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Panipat News: भाला फेंक खिलाड़ियों की जननी बनी पानीपत की भूमि, नीरज और नवदीप चमके
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पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत अब उद्योग से साथ खेलों में भी अपनी चमक बिखेरने लगी है। औद्योगिक नगरी अब भाला फेंक खिलाड़ियों की जननी बन चुकी है। पानीपत के खंडरा गांव के नीरज चोपड़ा, बुआना लाखु गांव के नवदीप समेत अनेक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पानीपत से निकले हैं, जो अब युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षिका 80 वर्षीय दर्शना देशवाल ने रजत जीत रचा इतिहास :
पूर्व पशुपालन मंत्री बिजेंद्र कादियान की सास सेवानिवृत्त शिक्षिका 80 वर्षीय दर्शना देशवाल पहली नेशनल मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाला फेंक में रजत पदक जीत चुकी हैं। दर्शना राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में 20 बार पदक जीत चुकी हैं। दर्शना ने बताया कि वे अटावला गांव की रहने वाली हैं लेकिन वर्तमान समय में वे सेक्टर 13-17 में रह रही हैं। उन्होंने बताया कि 2017 में चंडीगढ़ की 101 वर्षीय मनकौर ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। उनकी तस्वीर अखबार में छपी थी। उन्हीं से प्रेरित होकर 2017 में खेल का अभ्यास करने की ठान ली। पति धर्मपाल देशवाल ने बांस की जेवलिन लाकर दी। अभ्यास किया तो आसपास के लोगों ने मजाक किया। उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और पहली बार जिला स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब पदक जीतने पर मजाक करने वाले लोग ही तारीफ करते हैं।
विजय गहल्याण ने भाला फेंक में जीता स्वर्ण :
आट्टा गांव के रहने वाले विजय गहल्याण ने मात्र तीन महीने के अभ्यास से राज्य स्तरीय जूनियर भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्णपदक और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत देश का नाम रोशन किया। विजय ने बताया कि वह पहले कुश्ती में हिस्सा लेता था लेकिन चोट लगने के कारण उसे वह छोड़नी पड़ी। फिर उसने भाला फेंक का अभ्यास शुरू किया और तीन महीने के अंदर ही राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया।
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विक्रांत मलिक ने 80.02 मीटर दूरी पर भाला फेंक जीता स्वर्ण :
पानीपत के उग्राखेड़ी गांव का रहने वाला विक्रांत मलिक भाला फेंक देश का नाम रोशन कर चुका है। विक्रांत ने 2024 में 63वीं राष्ट्रीय ओपन एथलीट चेंपियनशिप में 80.02 मीटर की दूरी पर भाला फेंक स्वर्ण पदक जीता और देश की झोली में एक ओर स्वर्ण पदक डाला। गांव व आस-पास के गांव के खिलाड़ी अब विक्रांत से प्रेरणा लेकर भाला फेंक खेल का अभ्यास कर रहे हैं और आने वाले समय में देश के लिए पदक जीतने की चाह से आगे बढ़ रहे हैं।
बॉक्स
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुके हैं नीरज चोपड़ा
नीरज चोपड़ा 2020 में टोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा चुके हैं। नीरज चोपड़ा के नाम पर सात अगस्त को देशभर में 2021 में पहला जेवलिन थ्रो डे मनाया गया। नीरज के टोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद इस खेल को नई पहचान मिली है। गांव और शहर में लड़के व लड़कियां भाला फेंक का अभ्यास कर रही हैं। नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने बताया कि नीरज से पहले भाला फेंक खेल को इतना सम्मान नहीं दिया जाता था। अब नीरज के गांव में कई खिलाड़ी तैयार हुए हैं।
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नवदीप ने पेरिस पैरालंपिक में जीता स्वर्ण पदक
बुआना लाखु गांव के नवदीप सिंह ने 2024 पेरिस पैरालंपिक में पुरुषों की भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता और देश का मान बढ़ाया। नवदीप के छह में से तीन थ्रो 45 मीटर से आगे गए लेकिन उसने अगली बार बेहतर करने की उम्मीद के साथ स्वर्ण पदक देश की झोली में डाला। पदक जीतने के बाद नवदीप ने कहा था कि मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी। मेरा लक्ष्य थोड़ा कम था लेकिन मुझे उम्मीद थी। इसलिए यह अच्छा रहा। मैंने अपने पहले थ्रो में फाउल किया लेकिन मेरे कोच ने कहा कि यह एक अच्छा प्रयास था। इसलिए मैंने अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन किया।
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सेवानिवृत्त शिक्षिका 80 वर्षीय दर्शना देशवाल ने रजत जीत रचा इतिहास :
पूर्व पशुपालन मंत्री बिजेंद्र कादियान की सास सेवानिवृत्त शिक्षिका 80 वर्षीय दर्शना देशवाल पहली नेशनल मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाला फेंक में रजत पदक जीत चुकी हैं। दर्शना राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में 20 बार पदक जीत चुकी हैं। दर्शना ने बताया कि वे अटावला गांव की रहने वाली हैं लेकिन वर्तमान समय में वे सेक्टर 13-17 में रह रही हैं। उन्होंने बताया कि 2017 में चंडीगढ़ की 101 वर्षीय मनकौर ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। उनकी तस्वीर अखबार में छपी थी। उन्हीं से प्रेरित होकर 2017 में खेल का अभ्यास करने की ठान ली। पति धर्मपाल देशवाल ने बांस की जेवलिन लाकर दी। अभ्यास किया तो आसपास के लोगों ने मजाक किया। उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और पहली बार जिला स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब पदक जीतने पर मजाक करने वाले लोग ही तारीफ करते हैं।
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विजय गहल्याण ने भाला फेंक में जीता स्वर्ण :
आट्टा गांव के रहने वाले विजय गहल्याण ने मात्र तीन महीने के अभ्यास से राज्य स्तरीय जूनियर भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्णपदक और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत देश का नाम रोशन किया। विजय ने बताया कि वह पहले कुश्ती में हिस्सा लेता था लेकिन चोट लगने के कारण उसे वह छोड़नी पड़ी। फिर उसने भाला फेंक का अभ्यास शुरू किया और तीन महीने के अंदर ही राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया।
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विक्रांत मलिक ने 80.02 मीटर दूरी पर भाला फेंक जीता स्वर्ण :
पानीपत के उग्राखेड़ी गांव का रहने वाला विक्रांत मलिक भाला फेंक देश का नाम रोशन कर चुका है। विक्रांत ने 2024 में 63वीं राष्ट्रीय ओपन एथलीट चेंपियनशिप में 80.02 मीटर की दूरी पर भाला फेंक स्वर्ण पदक जीता और देश की झोली में एक ओर स्वर्ण पदक डाला। गांव व आस-पास के गांव के खिलाड़ी अब विक्रांत से प्रेरणा लेकर भाला फेंक खेल का अभ्यास कर रहे हैं और आने वाले समय में देश के लिए पदक जीतने की चाह से आगे बढ़ रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुके हैं नीरज चोपड़ा
नीरज चोपड़ा 2020 में टोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा चुके हैं। नीरज चोपड़ा के नाम पर सात अगस्त को देशभर में 2021 में पहला जेवलिन थ्रो डे मनाया गया। नीरज के टोक्यो ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद इस खेल को नई पहचान मिली है। गांव और शहर में लड़के व लड़कियां भाला फेंक का अभ्यास कर रही हैं। नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने बताया कि नीरज से पहले भाला फेंक खेल को इतना सम्मान नहीं दिया जाता था। अब नीरज के गांव में कई खिलाड़ी तैयार हुए हैं।
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नवदीप ने पेरिस पैरालंपिक में जीता स्वर्ण पदक
बुआना लाखु गांव के नवदीप सिंह ने 2024 पेरिस पैरालंपिक में पुरुषों की भाला फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता और देश का मान बढ़ाया। नवदीप के छह में से तीन थ्रो 45 मीटर से आगे गए लेकिन उसने अगली बार बेहतर करने की उम्मीद के साथ स्वर्ण पदक देश की झोली में डाला। पदक जीतने के बाद नवदीप ने कहा था कि मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी। मेरा लक्ष्य थोड़ा कम था लेकिन मुझे उम्मीद थी। इसलिए यह अच्छा रहा। मैंने अपने पहले थ्रो में फाउल किया लेकिन मेरे कोच ने कहा कि यह एक अच्छा प्रयास था। इसलिए मैंने अगले प्रयास में बेहतर प्रदर्शन किया।