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Panipat News: औद्योगिक नगरी की जहरीली हो रही हवा, अस्थमा लगातार बढ़ रहा, अस्पताल में हर सप्ताह में आ रहे पांच मरीज
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दवा लेने के लिए लाइन में लगे मरीज। संवाद
पानीपत। औद्योगिक नगरी में बढ़ते प्रदूषण के कारण हवा जहरीली हो गई है। सर्दी के मौसम में एक्यूआई 400 से भी अधिक पहुंच रहा है। सामान्य दिनों में शाम के समय औद्योगिक क्षेत्र में धुएं का गुबार बन जाता है, ऐसे में लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। जहरीली हवा से बड़े-बुजुर्ग के साथ युवा और बच्चों में अस्थमा तेजी से बढ़ रहा है। अकेले जिला नागरिक अस्पताल में हर सप्ताह में करीब पांच मरीज आ रहे हैं। इनमें 20 वर्ष से कम आयु के युवा ज्यादा मिल रहे हैं। पहले बड़े-बुजुर्ग की दमा की शिकायत लेकर आते थे। इनमें सांस लेने में समस्या या एलर्जी सामने आ रही है।
जिला नागरिक अस्पताल की फिजिशियन डॉ. जैसमीन कौर ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा या सांस संबंधी बीमारी बढ़ गई है। पहले सप्ताह में दो या तीन मरीज अस्पताल में आते थे। वहीं अब करीब पांच मरीज आने लगे हैं। कई बार गंभीर स्थिति होने के कारण उन्हें आपातकालीन वार्ड में दाखिल भी कराया जाता है। अस्थमा कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी होता है, इसके साथ बदलती जीवनशैली, धूलकण, प्रदूषण, तंबाकू, सांस संबंधी समस्या और कई बार नाक की एलर्जी से भी हो जाता है। युवा तंबाकू, अल्कोहल का ज्यादा सेवन कर रहे हैं। इससे फेफड़े संबंधी बीमारी हो रही है। यह बाद में अस्थमा का भी कारण बन रही है। लोगों को चाहिए कि वे शुरुआती लक्षणों में ही चिकित्सक से इलाज कराएं। घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें, तंबाकू या अल्कोहल का सेवन करने से परहेज करें।
खाने में हरी-सब्जियां और दिनचर्या में योग को करें शामिल
डॉ. जैसमीन ने बताया कि बदलता खानपान भी लोगों को बीमारी बना रहा है। लोगों को अपने खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करनी चाहिए और दिनचर्या में सुबह-शाम करीब एक घंटा योग करना चाहिए। इसमें श्वास संबंधी अनुलोम-विलोम और कपालभाति प्राणायाम को शामिल करना चाहिए।
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अस्पताल में अस्थमा के मरीजों के लिए पंप, जांच की पर्याप्त सुविधा है। चिकित्सक मरीज को इलाज के साथ सावधानीपूर्वक रहने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
- डॉ. विजय मलिक, सीएमओ।
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जिला नागरिक अस्पताल की फिजिशियन डॉ. जैसमीन कौर ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा या सांस संबंधी बीमारी बढ़ गई है। पहले सप्ताह में दो या तीन मरीज अस्पताल में आते थे। वहीं अब करीब पांच मरीज आने लगे हैं। कई बार गंभीर स्थिति होने के कारण उन्हें आपातकालीन वार्ड में दाखिल भी कराया जाता है। अस्थमा कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी होता है, इसके साथ बदलती जीवनशैली, धूलकण, प्रदूषण, तंबाकू, सांस संबंधी समस्या और कई बार नाक की एलर्जी से भी हो जाता है। युवा तंबाकू, अल्कोहल का ज्यादा सेवन कर रहे हैं। इससे फेफड़े संबंधी बीमारी हो रही है। यह बाद में अस्थमा का भी कारण बन रही है। लोगों को चाहिए कि वे शुरुआती लक्षणों में ही चिकित्सक से इलाज कराएं। घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें, तंबाकू या अल्कोहल का सेवन करने से परहेज करें।
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खाने में हरी-सब्जियां और दिनचर्या में योग को करें शामिल
डॉ. जैसमीन ने बताया कि बदलता खानपान भी लोगों को बीमारी बना रहा है। लोगों को अपने खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करनी चाहिए और दिनचर्या में सुबह-शाम करीब एक घंटा योग करना चाहिए। इसमें श्वास संबंधी अनुलोम-विलोम और कपालभाति प्राणायाम को शामिल करना चाहिए।
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अस्पताल में अस्थमा के मरीजों के लिए पंप, जांच की पर्याप्त सुविधा है। चिकित्सक मरीज को इलाज के साथ सावधानीपूर्वक रहने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
- डॉ. विजय मलिक, सीएमओ।

दवा लेने के लिए लाइन में लगे मरीज। संवाद