 01 Jan 2026 01:44 AM IST
विज्ञापन
पानीपत। कड़ाके की ठंड में घने कोहरे के बीच दिव्यांग बड़ी मुश्किल से जिला नागरिक अस्पताल में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहुंचे। दिव्यांग बोर्ड में पांच से तीन चिकित्सक नहीं मिले। नेत्र रोग विशेषज्ञ और ईएनटी विशेषज्ञ से संबंधित चार लोगों के प्रमाणपत्र बन पाए। जबकि मनोरोग विशेषज्ञ, फिजिशियन और आर्थोपेडिक से संबंधित मरीजों के प्रमाणपत्र नहीं बन पाए। ऐसे में सात लोगों को वापस लौटना पड़ा।
जिला नागरिक अस्पताल में हर सप्ताह बुधवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए बोर्ड बैठता है। इसमें पांच चिकित्सकों का एक बोर्ड बनाया गया है। अस्पताल में 11 लोगों ने प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। अस्पताल में बुधवार को हड्डी चिकित्सक डॉ. प्रदीप, फिजिशियन डॉ. जैसमीन कौर और मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल छुट्टी पर रही। नेत्र रोग विशेषज्ञ और ईएनटी विशेषज्ञ ही मिले। अस्पताल में बुधवार को चार प्रमाणपत्र बनाए जा सके।
ठंड में काटने पड़ रहे अस्पताल
मेरी पैर की हड्डी में समस्या है। इससे मुझे चलने में परेशानी होती है। मैं अस्पताल में पिछले बुधवार को भी आया था लेकिन चिकित्सक न मिलने से लौटना पड़ा था। वह बुधवार को फिर से उम्मीद के साथ अस्पताल आया। अस्पताल में हड्डी चिकित्सक न होने से अब फिर मुझे बिना प्रमाणपत्र बनवाए ही लौटना पडे़गा। उनको अगले बुधवार को फिर से चक्कर काटने पड़ेंगे। चिकित्सकों की छुट्टियों से मरीजों को परेशानी हो रही हैं। दिव्यांगों को इतनी ठंड में बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
मनोज, दीनानाथ कॉलोनी पानीपत।
मेरे हाथ और कान में समस्या है। मैं लगभग एक महीने पहले अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर गई थी लेकिन ऑनलाइन रिकार्ड न होने से परेशानी हो रही है। इसलिए अब मैं अपना ऑनलाइन रिकार्ड करवाने के लिए अस्पताल आई हूं। अभी तक मुझे प्रमाणपत्र से कोई लाभ नहीं मिला है। जांच करवाने पर पता चला कि ऑनलाइन रिकार्ड न होने इसका कारण है। अब उसे दोबारा अस्पताल के चक्कर काटने पड़े। यदि ये काम कर्मचारी साथ की साथ कर देते तो अब मुझे दोबारा अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ते और अब तक मुझे इसका लाभ भी मिल चुका होता।
सरोज, एकता विहार कॉलोनी पानीपत।
साल समाप्त होने पर चिकित्सक अपनी छुट्टियां पूरी कर रहे हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो रही है। दिव्यांग प्रमाणपत्र बनने में समय लगता है। कुछ प्रोसेस होती हैं जिनके पूरा होने पर ही प्रमाणपत्र बनता है। इन सबके चलते मरीजों को थोड़ी बहुत परेशानी हुई होगी।
डॉ. श्यामलाल, एमएस जिला नागरिक अस्पताल।
विज्ञापन
जिला नागरिक अस्पताल में हर सप्ताह बुधवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए बोर्ड बैठता है। इसमें पांच चिकित्सकों का एक बोर्ड बनाया गया है। अस्पताल में 11 लोगों ने प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। अस्पताल में बुधवार को हड्डी चिकित्सक डॉ. प्रदीप, फिजिशियन डॉ. जैसमीन कौर और मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल छुट्टी पर रही। नेत्र रोग विशेषज्ञ और ईएनटी विशेषज्ञ ही मिले। अस्पताल में बुधवार को चार प्रमाणपत्र बनाए जा सके।
विज्ञापन
ठंड में काटने पड़ रहे अस्पताल
मेरी पैर की हड्डी में समस्या है। इससे मुझे चलने में परेशानी होती है। मैं अस्पताल में पिछले बुधवार को भी आया था लेकिन चिकित्सक न मिलने से लौटना पड़ा था। वह बुधवार को फिर से उम्मीद के साथ अस्पताल आया। अस्पताल में हड्डी चिकित्सक न होने से अब फिर मुझे बिना प्रमाणपत्र बनवाए ही लौटना पडे़गा। उनको अगले बुधवार को फिर से चक्कर काटने पड़ेंगे। चिकित्सकों की छुट्टियों से मरीजों को परेशानी हो रही हैं। दिव्यांगों को इतनी ठंड में बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
मनोज, दीनानाथ कॉलोनी पानीपत।
मेरे हाथ और कान में समस्या है। मैं लगभग एक महीने पहले अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर गई थी लेकिन ऑनलाइन रिकार्ड न होने से परेशानी हो रही है। इसलिए अब मैं अपना ऑनलाइन रिकार्ड करवाने के लिए अस्पताल आई हूं। अभी तक मुझे प्रमाणपत्र से कोई लाभ नहीं मिला है। जांच करवाने पर पता चला कि ऑनलाइन रिकार्ड न होने इसका कारण है। अब उसे दोबारा अस्पताल के चक्कर काटने पड़े। यदि ये काम कर्मचारी साथ की साथ कर देते तो अब मुझे दोबारा अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ते और अब तक मुझे इसका लाभ भी मिल चुका होता।
सरोज, एकता विहार कॉलोनी पानीपत।
साल समाप्त होने पर चिकित्सक अपनी छुट्टियां पूरी कर रहे हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो रही है। दिव्यांग प्रमाणपत्र बनने में समय लगता है। कुछ प्रोसेस होती हैं जिनके पूरा होने पर ही प्रमाणपत्र बनता है। इन सबके चलते मरीजों को थोड़ी बहुत परेशानी हुई होगी।
डॉ. श्यामलाल, एमएस जिला नागरिक अस्पताल।