{"_id":"6a23311634934945480ae75f","slug":"supreme-court-gives-relief-to-husband-in-dowry-harassment-case-panipat-news-c-18-1-knl1004-921790-2026-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: दहेज उत्पीड़न के मामले में पति को सुप्रीम राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: दहेज उत्पीड़न के मामले में पति को सुप्रीम राहत
Sat, 06 Jun 2026 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 06 Jun 2026 01:57 AM IST
विज्ञापन
एजेंसी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और क्रूरता से जुड़े एक मामले में आरोपी पति को अंतरिम राहत देते हुए उसके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत ने हरियाणा की ट्रायल कोर्ट की ओर से जमानत रद्द किए जाने और उस आदेश को बरकरार रखने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस भी जारी किया है। जस्टिस संजय करोल व जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने दीपक भारद्वाज की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाए। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि वह विशेष परिस्थितियों को छोड़कर ट्रायल कोर्ट में हर निर्धारित तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होगा। मामला दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोपों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही से संबंधित है। सुनवाई के दौरान आरोपी पति को जमानत मिली हुई थी, लेकिन पानीपत की ट्रायल कोर्ट ने लगातार अनुपस्थिति के आधार पर उसकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद उसके खिलाफ वारंट जारी करने और जमानत बांड जब्त करने जैसी कार्रवाई भी शुरू की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इस आदेश में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता के वकील उज्ज्वल घई ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि जमानत रद्द करने से पहले उनके मुवक्किल को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना सीधे जमानत रद्द कर दी और अन्य कार्रवाई शुरू कर दी।
विज्ञापन
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और क्रूरता से जुड़े एक मामले में आरोपी पति को अंतरिम राहत देते हुए उसके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत ने हरियाणा की ट्रायल कोर्ट की ओर से जमानत रद्द किए जाने और उस आदेश को बरकरार रखने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस भी जारी किया है। जस्टिस संजय करोल व जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने दीपक भारद्वाज की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाए। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि वह विशेष परिस्थितियों को छोड़कर ट्रायल कोर्ट में हर निर्धारित तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होगा। मामला दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोपों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही से संबंधित है। सुनवाई के दौरान आरोपी पति को जमानत मिली हुई थी, लेकिन पानीपत की ट्रायल कोर्ट ने लगातार अनुपस्थिति के आधार पर उसकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद उसके खिलाफ वारंट जारी करने और जमानत बांड जब्त करने जैसी कार्रवाई भी शुरू की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इस आदेश में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए उसे ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता के वकील उज्ज्वल घई ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि जमानत रद्द करने से पहले उनके मुवक्किल को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना सीधे जमानत रद्द कर दी और अन्य कार्रवाई शुरू कर दी।
विज्ञापन