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तीन हत्याओं के बाद हरिद्वार पहुंचा हत्यारा आशु, गंगा में लगाई डुबकी
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पानीपत। सीआईए-टू पुलिस की गिरफ्त में आरोपी आशु व साथ में मौजूद एएसपी विजय जानकारी देते हुए।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। तीन दोस्तों की हत्या करने के बाद हत्यारोपी आशु-26 ने हरिद्वार जाकर गंगा में डुबकी लगाई और जिस गमछे से उसने दोस्तों का कत्ल किया था, उसे गंगा जी में बहा दिया। फिर तीन दिन हरिद्वार में ही रहकर वापस अपने गांव लौट गया ताकि किसी को उस पर शक न हो।
मृतक दोस्त राकेश के बड़े भाई उमेद ने बताया कि 12 जून की सुबह करीब छह बजे भाई राकेश ने कॉल किया था। उसने बताया था कि आशु उसे पीट रहा है। बहुत ज्यादा शराब पिला दी है। उसे पता नहीं कि वह कहां पर है। इसके बाद उसकी आशु से भी बात हुई तो उसने कहा कि चिंता मत करो, मेरा जिगरी दोस्त है, शाम तक घर ले आऊंगा। इसके बाद 12 जून को दोपहर तितावी पुलिस ने राकेश की मौत की सूचना दी। तब आशु का फोन स्विच ऑफ मिला। उसी दिन रात 10 बजे आशु ने उन्हें कॉल किया और पूछा कि राकेश मिल गया, चोट ज्यादा तो नहीं थी। उसने ऐसा जाहिर करने का प्रयास कि जैसे हत्या के संबंध में उसे कुछ पता नहीं।
शादी की सालगिरह से एक दिन कर दी राकेश की हत्या
उमेद ने बताया कि राकेश सेक्टर-29 स्थित एक कारपेट कंपनी में ड्राइवर था। उसकी पांच साल पहले शादी हुई थी। ढाई साल का एक बेटा है। 13 जून को उसकी शादी की सालगिरह थी। इससे एक दिन पहले ही उसे मौत के घाट उतार दिया गया।
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परिजन आखिरी बार मोनू को नहीं देख सके, शनाख्त न होने पर पुलिस ने कर दिया था संस्कार
मूलरूप से जींद निवासी मोनू नौ माह से गांव भालसी में अपनी मौसी के घर रह रहा था। वह कंबल फैक्टरी में काम करता था। 11 जून की रात नारा के आशु ने मोनू की गला घोंटकर हत्या करने के बाद शव को नहर में फेंक दिया था। गत 13 जून को समालखा पुलिस को नहर में मोनू का शव मिला था। शिनाख्त न होने पर 16 जून को पुलिस ने असंध नहर किनारे उसका अंतिम संस्कार कर दिया। 21 जून को परिजन मोनू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पता चला कि 16 जून को समालखा पुलिस उसका अंतिम संस्कार कर चुकी है। मोनू की बड़ी बहन शादीशुदा है और एक छोटा भाई है।
सीमेंट फैक्टरी में काम करता था सोनू-
नारा गांव निवासी मृतक सोनू सीमेंट फैक्टरी में ठेकेदार रणधीर के पास काम करता था। 11 जून की रात 10 बजे तक जब सोनू घर नहीं पहुंचा तो बड़े भाई सुनील ने कॉल किया। जिस पर उसने कहा कि वह गांव के ही आशु और राकेश के पास बैठा है, लेकिन वह नहीं लौटा। सुबह शराब के ठेके के पीछे उसका शव मिला। शरीर और गले पर चोट के निशान होने पर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। जिसके बाद पुलिस ने आशु की तलाश शुरू की थी।
सोनू की हत्या की जांच मोनू और राकेश हत्याकांड तक पहुंची
पुलिस ने मोनू और राकेश की मौत के मामले में 174 की कार्रवाई की थी जबकि सोनू हत्याकांड में पुलिस ने 302 धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी थी। परिजनों ने शक जाहिर किया तो पुलिस की शक की सुई आशु की तरफ घूम गई। पुलिस ने 27 जून को आशु को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से सोनू का मोबाइल फोन बरामद कर उसे जेल भेज दिया गया।
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मृतक दोस्त राकेश के बड़े भाई उमेद ने बताया कि 12 जून की सुबह करीब छह बजे भाई राकेश ने कॉल किया था। उसने बताया था कि आशु उसे पीट रहा है। बहुत ज्यादा शराब पिला दी है। उसे पता नहीं कि वह कहां पर है। इसके बाद उसकी आशु से भी बात हुई तो उसने कहा कि चिंता मत करो, मेरा जिगरी दोस्त है, शाम तक घर ले आऊंगा। इसके बाद 12 जून को दोपहर तितावी पुलिस ने राकेश की मौत की सूचना दी। तब आशु का फोन स्विच ऑफ मिला। उसी दिन रात 10 बजे आशु ने उन्हें कॉल किया और पूछा कि राकेश मिल गया, चोट ज्यादा तो नहीं थी। उसने ऐसा जाहिर करने का प्रयास कि जैसे हत्या के संबंध में उसे कुछ पता नहीं।
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शादी की सालगिरह से एक दिन कर दी राकेश की हत्या
उमेद ने बताया कि राकेश सेक्टर-29 स्थित एक कारपेट कंपनी में ड्राइवर था। उसकी पांच साल पहले शादी हुई थी। ढाई साल का एक बेटा है। 13 जून को उसकी शादी की सालगिरह थी। इससे एक दिन पहले ही उसे मौत के घाट उतार दिया गया।
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परिजन आखिरी बार मोनू को नहीं देख सके, शनाख्त न होने पर पुलिस ने कर दिया था संस्कार
मूलरूप से जींद निवासी मोनू नौ माह से गांव भालसी में अपनी मौसी के घर रह रहा था। वह कंबल फैक्टरी में काम करता था। 11 जून की रात नारा के आशु ने मोनू की गला घोंटकर हत्या करने के बाद शव को नहर में फेंक दिया था। गत 13 जून को समालखा पुलिस को नहर में मोनू का शव मिला था। शिनाख्त न होने पर 16 जून को पुलिस ने असंध नहर किनारे उसका अंतिम संस्कार कर दिया। 21 जून को परिजन मोनू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पता चला कि 16 जून को समालखा पुलिस उसका अंतिम संस्कार कर चुकी है। मोनू की बड़ी बहन शादीशुदा है और एक छोटा भाई है।
सीमेंट फैक्टरी में काम करता था सोनू-
नारा गांव निवासी मृतक सोनू सीमेंट फैक्टरी में ठेकेदार रणधीर के पास काम करता था। 11 जून की रात 10 बजे तक जब सोनू घर नहीं पहुंचा तो बड़े भाई सुनील ने कॉल किया। जिस पर उसने कहा कि वह गांव के ही आशु और राकेश के पास बैठा है, लेकिन वह नहीं लौटा। सुबह शराब के ठेके के पीछे उसका शव मिला। शरीर और गले पर चोट के निशान होने पर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। जिसके बाद पुलिस ने आशु की तलाश शुरू की थी।
सोनू की हत्या की जांच मोनू और राकेश हत्याकांड तक पहुंची
पुलिस ने मोनू और राकेश की मौत के मामले में 174 की कार्रवाई की थी जबकि सोनू हत्याकांड में पुलिस ने 302 धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी थी। परिजनों ने शक जाहिर किया तो पुलिस की शक की सुई आशु की तरफ घूम गई। पुलिस ने 27 जून को आशु को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से सोनू का मोबाइल फोन बरामद कर उसे जेल भेज दिया गया।