{"_id":"6a1362e7eba1f997ad023507","slug":"the-commission-said-that-the-accident-claim-was-withheld-due-to-the-absence-of-a-post-mortem-examination-and-that-rs-530-lakh-would-have-to-be-paid-panipat-news-c-244-1-pnp1012-157778-2026-05-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: पोस्टमार्टम नहीं होने पर दुर्घटना क्लेम रोका गलत, आयोग ने कहा-5.30 लाख रुपये देने होंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: पोस्टमार्टम नहीं होने पर दुर्घटना क्लेम रोका गलत, आयोग ने कहा-5.30 लाख रुपये देने होंगे
विज्ञापन
पानीपत। करंट लगने से मृत्यु होने पर बीमा कंपनी ने बिना पोस्टमार्टम दुर्घटना क्लेम देने से इन्कार दिया। जिला उपभोक्ता आयोग ने इस पर सख्त नाराजगी जाहिर की। आयोग ने कहा कि जब कंपनी व्यक्ति को मृत मानकर मूल बीमा राशि का भुगतान कर चुकी है, तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट न होने पर दुर्घटना क्लेम न देना उचित नहीं है। आयोग ने बीमा कंपनी को 5.30 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश दिए हैं। खास बात यह है कि पति की मृत्यु होने के लिए महिला ने क्लेम के लिए 10 साल लंबी लड़ाई लड़ी।
पानीपत के एक गांव निवासी महिला नीलम ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उनके पति राजेश ने कोटेक महिंद्रा बीमा कंपनी से पॉलिसी ली थी जिसमें मूल बीमा राशि के साथ दुर्घटना मृत्यु लाभ भी शामिल था। 12 अगस्त 2016 को उनके पति की घर में इन्वर्टर से करंट लग गया था जिससे उनकी मौत हो गई थी। बीमा कंपनी ने जहां मूल बीमा राशि का भुगतान कर दिया, वहीं दुर्घटना लाभ देने से इन्कार कर दिया। कंपनी का तर्क था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, इसलिए क्लेम स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि राजेश की मौत करंट से हुई थी, जिसका प्रमाण मेडिकल रिकॉर्ड और गवाहों से स्पष्ट है। आयोग ने यह भी माना कि जब कंपनी स्वयं मृत्यु को स्वीकार कर मूल क्लेम दे चुकी है, तो दुर्घटना लाभ रोकना उचित नहीं है।
विज्ञापन
आयोग ने कहा- हर मामले में पोस्टमार्टम जरूरी नहीं
सुनवाई के दौरान आयोग ने स्पष्ट किया कि मृत्यु के पर्याप्त साक्ष्य होने पर कंपनी को क्लेम का भुगतान कर देना चाहिए था। हर मामले में पोस्टमार्टम अनिवार्य नहीं है। आदेश में बीमा कंपनी को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़ित परिवार को 5.30 लाख रुपये दुर्घटना लाभ नौ प्रतिशत ब्याज के साथ दिया जाए साथ ही 11 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और 5500 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में दिए जाएं।
विज्ञापन
पानीपत के एक गांव निवासी महिला नीलम ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उनके पति राजेश ने कोटेक महिंद्रा बीमा कंपनी से पॉलिसी ली थी जिसमें मूल बीमा राशि के साथ दुर्घटना मृत्यु लाभ भी शामिल था। 12 अगस्त 2016 को उनके पति की घर में इन्वर्टर से करंट लग गया था जिससे उनकी मौत हो गई थी। बीमा कंपनी ने जहां मूल बीमा राशि का भुगतान कर दिया, वहीं दुर्घटना लाभ देने से इन्कार कर दिया। कंपनी का तर्क था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कुछ जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, इसलिए क्लेम स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि राजेश की मौत करंट से हुई थी, जिसका प्रमाण मेडिकल रिकॉर्ड और गवाहों से स्पष्ट है। आयोग ने यह भी माना कि जब कंपनी स्वयं मृत्यु को स्वीकार कर मूल क्लेम दे चुकी है, तो दुर्घटना लाभ रोकना उचित नहीं है।
विज्ञापन
आयोग ने कहा- हर मामले में पोस्टमार्टम जरूरी नहीं
सुनवाई के दौरान आयोग ने स्पष्ट किया कि मृत्यु के पर्याप्त साक्ष्य होने पर कंपनी को क्लेम का भुगतान कर देना चाहिए था। हर मामले में पोस्टमार्टम अनिवार्य नहीं है। आदेश में बीमा कंपनी को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़ित परिवार को 5.30 लाख रुपये दुर्घटना लाभ नौ प्रतिशत ब्याज के साथ दिया जाए साथ ही 11 हजार रुपये मानसिक पीड़ा और 5500 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में दिए जाएं।