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Panipat News: हजारों की संख्या में संगत ने की अरदास
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मतलौडा। आसन कलां गांव स्थित गुरुद्वारा बाबा जोध सचियार में तीन दिवसीय सालाना सत्संग समागम का शनिवार को दूसरा दिन रहा। सत्संग समागम में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश व कर्नाटक से हजारों श्रद्धालु सेवाभाव के साथ परिवार सहित पहुंचे। संगत ने पूरे श्रद्धा भाव से गुरबाणी का आनंद लिया।
प्रमुख कथावाचकों व रागी जत्थों ने गुरबाणी का पाठ किया। बाबा जोध सचियार स्त्री सत्संग सभा, गुरुद्वारा श्री गुरुराम दास सिंह सभा से हजूरी रागी भाई सुखविंद्र सिंह, गुरुद्वारा मॉडल टाउन के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरप्रीत सिंह, श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसाइटी, कपूरथला से कथावाचक ज्ञानी जसविंद्र सिंह दर्दी, श्री दरबार साहिब अमृतसर से भाई करनैल सिंह, चमनजीत सिंह लाल दिल्ली वाले, चंडीगढ़ से भाई तवनीत सिंह ने गुरबाणी की। सत्संग कार्यक्रम सायं चार बजे शुरू हुआ और देर रात तक चला। जिसमें बड़ी संख्या में संगत पहुंची। गुरुद्वारे में पूरे दिन अटूट लंगर बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार भाई सतनाम सिंह जोधका ने की। उन्होंने बताया कि सालाना सत्संग समागम हर वर्ष मार्च माह के अंतिम शुक्रवार, शनिवार और रविवार को किया जाता है। यह सत्संग समागम श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ। जिसमें सभी ने गुरबाणी का रसपान किया व आध्यात्मिक शांति प्राप्त की। कथावाचक चमनजीत सिंह लाल (दिल्ली) ने कहा कि सत्संग से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। सत्संग हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और हमारे मन के विकारों को दूर करता है। सत्संग में गुरबाणी सुनने से मन की अशांति समाप्त होती है और व्यक्ति के अंदर दया, प्रेम, करुणा एवं सहनशीलता का विकास होता है।
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प्रमुख कथावाचकों व रागी जत्थों ने गुरबाणी का पाठ किया। बाबा जोध सचियार स्त्री सत्संग सभा, गुरुद्वारा श्री गुरुराम दास सिंह सभा से हजूरी रागी भाई सुखविंद्र सिंह, गुरुद्वारा मॉडल टाउन के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरप्रीत सिंह, श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसाइटी, कपूरथला से कथावाचक ज्ञानी जसविंद्र सिंह दर्दी, श्री दरबार साहिब अमृतसर से भाई करनैल सिंह, चमनजीत सिंह लाल दिल्ली वाले, चंडीगढ़ से भाई तवनीत सिंह ने गुरबाणी की। सत्संग कार्यक्रम सायं चार बजे शुरू हुआ और देर रात तक चला। जिसमें बड़ी संख्या में संगत पहुंची। गुरुद्वारे में पूरे दिन अटूट लंगर बताया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार भाई सतनाम सिंह जोधका ने की। उन्होंने बताया कि सालाना सत्संग समागम हर वर्ष मार्च माह के अंतिम शुक्रवार, शनिवार और रविवार को किया जाता है। यह सत्संग समागम श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ। जिसमें सभी ने गुरबाणी का रसपान किया व आध्यात्मिक शांति प्राप्त की। कथावाचक चमनजीत सिंह लाल (दिल्ली) ने कहा कि सत्संग से आत्मिक शांति प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। सत्संग हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और हमारे मन के विकारों को दूर करता है। सत्संग में गुरबाणी सुनने से मन की अशांति समाप्त होती है और व्यक्ति के अंदर दया, प्रेम, करुणा एवं सहनशीलता का विकास होता है।
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