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Panipat News: अंगूली पकड़कर चलना सिखाया, आज वहीं हाथ छुड़ा चले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jul 2023 02:23 AM IST
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Taught you to walk by holding your finger, today let go of your hand
पानीपत। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नई पीढ़ी इतनी संवेदनहीन हो गई है कि अंगुली पकड़कर चलना सिखाने वालों का ही साथ छोड़ने लगी है। सिर्फ दौलत पाने की चाह में कब खून के रिश्ते तक भूल जाते हैं, इसका अंदाजा ही नहीं लगता। ऐसे ही दो मामले सोमवार को सामान्य अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड और बाहर देखने को मिले।
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इन असहाय बुजुर्गों का दर्द उनके आंसुओं में छलक आया। अपनों का साथ छूटने पर असहाय बुजुर्ग हर अंजान चेहरे को मदद की आस से देखने लगते। कोई रोने की वजह पूछता, तो सब्र का बांध टूट जाता। मानो चेहरे के भावों से ही उनके दिल के दर्द का अहसास होने लगता।
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अधरंग से हाथ-पांव ने काम छोड़ा, बेटों ने कॉल तक नहीं उठाई
अधरंग होने की वजह से करनाल के स्टोंडी निवासी राजेंद्र के दाहिने हाथ और पैर ने काम करना बंद कर दिया। किसी तरह जानकारों की मदद से इलाज के लिए सामान्य अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों ने चेकअप कर दवा भी दी और घर जाने के लिए कह दिया। खुद उठ तक नहीं पाया तो दोपहर 12 बजे स्वास्थ्यकर्मियों ने एमरजेंसी के बाहर लाकर एक स्ट्रेचर पर बैठा दिया। जेब में एक पर्ची पर दो बेटों के नंबर थे। जिनमें बड़ा बेटा खेती बाड़ी करता है, जबकि छोटा बेटा एक फैक्ट्री में काम करता है। हर आते-जाते व्यक्ति से आंसू बहाता राजेंद्र ने बेटों को फोन मिलाने के लिए कहता, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने पर हर कोई उसे किसी दूसरे से मदद मांगने की बात कहकर आगे बढ़ जाता। दो घंटे तक आंसू बहाता और हाय-हाय करता राजेंद्र बेसुध हो गया। दिन ढलने पर एमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर खाली था। अब राजेंद्र किसके साथ गया किसी को कुछ नहीं पता।
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घर बाहर निकालने पर भूखे-प्यास से सूख गई शरीर की नसें
भगवान नाम का व्यक्ति सिविल अस्पताल के सामान्य वार्ड में भर्ती है। वजह सुनकर शायद आप भी चौक जाओगे क्योंकि उसे कई महीनों पहले बेटी और दामाद ने घर से निकाल दिया था। लोगों ने सड़क पर लावारिस पड़ा देखा तो जनसेवा दल को सूचित किया। महासचिव चमन लाल गुलाटी उसे आशियाने ले आए। यहां कई दिनों तक भगवान ना उठ-बैठ सका और न ही कुछ खा-पी पाया। सामान्य अस्पताल में उसकी जांच कराई तो पता चला कि भूखे प्यासे रहने के कारण शरीर की नसें सूख चुकी हैं। रीढ़ की हड्डी में आई अकड़ाहट के कारण रिकवरी में कई महीने लगेंगे। याददाश्त इतनी कमजोर हो चुकी है कि कृष्णा गार्डन के पीछे घर होने तक की बता पा रहा है। वह परिवार के बारे में कुछ नहीं बता पा रहा। भगवान ने बताया कि उसको बेटी-दामाद ने घर से निकाल दिया है।
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