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महफिल में न बैठने की जिद बनी मौत का कारण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Mar 2022 01:51 AM IST
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The insistence on not sitting in the gathering became the cause of death
पानीपत। बदमाश दलजीत उर्फ जीता - फोटो : Panipat
पानीपत। चिराग को नहीं पता था कि महफिल में न बैठने की जिद ही उसकी जान का कारण बन जाएगी। जिस महफिल में दोस्त सुमित उसे लेकर गया था, वहां से चिराग उठकर चल दिया। बदमाश दलजीत उर्फ जीत्ता ने उससे कहा- ‘‘बैठ्ठे है, अक गोली मारूं, चिराग ने कहा कि हां! तू मेरे गोली मारेगा!’’ इतना कहते ही जीत्ता ने पिस्तौल निकालकर गोली मार दी। जो हाथ से आरपार होकर दिल में जा धंसी और चिराग की मौके पर ही मौत हो गई।
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चिराग की मां ने बताया कि बेटा शाम पांच बजे घर से गया था। रात 10:20 मिनट पर उसने पहले कॉल की। बेटा बाइक पर था और कहा रहा था कि मम्मी बहुत जल्द आपसे पास पहुंच जाउंगा। 20 मिनट बाद उसने दोबारा कॉल की तो कहा कि वह दोस्त सुमित के साथ एक ऑफिस पर आ गया है और सुमित को कुछ सामान उठाना है, जिसके तुरंत बाद वह यहां से निकल रहा है, रात 12 बजे पुलिस का ही कॉल आया मौत की सूचना दी। दोस्तों उन्हें बताया कि चिराग महफिल से उठकर चला तो सुमित ने हाथ पकड़कर रोक लिया, लेकिन चिराग घर जाने जिद पर अड़ गया था।
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बदमाश दलजीत उर्फ जीते का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड
जींद के बुढ़ाखेड़ा निवासी बदमाश दलजीत उर्फ जीत्ता का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रह चुका है। सूत्रों के अनुसार दलजीत उर्फ जीता कुख्यात गैंगस्टर प्रसन्न उर्फ लंबू की गैंग का गुर्गा है, हाल ही में दलजीत दूसरी गैंग के नजदीकि माना जा रहा था। पुलिस दोनों ही गैंग के गुर्गो और अपने खास मुखबिरों से उसके ठिकानों पर पता लगा रही है।
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दादा हो चुके सब इंस्पेक्टर पद से रिटायर्ड
चिराग अपने माता पिता का ही नहीं बल्कि चाचा-चाची के घर का भी इकलौता चिराग था। चिराग के दादा तारा सिंह ने बताया कि वह हरियाणा पुलिस में तैनात था। वर्ष 2009 में सब-इंस्पेक्टर के पद से रिटायर्ड हुुआ था। उसके चार बच्चे है, जिनमें दो बेटे और दो बेटी है। उसका एक बेटा रविकांत गुजरात में रहता है। दूसरे नंबर का बेटा नवीन पानीपत में रहता है। रविकांत को कोई संतान नहीं है वहीं नवीन का इकलौता बेटा चिराग था। रविकांत कहता था कि चिराग ही उनका इकलौता चिराग है, उन्हें संतान की जरूरत नहीं।

मां को कहता था, 12वीं की परीक्षा के बाद बिजनेस करूंगा
मां पूनम ने बताया कि चिराग किशनपुरा स्थित सदानंद स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। उसकी 30 मार्च से परीक्षा थी। बेटा कहता था कि परीक्षा के बाद अपना ही बिजनैस करेगा। पूनम ने बताया कि चिराग के पापा नवीन राइस मिल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। बेटा कहता था कि जब वह पैरों पर खड़ा हो जाएगा तो पापा को काम नहीं करने देगा।
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