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टावर पर चढ़ा किसान, टिकैट और चढ़ूनी के समझाने पर उतरा
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समालखा। समालखा अनाज मंडी में टावर पर चढ़ा हुआ किसान।
- फोटो : Panipat
समालखा (पानीपत) करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज का आदेश देने वाले एसडीएम को सस्पेंड कराने की मांग लेकर शुक्रवार को एक किसान हाईमास्ट लाइट के टावर पर चढ़ गया। साढ़े छह घंटे तक टावर पर चढ़े रहने के बाद राकेश टिकैट और गुरनाम सिंह चढ़ूनी के समझाने पर वह टावर से उतरा। उसने मृतक किसान सुशील काजल के आश्रित को सरकारी नौकरी, परिवार को आर्थिक सहायता और कृषि कानूनी को रद्द करने की मांगें भी रखीं।
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे नई अनाज मंडी में लगी हाईमास्ट लाइट के टावर पर किसान और आढ़ती जोगिंद्र चढ़ गया। इसकी सूचना मिलते ही एसडीएम विजेंद्र हुड्डा, डीएसपी पानीपत संदीप कुमार, थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार, चौकी इंचार्ज हरिराम मौके पर भी पहुंच गए। उसके परिजन भी आ गए। सभी ने उससे नीचे आने की मिन्नतें कीं, लेकिन करीब साढ़े छह घंटे तक वह टावर पर ही चढ़ा रहा। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान सोनू मालपुर को हाइड्रोलिक्स के जरिए किसान जोगिंद्र तक भेजा गया। उसकी राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी से बात कराई गई, जिसके बाद वह खुद टावर से उतरा।
नीचे खड़े लोगों को दी चेतावनी, जबरदस्ती की तो कूद जाउंगा
नई अनाज मंडी में आढ़तीजयपाल छौक्कर का बेटा 60 फुट ऊंचे टावर पर चढ़ा था। किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाता रहा। इस दौरान उसने नीचे खड़े लोगों को चेतावनी दी कि अगर किसी ने ऊपर आकर जबरदस्ती की तो कूद जाएगा। सबसे पहले गांव चुलकाना के अनिल छौक्कर ने उसे मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान सुरेंद्र उर्फ सोनू शहरमालपुर ने टिकैट और चढ़ूनी से बात कराने के बाद उसे उतरा। इसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली और मेडिकल करवाने के लिए अपने साथ ले गई।
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- फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस थी तैयार
किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड मौके पर तैयार थी। पुलिस कर्मी और खुफिया विभाग के कर्मी भी पल-पल की जानकारी अपने आला अधिकारियों को दे रहे थे।
पिता, माता और भाई ने लगाई गुहार, सबको किया इनकार
टावर पर जोगिंद्र के चढ़ने के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया। उन्होंने टावर के पास पहुंचकर जोगिंद्र को नीचे उतरने के लिए गुहार लगाई। लेकिन उसने अपने माता-पिता को यह कहकर वापस भेज दिया कि वह किसानों के लिए टावर पर चढ़ा है। यहां तक कि प्रशासन ने उसकी बहन को भी कॉल कर बुलाया था।
- मानसिक बीमार नहीं हूं, किसानों के हक में उठाया कदम
जोगिंद्र ने नीचे उतरने के बाद कहा कि उसे मानसिक बीमार कहने वाले गलत कह रहे हैं। वह बीमार नहीं है, बल्कि किसानों के हक के लिए यह कदम उठाया। उसने कहा कि गीता में कहा गया है कि कर्म करते रहने चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। ये शरीर नश्वर है, अगर उसे कुछ हो भी जाता तो वह फिर से जन्म लेकर किसानों की आवाज को उठाता।
- टावर में चढ़ने से पहले मीडिया से प्रशासन तक किए थे कॉल
बताया जा रहा है कि टावर पर चढ़ने से पहले जोगिंद्र मीडिया से लेकर प्रशासन और स्थानीय नेताओं को इसकी जानकारी दी, लेकिन जब तक सब वहां पहुंचे, वह टावर पर चढ़ चुका था।
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शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे नई अनाज मंडी में लगी हाईमास्ट लाइट के टावर पर किसान और आढ़ती जोगिंद्र चढ़ गया। इसकी सूचना मिलते ही एसडीएम विजेंद्र हुड्डा, डीएसपी पानीपत संदीप कुमार, थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार, चौकी इंचार्ज हरिराम मौके पर भी पहुंच गए। उसके परिजन भी आ गए। सभी ने उससे नीचे आने की मिन्नतें कीं, लेकिन करीब साढ़े छह घंटे तक वह टावर पर ही चढ़ा रहा। भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान सोनू मालपुर को हाइड्रोलिक्स के जरिए किसान जोगिंद्र तक भेजा गया। उसकी राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी से बात कराई गई, जिसके बाद वह खुद टावर से उतरा।
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नीचे खड़े लोगों को दी चेतावनी, जबरदस्ती की तो कूद जाउंगा
नई अनाज मंडी में आढ़तीजयपाल छौक्कर का बेटा 60 फुट ऊंचे टावर पर चढ़ा था। किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाता रहा। इस दौरान उसने नीचे खड़े लोगों को चेतावनी दी कि अगर किसी ने ऊपर आकर जबरदस्ती की तो कूद जाएगा। सबसे पहले गांव चुलकाना के अनिल छौक्कर ने उसे मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान सुरेंद्र उर्फ सोनू शहरमालपुर ने टिकैट और चढ़ूनी से बात कराने के बाद उसे उतरा। इसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली और मेडिकल करवाने के लिए अपने साथ ले गई।
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- फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस थी तैयार
किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड मौके पर तैयार थी। पुलिस कर्मी और खुफिया विभाग के कर्मी भी पल-पल की जानकारी अपने आला अधिकारियों को दे रहे थे।
पिता, माता और भाई ने लगाई गुहार, सबको किया इनकार
टावर पर जोगिंद्र के चढ़ने के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया। उन्होंने टावर के पास पहुंचकर जोगिंद्र को नीचे उतरने के लिए गुहार लगाई। लेकिन उसने अपने माता-पिता को यह कहकर वापस भेज दिया कि वह किसानों के लिए टावर पर चढ़ा है। यहां तक कि प्रशासन ने उसकी बहन को भी कॉल कर बुलाया था।
- मानसिक बीमार नहीं हूं, किसानों के हक में उठाया कदम
जोगिंद्र ने नीचे उतरने के बाद कहा कि उसे मानसिक बीमार कहने वाले गलत कह रहे हैं। वह बीमार नहीं है, बल्कि किसानों के हक के लिए यह कदम उठाया। उसने कहा कि गीता में कहा गया है कि कर्म करते रहने चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। ये शरीर नश्वर है, अगर उसे कुछ हो भी जाता तो वह फिर से जन्म लेकर किसानों की आवाज को उठाता।
- टावर में चढ़ने से पहले मीडिया से प्रशासन तक किए थे कॉल
बताया जा रहा है कि टावर पर चढ़ने से पहले जोगिंद्र मीडिया से लेकर प्रशासन और स्थानीय नेताओं को इसकी जानकारी दी, लेकिन जब तक सब वहां पहुंचे, वह टावर पर चढ़ चुका था।

समालखा। समालखा अनाज मंडी में टावर पर चढ़े किसान को क्रेन से उतारते हुए।- फोटो : Panipat

समालखा। समालखा अनाज मंडी में टावर पर चढ़े किसान को क्रेन से उतारते हुए।- फोटो : Panipat