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Panipat News: सांग में हंस-हंसिनी की व्यथा सुन भावक हुए दर्शक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Mar 2025 02:06 AM IST
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The audience became emotional after listening to the pain of the swan and the swan in the song
पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में तीन दिवसीय सांग महोत्सव का शनिवार को दूसरा दिन रहा। रामशरण एंड पार्टी ने खंडेराव परी सांग की ह्रदय स्पर्शी प्रस्तुति देकर सभी को अभिभूत किया। इस दौरान हंस-हंसिनी की व्यथा सुनकर दर्शक भावुक हो उठे।
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सांग उत्सव में खांडेराव परी सांग का मंचन किया गया। इसका निर्देशन राम शरण ने किया। मांगे राम द्वारा लिखे गए इस सांग की कहानी के अनुसार मानसरोवर ताल में परमहंस रहते थे। जब एक महीना बाकी था तो हंस राजा का धन्यवाद करके वापस अपने वतन के लिए चल पड़ते हैं। हंस राजा वीर विक्रमाजीत की तारीफ करते हुए यह कहते हुए जा रहे थे कि राजा वीर विक्रमाजीत बिसवै बीस। रास्ते में इंद्र महाराज इस बात से नाराज होकर क्रोध में हंसों की एक हंसिनी छीन लेता है और कहता है कि अगर उनका राजा बिसवै बीस है तो वह उनकी हंसणी छुड़वाकर खुद ले जाएगा। हंस रोते-पीटते वापस उज्जैन नगरी में राजा वीर विक्रमाजीत के पास आते हैं और सारा हाल सुनाते हैं।
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राजा वीर विक्रमाजीत हंसिनी को छुड़वाने के लिए चल पड़ता है। एक भठियारी की सराय में रुकता है। वहां के राजा शामधाम की बेटी के पेट में सांप था और वह एक किले के कमरे में बंद रहती थी। आधी रात के समय रतन कौर के पेट से सांप निकलता था और उस आदमी को खा जाता था। भठियारी का एक ही लड़का था परंतु अब उसको भी किले की भेंट में जाना था। राजा वीर विक्रमाजीत रोती-पिटती भठियारी से सारा हाल जानता है और उसके बेटे की जान के बदले खुद भेंट में चला जाता है और सांप को मार देता है। राजा शामधाम खुश होकर अपनी बेटी की शादी वीर विक्रमाजीत के साथ कर देता है और विक्रमाजीत वहीं रहने लग जाता है। वीर विक्रमाजीत एक दिन शहर में घूमते हुए खांडेराव परी को देख लेता है और अपने ससुर व रतन कौर से कहकर खांडेराव परी से शादी करने की बात कहता है। खांडेराव परी कुछ शर्त रखती है और शादी कर लेती है। इंद्र महाराज को वचनों में लेकर खांडेराव परी व हंसणी को छुड़वा लेता है।
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महोत्सव में मुख्यातिथि शिक्षा मंत्री के बड़े भाई हरपाल ढांडा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजेश गोयल और गोसेवा प्रमुख महेंद्र कंसल रहे। विशिष्ट मेहमानों में समाजसेवी धर्मवीर, करनाल से समाजसेवी राजेश सिंगला, पूर्व मंत्री बिजेंद्र कादियान रहे। मंच संचालन दीपक शर्मा ने किया । इस दौरान हरपाल ढांडा ने कहा कि सांग एक लोक नाट्य और नृत्य-संगीत का रूप है जिसमें अभिनय, गीत, संगीत और नृत्य का समावेश होता है। सांग केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि यह सामाजिक मुद्दों, धार्मिक कथाओं और लोक कथाओं को भी उजागर करता है। इस अवसर पर सुरेश शर्मा, जसमेर गौतम, कंवरभान शर्मा, नरेंद्र गर्ग, उम्मेद कवि, दिनेश जून, रामलाल भाटिया व कुलदीप रोहिल्ला मौजूद रहे ।
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