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अवैध एरिया को वैध दिखा दे दी एनओसी और हो गई रजिस्ट्री, असल मालिक काट रहा चक्कर
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नगर निगम की प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में अधिकारियों की लापरवाही से जमीनों की प्रॉपर्टी आईडी तक को बदल दिया जाता है। इस आईडी के आधार पर एनडीसी तक जारी की जा रही है। वहीं, सर्वे में भी फर्जीवाड़ा कर असल मालिकों के नाम बदले जा रहे हैं। इसके अलावा डिविजन सब डिविजन के नाम पर भी प्रॉपर्टी आईडी जारी करने का खेल चल रहा है। असल मालिक नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट कर थक चुके हैं। वहीं, निगम सदन में भी इस पर पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। जवाब तलब किए तो बताया गया कि अब तक करीब एक हजार फाइलें लंबित रखी गई हैं। जिन पर निगम अधिकारियों को हिदायत जारी की गई कि इनको रविवार तक पूरा किया जाएगा।
केस-1
वार्ड नंबर 26 के सिद्धार्थ नगर की गली नंबर 10 में एक सौ गज का प्लॉट जिसको तीन साल पहले बेच दिया गया था। जो अब दो मंजिला इमारत है। ये एरिया निगम में वैध एरिया में आता है। इस प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी को निगम ने सिद्धार्थ नगर की अवैध एरिया की एक प्रॉपर्टी में शामिल कर दिया, जोकि 200 गज की थी। इसकी अधिकारियों ने मौके पर जाकर तस्दीक करने की रिपोर्ट तक बनाई। अवैध प्रॉपर्टी धारकों ने निगम से एनओसी लेकर अपने प्लॉट की रजिस्ट्री करवा ली। अब असली मालिक को अपनी प्रॉपर्टी आईडी बनवानी थी तो पता चला कि उनकी प्रॉपर्टी आईडी पर कोई और एनओसी लेकर रजिस्ट्री करवा चुका है। इसकी निगम को शिकायत भी की, लेकिन अब तक मामले का समाधान नहीं हो पाया है।
केस-2
वार्ड नंबर-4 स्थित रमेश नगर में स्कूल वाली जमीन का मालिक नगर निगम रिकार्ड में वह है, जबकि प्रॉपर्टी सर्वे के रिकार्ड में यह जमीन किसी और की है। वहीं शिक्षा विभाग भी इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जता रहा है। पिछले 8 साल से इस जमीन पर अब तक न तो स्कूल बन पाया है और न ही पार्क बनाया जा सका है। वहीं, निगम की ओर से जारी किया गया 23 लाख रुपये का टेंडर भी रुका हुआ है। वार्ड के लोगों का कहना है कि खाली पड़ी इस जमीन को निगम वाले अवैध रुप से किसी और के नाम करने की योजना बना चुके हैं।
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केस-3
जीटी रोड स्थित एक फैक्टरी में अवैध तरीके से प्लाटिंग की गई। इस जमीन की एक ही प्रॉपर्टी आईडी को डिवाइड कर कई प्रॉपर्टी आईडी में तबदील कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि अलग-अलग प्रॉपर्टी आईडी में जमीन को अलग-अलग एरिया में दिखाकर इनकी रजिस्ट्रियां करवा ली गई। इसे लेकर पूर्व जिला पार्षद जोगिंद्र स्वामी प्रदर्शन तक कर चुके हैं।
निगम कर रहा है जांच : डीएमसी
नगर निगम को मिलने वाली हर प्रकार की शिकायत पर जांच करवाई जा रही है। चाहे वह शिकायत प्रॉपर्टी आईडी से संबंधित हो या एनडीसी की हो। हर शिकायत पर संबंधित कागजातों की पूरी जांच होने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
-जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम, पानीपत।
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केस-1
वार्ड नंबर 26 के सिद्धार्थ नगर की गली नंबर 10 में एक सौ गज का प्लॉट जिसको तीन साल पहले बेच दिया गया था। जो अब दो मंजिला इमारत है। ये एरिया निगम में वैध एरिया में आता है। इस प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी को निगम ने सिद्धार्थ नगर की अवैध एरिया की एक प्रॉपर्टी में शामिल कर दिया, जोकि 200 गज की थी। इसकी अधिकारियों ने मौके पर जाकर तस्दीक करने की रिपोर्ट तक बनाई। अवैध प्रॉपर्टी धारकों ने निगम से एनओसी लेकर अपने प्लॉट की रजिस्ट्री करवा ली। अब असली मालिक को अपनी प्रॉपर्टी आईडी बनवानी थी तो पता चला कि उनकी प्रॉपर्टी आईडी पर कोई और एनओसी लेकर रजिस्ट्री करवा चुका है। इसकी निगम को शिकायत भी की, लेकिन अब तक मामले का समाधान नहीं हो पाया है।
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केस-2
वार्ड नंबर-4 स्थित रमेश नगर में स्कूल वाली जमीन का मालिक नगर निगम रिकार्ड में वह है, जबकि प्रॉपर्टी सर्वे के रिकार्ड में यह जमीन किसी और की है। वहीं शिक्षा विभाग भी इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जता रहा है। पिछले 8 साल से इस जमीन पर अब तक न तो स्कूल बन पाया है और न ही पार्क बनाया जा सका है। वहीं, निगम की ओर से जारी किया गया 23 लाख रुपये का टेंडर भी रुका हुआ है। वार्ड के लोगों का कहना है कि खाली पड़ी इस जमीन को निगम वाले अवैध रुप से किसी और के नाम करने की योजना बना चुके हैं।
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केस-3
जीटी रोड स्थित एक फैक्टरी में अवैध तरीके से प्लाटिंग की गई। इस जमीन की एक ही प्रॉपर्टी आईडी को डिवाइड कर कई प्रॉपर्टी आईडी में तबदील कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि अलग-अलग प्रॉपर्टी आईडी में जमीन को अलग-अलग एरिया में दिखाकर इनकी रजिस्ट्रियां करवा ली गई। इसे लेकर पूर्व जिला पार्षद जोगिंद्र स्वामी प्रदर्शन तक कर चुके हैं।
निगम कर रहा है जांच : डीएमसी
नगर निगम को मिलने वाली हर प्रकार की शिकायत पर जांच करवाई जा रही है। चाहे वह शिकायत प्रॉपर्टी आईडी से संबंधित हो या एनडीसी की हो। हर शिकायत पर संबंधित कागजातों की पूरी जांच होने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
-जितेंद्र कुमार, डीएमसी, नगर निगम, पानीपत।