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सभ्यता के विकास में साहित्य व रंगमंच की महत्वपूर्ण भूमिका
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पानीपत। नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा की की तरफ से आयोजित नाट्य कार्यशाला में पहुंचे मुख्य अतिथि आईएएस ?
- फोटो : Panipat
पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ओर से एक माह तक चलने वाली नाट्य कार्यशाला में शनिवार को विमर्श-मंथन किया गया। प्रदेश में उभरते लेखकों और रंगकर्मियों की युवा पीढ़ी तैयार करने की दिशा में कार्यशाला एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
मुख्य अतिथि एवं बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने प्रतिभागी रंगमंच कर्मियों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कॉलेज प्रांगण में पौधा रोपित किया। उन्होंने कहा कि जिस समाज का साहित्य और रंग-मंच से कोई जुड़ाव नहीं है, वह असभ्य कहलाता है। सभ्यता के विकास में साहित्य और रंगमंच की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। युवा अवस्था में नाटक सिखने और इसमें भाग लेने के कई फायदे है। नाटक हमारे कौशलों और आत्मविश्वास का निर्माण करता है। विचारों के उच्चतर स्तर को प्रोत्साहित करने का काम रंगमंच का है।
अति विशिष्ट मेहमान के तौर पर नगर निगम कमिश्नर आरके सिंह और अतिरिक्त उपायुक्त वीना हुड्डा भी उपस्थित रहीं। एसडीएम वीएस ढुल, चीफ इंजीनियर यूएचबीवीएन रोहतक एके रहेजा, चीफ इंजीनियर पानीपत थर्मल एसएल सचदेवा भी कार्यशाला का हिस्सा बने। कार्यशाला के कैंप डायरेक्टर लोकेंद्र त्रिवेदी, असिस्टेंट डायरेक्टर सत्येंद्र मलिक और सतीश दवे रहे, इसे एनएसडी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश खन्ना का सानिध्य प्राप्त है। एसडी एजुकेशन सोसाइटी के संरक्षक पवन गर्ग, एसडी कॉलेज प्रधान पवन गोयल, कोषाध्यक्ष विकुल बिंदल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने पुष्प रोपित पौधे और शाल भेंट कर सभी मेहमानों का स्वागत किया। कार्यशाला के को-ऑर्डिनेटर बिजली विभाग पंचकूला के पीआरओ राजीव रंजन ने मंच संचालन किया।
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प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि लोक-साहित्य, आधुनिक भारतीय नाटक, पारंपरिक भारतीय रंगमंच रूपों, एशियन नाटक और पाश्चात्य नाट्य प्रोटोकॉल के सुनियोजित अध्ययन और व्यावहारिक प्रस्तुतीकरण अनुभव छात्रों को रंगमंच कला की इस कार्यशाला में मिलेगा।
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मुख्य अतिथि एवं बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने प्रतिभागी रंगमंच कर्मियों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कॉलेज प्रांगण में पौधा रोपित किया। उन्होंने कहा कि जिस समाज का साहित्य और रंग-मंच से कोई जुड़ाव नहीं है, वह असभ्य कहलाता है। सभ्यता के विकास में साहित्य और रंगमंच की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। युवा अवस्था में नाटक सिखने और इसमें भाग लेने के कई फायदे है। नाटक हमारे कौशलों और आत्मविश्वास का निर्माण करता है। विचारों के उच्चतर स्तर को प्रोत्साहित करने का काम रंगमंच का है।
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अति विशिष्ट मेहमान के तौर पर नगर निगम कमिश्नर आरके सिंह और अतिरिक्त उपायुक्त वीना हुड्डा भी उपस्थित रहीं। एसडीएम वीएस ढुल, चीफ इंजीनियर यूएचबीवीएन रोहतक एके रहेजा, चीफ इंजीनियर पानीपत थर्मल एसएल सचदेवा भी कार्यशाला का हिस्सा बने। कार्यशाला के कैंप डायरेक्टर लोकेंद्र त्रिवेदी, असिस्टेंट डायरेक्टर सत्येंद्र मलिक और सतीश दवे रहे, इसे एनएसडी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश खन्ना का सानिध्य प्राप्त है। एसडी एजुकेशन सोसाइटी के संरक्षक पवन गर्ग, एसडी कॉलेज प्रधान पवन गोयल, कोषाध्यक्ष विकुल बिंदल और प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने पुष्प रोपित पौधे और शाल भेंट कर सभी मेहमानों का स्वागत किया। कार्यशाला के को-ऑर्डिनेटर बिजली विभाग पंचकूला के पीआरओ राजीव रंजन ने मंच संचालन किया।
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प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि लोक-साहित्य, आधुनिक भारतीय नाटक, पारंपरिक भारतीय रंगमंच रूपों, एशियन नाटक और पाश्चात्य नाट्य प्रोटोकॉल के सुनियोजित अध्ययन और व्यावहारिक प्रस्तुतीकरण अनुभव छात्रों को रंगमंच कला की इस कार्यशाला में मिलेगा।

पानीपत। कार्यशाला के दौरान मौजूद प्राचार्य व अन्य।- फोटो : Panipat