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आठवीं कक्षा की परीक्षा बोर्ड से कराने का विरोध हुआ तेज
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा आठवीं की परीक्षा बोर्ड से कराने का विरोध तेज होता जा रहा है। यह परीक्षा सीबीएसई से जुड़े प्रदेश के निजी स्कूलों पर भी लागू कर देने से निजी स्कूल संचालकों ने हाईकोर्ट की शरण ली है जिसकी सुनवाई 21 फरवरी को है। वहीं विद्यार्थी भी 8वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर विरोध में उतर आए हैं। बोर्ड द्वारा परीक्षा आयोजित न करवाने की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने अपने अभिभावकों की मदद से हाईकोर्ट की शरण ली है जिसकी सुनवाई 22 फरवरी को है। शिक्षाविदों व अभिभावकों का कहना है कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा राइट टू एजुकेशन एक्ट का उल्लंघन किया जा रहा है। एक्ट के अनुसार 8वीं तक के विद्यार्थियों से शुल्क लेने का अधिकार नहीं है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा देश में नई शिक्षा नीति लागू कर दी गई है। वहीं हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी ने चालू सत्र से ही आठवीं की परीक्षा बोर्ड से आयोजित कराने का निर्णय लिया हुआ है। बोर्ड यह परीक्षा मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में कराने जा रहा है।
पाठ्यक्रम पर भी बना है विवाद
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भिवानी बोर्ड का पाठ्यक्रम अलग है और सीबीएसई बोर्ड का पाठ्यक्रम अलग है। ऐसे में यदि भिवानी बोर्ड हरियाणा में निर्धारित सिलेबस के अनुसार ही दोनों बोर्डों से जुड़े मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्र-छात्राओं की आठवीं की परीक्षा लेता है तो विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम की समस्या बनेगी। जाहिर सी बात है कि सीबीएसई स्कूलों में भिवानी बोर्ड द्वारा निर्धारित सिलेबस नहीं पढ़ाया जाता और उन छात्र-छात्राओं के लिए यह परीक्षा उत्तीर्ण करना टेढ़ी खीर होगा।
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28 फरवरी तक की पंजीकरण कराने की तिथि
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को 8वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया है। हालांकि पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि को 20 फरवरी से बढ़ाकर 28 फरवरी किया गया है। निर्देशानुसार हरियाणा बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड से संबंधित स्कूलों को 28 फरवरी तक अपना पंजीकरण कराने के बाद विद्यार्थियों का भी नामांकन कराना होगा। यदि कोई स्कूल नामांकन नहीं कराता है तो वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का अगली कक्षा 9वीं में दाखिला नहीं होगा।
मुख्यमंत्री लेंगे बैठक, परीक्षा पर होगा पुनर्विचार
8वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर पनपे विवाद को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल 25 फरवरी को बैठक लेंगे जिसमें हुसा समेत विभिन्न शिक्षक संघ भी शामिल होगा। बैठक में 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पर पुनर्विचार होगा। वहीं, शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने भी अपने जगाधरी स्थित कार्यालय में अभिभावकों को आश्वासन दिया है कि बोर्ड परीक्षा के आयोजन पर पुनर्विचार किया जाएगा। इससे परीक्षा के आयोजन पर संशय के बादल भी मंडराए हुए हैं।
15 करोड़ की कमाई के चक्कर में भिवानी बोर्ड
कुछ शिक्षाविदों का सीधा आरोप है कि हरियाणा शिक्षा बोर्ड की मंशा 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित कर करोड़ों रुपये के रूप में मिलने वाली फीस है। इस समय प्रदेश में करीब दो लाख बच्चे आठवीं में पढ़ रहे हैं तथा लगभग 2500 प्राइवेट स्कूल संचालित हैं। बोर्ड पंजीकरण प्रति छात्र 550 रुपये तथा प्रति स्कूल 5000 रुपये की यानी करीब 15-16 करोड़ की कमाई करना चाहता है। अन्यथा बोर्ड परीक्षा लागू करने की जल्दबाजी कक्षा सत्र के अंत की बजाए शुरू में लागू करता।
राइट टू एजुकेशन एक्ट के अनुसार भिवानी बोर्ड का बोर्ड परीक्षा लेने का फैसला गलत है। दोनों के सिलेबस भी अलग हैं तो सीबीएसई वाले विद्यार्थी कैसे इस परीक्षा को दे सकेंगे। बोर्ड गलत कर रहा है तथा बोर्ड परीक्षा कराने से पहले कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए एप्लीकेशन दायर की है जिसकी अगली सुनवाई 21 फरवरी है।
- विजेंद्र मान, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ।
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उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा देश में नई शिक्षा नीति लागू कर दी गई है। वहीं हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी ने चालू सत्र से ही आठवीं की परीक्षा बोर्ड से आयोजित कराने का निर्णय लिया हुआ है। बोर्ड यह परीक्षा मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में कराने जा रहा है।
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पाठ्यक्रम पर भी बना है विवाद
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भिवानी बोर्ड का पाठ्यक्रम अलग है और सीबीएसई बोर्ड का पाठ्यक्रम अलग है। ऐसे में यदि भिवानी बोर्ड हरियाणा में निर्धारित सिलेबस के अनुसार ही दोनों बोर्डों से जुड़े मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्र-छात्राओं की आठवीं की परीक्षा लेता है तो विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम की समस्या बनेगी। जाहिर सी बात है कि सीबीएसई स्कूलों में भिवानी बोर्ड द्वारा निर्धारित सिलेबस नहीं पढ़ाया जाता और उन छात्र-छात्राओं के लिए यह परीक्षा उत्तीर्ण करना टेढ़ी खीर होगा।
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28 फरवरी तक की पंजीकरण कराने की तिथि
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को 8वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया है। हालांकि पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि को 20 फरवरी से बढ़ाकर 28 फरवरी किया गया है। निर्देशानुसार हरियाणा बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड से संबंधित स्कूलों को 28 फरवरी तक अपना पंजीकरण कराने के बाद विद्यार्थियों का भी नामांकन कराना होगा। यदि कोई स्कूल नामांकन नहीं कराता है तो वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का अगली कक्षा 9वीं में दाखिला नहीं होगा।
मुख्यमंत्री लेंगे बैठक, परीक्षा पर होगा पुनर्विचार
8वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर पनपे विवाद को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल 25 फरवरी को बैठक लेंगे जिसमें हुसा समेत विभिन्न शिक्षक संघ भी शामिल होगा। बैठक में 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पर पुनर्विचार होगा। वहीं, शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने भी अपने जगाधरी स्थित कार्यालय में अभिभावकों को आश्वासन दिया है कि बोर्ड परीक्षा के आयोजन पर पुनर्विचार किया जाएगा। इससे परीक्षा के आयोजन पर संशय के बादल भी मंडराए हुए हैं।
15 करोड़ की कमाई के चक्कर में भिवानी बोर्ड
कुछ शिक्षाविदों का सीधा आरोप है कि हरियाणा शिक्षा बोर्ड की मंशा 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित कर करोड़ों रुपये के रूप में मिलने वाली फीस है। इस समय प्रदेश में करीब दो लाख बच्चे आठवीं में पढ़ रहे हैं तथा लगभग 2500 प्राइवेट स्कूल संचालित हैं। बोर्ड पंजीकरण प्रति छात्र 550 रुपये तथा प्रति स्कूल 5000 रुपये की यानी करीब 15-16 करोड़ की कमाई करना चाहता है। अन्यथा बोर्ड परीक्षा लागू करने की जल्दबाजी कक्षा सत्र के अंत की बजाए शुरू में लागू करता।
राइट टू एजुकेशन एक्ट के अनुसार भिवानी बोर्ड का बोर्ड परीक्षा लेने का फैसला गलत है। दोनों के सिलेबस भी अलग हैं तो सीबीएसई वाले विद्यार्थी कैसे इस परीक्षा को दे सकेंगे। बोर्ड गलत कर रहा है तथा बोर्ड परीक्षा कराने से पहले कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए एप्लीकेशन दायर की है जिसकी अगली सुनवाई 21 फरवरी है।
- विजेंद्र मान, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा संयुक्त विद्यालय संघ।