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उद्योग बंद हुए तो भारत की विश्व भर में गिर रही साख, विदेशियों के आर्डर नहीं हो रहे पूरे
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पानीपत। कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के कोयला संचालित उद्योगों को बंद करने के फैसले से पानीपत को मिलने वाले विदेशियों के ऑर्डर कैंसिल होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। मैनेजमेंट के फैसले ने उद्योगों को बंद कर दिया। डाइंग यूनिट में अब कंबल, धागा, बेडशीट, तौलिया और पिलो कवर की रंगाई नहीं हो पाएगी। समय पर विदेशियों के ऑर्डर तैयार नहीं हो पाएंगे। निर्यातकों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। अब निर्यातकों को ऑर्डर कैंसिल होने का डर सता रहा है। पहले से ही इस बार एक्सपोर्टरों को ऑर्डर कम मिले हैं। अगर समय पर ऑर्डर नहीं पहुंचे तो इसका सीधा फायदा चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान को होगा। यहां के ऑर्डर कैंसिल कर इन देशों के उद्यमियों को मिलेंगे। इससे विश्व में देश की साख भी प्रभावित हो सकती है। अब एक्सपोर्टर विदेशियों को मनाने में जुटे हैं।
पानीपत के उत्पाद चीन को टक्कर देते हैं। पानीपत में पहले के मुकाबले चीन के मिंक कंबल का निर्यात 50 प्रतिशत तक कम हो गया। पानीपत के उद्यमियों ने खुद मशीनें तैयार कर सस्ती बेडशीट बनाना शुरू कर दिया था। पानीपत के मिंक कंबल ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई। कोरोना संक्रमण फैलने पर पूरा विश्व चीन से नाराज हो गया। अमेरिका और यूरोपियन देशों ने चीन के ऑर्डर कैंसिल कर पानीपत को दिए। पानीपत के उद्यमियों ने इस मौके को दोनों हाथों से लपका था। 2021 में पानीपत का एक्सपोर्ट 12 हजार करोड़ से बढ़कर 16 हजार करोड़ पहुंच गया। इस वर्ष 15 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट होने की उम्मीद थी, लेकिन अब उद्योग बंद होने से पानीपत को बड़ा झटका लगा है।
शहर के सेक्टर 29 पार्ट-टू में 400 डाइंग यूनिट हैं। इन यूनिटों में हर रोज दो लाख किलोग्राम कपड़ा डाई होता है। इनमें कंबल, धागा, बेडशीट, तौलिये व पिलो कवर शामिल हैं। डाई होने के बाद माल को तैयार करने की अगली प्रक्रिया शुरू होती है। 400 डाइंग यूनिट में लगभग 20 लाख किलो माल स्टॉक हो गया है। जब उद्योग चलेंगे तभी यह माल तैयार होगा। अब एक्सपोर्टरों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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उद्यमियों की मांगें
- जुर्माना कम किया जाए और जेल का प्रावधान हटाया जाए।
- उनको पीएनजी पर बॉयलर को शिफ्ट करने के लिए दो साल तक का वक्त दिया जाए।
- एपीएम 800 से 80 पर लाना मुश्किल है, उनको इसमें राहत मिले।
- बॉयलर विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध कराई जाए।
- पीएनजी के दाम स्थिर किए जाएं।
- जहां पीएनजी की पाइपलाइन नहीं है, वहां यह नियम लागू न हों।
- शहर में अडानी के अलावा दूसरी कंपनियां भी आएं ताकि उन्हें गैस सस्ती मिले।
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पानीपत के उत्पाद चीन को टक्कर देते हैं। पानीपत में पहले के मुकाबले चीन के मिंक कंबल का निर्यात 50 प्रतिशत तक कम हो गया। पानीपत के उद्यमियों ने खुद मशीनें तैयार कर सस्ती बेडशीट बनाना शुरू कर दिया था। पानीपत के मिंक कंबल ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई। कोरोना संक्रमण फैलने पर पूरा विश्व चीन से नाराज हो गया। अमेरिका और यूरोपियन देशों ने चीन के ऑर्डर कैंसिल कर पानीपत को दिए। पानीपत के उद्यमियों ने इस मौके को दोनों हाथों से लपका था। 2021 में पानीपत का एक्सपोर्ट 12 हजार करोड़ से बढ़कर 16 हजार करोड़ पहुंच गया। इस वर्ष 15 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट होने की उम्मीद थी, लेकिन अब उद्योग बंद होने से पानीपत को बड़ा झटका लगा है।
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शहर के सेक्टर 29 पार्ट-टू में 400 डाइंग यूनिट हैं। इन यूनिटों में हर रोज दो लाख किलोग्राम कपड़ा डाई होता है। इनमें कंबल, धागा, बेडशीट, तौलिये व पिलो कवर शामिल हैं। डाई होने के बाद माल को तैयार करने की अगली प्रक्रिया शुरू होती है। 400 डाइंग यूनिट में लगभग 20 लाख किलो माल स्टॉक हो गया है। जब उद्योग चलेंगे तभी यह माल तैयार होगा। अब एक्सपोर्टरों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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उद्यमियों की मांगें
- जुर्माना कम किया जाए और जेल का प्रावधान हटाया जाए।
- उनको पीएनजी पर बॉयलर को शिफ्ट करने के लिए दो साल तक का वक्त दिया जाए।
- एपीएम 800 से 80 पर लाना मुश्किल है, उनको इसमें राहत मिले।
- बॉयलर विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध कराई जाए।
- पीएनजी के दाम स्थिर किए जाएं।
- जहां पीएनजी की पाइपलाइन नहीं है, वहां यह नियम लागू न हों।
- शहर में अडानी के अलावा दूसरी कंपनियां भी आएं ताकि उन्हें गैस सस्ती मिले।