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14 साल का वनवास काटकर पानीपत लौटा अपह्रत युवक, भूला अपने माता- पिता और गांव का नाम
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पानीपत। 10 वर्ष की उम्र में अपहृत किशोर 14 वर्ष बाद पानीपत लौटा, लेकिन वह सबकुछ भूल चुका है। उसे अपने गांव के साथ ही माता-पिता का नाम भी याद नहीं है। सिर्फ इतना याद आता है कि पिता किसी दुकान पर काम करते थे। उसकी तीन बहने हैं। ई-रिक्शा एसोसिएशन के प्रधान ने उसे जन सेवादल को सौंपा, जिन्होंने उसके ठहरने का प्रबंध कराया है। सामाजिक संगठन उसे परिवार से मिलाने में जुट गए हैं। युवक के पास से एक पर्ची मिली है, जिसमें उसका अपहरण किए जाने की बात लिखी है। एसपी शशांक कुमार सावन ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर इसमें सच्चाई निकली तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मनोज ने बताया कि 14 साल पहले कार में सवार कुछ युवक आए और शहर घुमाने की बात कहकर उसे गाड़ी में बैठा लिया। उसे राजस्थान के जोधपुर ले गए। जहां भैंसों के तबेले में उससे काम कराया। उससे 10-12 भैंसों का गोबर उठवाते और चारा डलवाते थे। खेतों में मजदूरी करवाते थे। एक वक्त ही खाना देते थे। कई बार भागने का प्रयास किया, लेकिन हर बार पकड़ा जाता था। उसे पीटा जाता था। बेल्ट और डंडों से पीटकर सजा दी जाती थी। मनोज ने कहा कि वह माता-पिता का नाम भूल गया है। गांव का नाम भी याद नहीं आ रहा है। अपहर्ताओं के एक पड़ोसी ने उसकी पानीपत की टिकट कराई और ट्रेन में बैठा दिया। उसकी मदद से आरोपियों के चंगुल से छूटकर ट्रेन में बैठा और अब पानीपत पहुंचा।
ई-रिक्शा एसोसिएशन के प्रधान संजीव ने बताया कि लगभग सुबह 10 बजे रेलवे स्टेशन से मानोज आ रहा था। हमने पूछा कि कहां जाना है, तब उसने बताया कि 14 साल पहले उसका अपहरण हो गया था और उसे जोधपुर (राजस्थान) ले जाया गया था। इसके बाद उन्होंने मनोज को सामान्य अस्पताल पहुंचाया, जहां से इलाज कराने के बाद जन सेवादल को सुपुर्द कर दिया।
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मनोज ने बताया कि वह बस स्टैंड पर इसलिए जा रहा था, क्योंकि वहां पर यात्रियों के लिए मुनादी होती रहती है। कौन सी बस किस गांव में जाएगी। उस मुनादी से गांव के नाम सुनता ताकि उसे अपने गांव का नाम याद आ सके।
सामाजिक संगठन के प्रधान चमन गुलाटी ने अपील की कि 14 साल पहले किसी के घर से कोई बच्चा लापता हुआ है और इसकी पहचान बताता है तो आकर ले सकता है। सभी कानूनी कार्रवाई के अनुसार ही युवक को उसके माता-पिता के हवाले किया जाएगा। सामाजिक संगठन भी मनोज का दर्द सुनकर उसके परिजनों से मिलाने में जुट गए हैं।
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मनोज ने बताया कि 14 साल पहले कार में सवार कुछ युवक आए और शहर घुमाने की बात कहकर उसे गाड़ी में बैठा लिया। उसे राजस्थान के जोधपुर ले गए। जहां भैंसों के तबेले में उससे काम कराया। उससे 10-12 भैंसों का गोबर उठवाते और चारा डलवाते थे। खेतों में मजदूरी करवाते थे। एक वक्त ही खाना देते थे। कई बार भागने का प्रयास किया, लेकिन हर बार पकड़ा जाता था। उसे पीटा जाता था। बेल्ट और डंडों से पीटकर सजा दी जाती थी। मनोज ने कहा कि वह माता-पिता का नाम भूल गया है। गांव का नाम भी याद नहीं आ रहा है। अपहर्ताओं के एक पड़ोसी ने उसकी पानीपत की टिकट कराई और ट्रेन में बैठा दिया। उसकी मदद से आरोपियों के चंगुल से छूटकर ट्रेन में बैठा और अब पानीपत पहुंचा।
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ई-रिक्शा एसोसिएशन के प्रधान संजीव ने बताया कि लगभग सुबह 10 बजे रेलवे स्टेशन से मानोज आ रहा था। हमने पूछा कि कहां जाना है, तब उसने बताया कि 14 साल पहले उसका अपहरण हो गया था और उसे जोधपुर (राजस्थान) ले जाया गया था। इसके बाद उन्होंने मनोज को सामान्य अस्पताल पहुंचाया, जहां से इलाज कराने के बाद जन सेवादल को सुपुर्द कर दिया।
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मनोज ने बताया कि वह बस स्टैंड पर इसलिए जा रहा था, क्योंकि वहां पर यात्रियों के लिए मुनादी होती रहती है। कौन सी बस किस गांव में जाएगी। उस मुनादी से गांव के नाम सुनता ताकि उसे अपने गांव का नाम याद आ सके।
सामाजिक संगठन के प्रधान चमन गुलाटी ने अपील की कि 14 साल पहले किसी के घर से कोई बच्चा लापता हुआ है और इसकी पहचान बताता है तो आकर ले सकता है। सभी कानूनी कार्रवाई के अनुसार ही युवक को उसके माता-पिता के हवाले किया जाएगा। सामाजिक संगठन भी मनोज का दर्द सुनकर उसके परिजनों से मिलाने में जुट गए हैं।