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सुपर थर्मल पावर स्टेशन दे सकता है कभी भी झटका
अमर उजाला, पानीपत
Updated Wed, 18 Dec 2013 12:11 AM IST
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पानीपत सुपर पावर थर्मल कोहरे के कारण कभी भी झटका दे सकती है। कारण यूनिटों को चलाने के लिए भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) से 200 केवी की लाइन पर धूल जमने से कोहरे के सीजन में फाल्ट का खतरा बढ़ गया है।
नियमानुसार कोहरा शुरू होने से पहले टावर लाइनों, इंसुलेटर और डिस्क की सफाई का काम पूरा हो जाना चाहिए। सफाई के अभाव में फाल्ट आने पर हरियाणा के कई इलाकाें अंधेरे में डूब सकते हैं।
सिवाह, पानीपत स्थित बीबीएमबी से सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 1367.8 मेगावाट क्षमता की यूनिटाें को चलाने के लिए 220 केवी बिजली की सप्लाई मिलती है। यह सप्लाई टावर लाइनाें के माध्यम से करीब 13 किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर थर्मल तक पहुंचती है। टावर लाइन खेतों के रास्ते से गुजरती हैं। कृषि कार्य निपटाने के दौरान मिट्टी उड़ने से इन पर धूल जमती रहती है।
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वर्षा ऋतु में बारिश के पानी से टावर लाइनाें पर लगे इंसुलेटर और डिस्क की सफाई हो जाती है मगर सर्दी के सीजन में बारिश नहीं होने के कारण टावर लाइनाें के इंसुलेटर और डिस्क पर धूूल जमती जाती है।
सर्दी के मौसम में टावर लाइनों, डिस्क और इंसुलेटरों में जमी धूल पर धुंध और कोहरा गिरने से मिट्टी की परत बन जाती है। यही परत बिजली सप्लाई को बाधित कर देती है, जिससे फॉल्ट आकर लाइन ट्रिप हो जाती है और थर्मल में उत्पादन बंद हो जाता है।
थर्मल के बंद होने पर दोबारा उत्पादन पटरी पर आने में करीब छह से सात घंटे का समय लग जाता है। एक बार ट्रिपिंग होने से एक से डेढ़ करोड़ का जेनरेशन लॉस होता है। वर्ष 2009 में कोहरे के सीजन में चार बार, 2010 में तीन, 2011 में भी तीन और 2012 में चार बार इसी फॉल्ट के चलते थर्मल की यूनिट ट्रिप होकर बंद हो गई थी।
इससे बिजली उत्पादन बंद होेने से हरियाणा के कई हिस्से अंधेरे में डूब गए थे। सोमवार 16 दिसंबर को भी ट्रिपिंग से यूनिट-छह में उत्पादन बंद हो गया था।
धूल को साफ करने की जिम्मेदारी हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम पर होती है। पहले यह काम मैनुअल होता था मगर आजकल हेलीकॉप्टर की मदद से इस काम को निपटाया जाता है। लेकिन इस सीजन में अभी तक यह काम शुरू नहीं हो पाया है।
वर्जन
बीबीएमबी से लेकर थर्मल तक जाने वाली टावर लाइनाें की सफाई के लिए पिछले दिनों एचवीपीएन के मुख्यालय पंचकूला के पास प्रस्ताव भेजा है मगर अभी तक सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया।
एनके गोयल, अधीक्षण अभियंता, बीबीएमबी
वर्जन
कोहरे में फाल्ट से बचाने के लिए थर्मल परिसर में टावर लाइन, इंसुलेटराें और डिस्क की सफाई का काम पूरा कर लिया है। बीबीएमबी से लेकर थर्मल तक की सफाई की जिम्मेदारी एचवीपीएन की है। इस बारे में एचवीपीएन को लिखा है। उन्हाेंने सफाई का काम हेलीकॉप्टर से पूरा करना था। हेलीकॉप्टर के लिए थर्मल प्रशासन से स्पेस भी मांगा था जो तैयार कर रखा है। लेकिन उसके बाद उन्हाेंने कोई संपर्क नहीं किया। सफाई के अभाव में फाल्ट आने से यूनिट ट्रिपिंग का खतरा रहता है।
एसएस दलाल, चीफ इंजीनियर थर्मल ऑपरेशन-टू
वर्जन
टावर लाइनाें, इंसुलेटराें और डिस्क की साफ सफाई के काम के टेंडर किए जा चुके हैं। एकाध दिन में सफाई का काम शुरू करा दिया जाएगा। यह कार्य पूरे हरियाणा में चलेगा।
चीफ इंजीनियर कार्यालय, एचवीपीएन, पंचकूला
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नियमानुसार कोहरा शुरू होने से पहले टावर लाइनों, इंसुलेटर और डिस्क की सफाई का काम पूरा हो जाना चाहिए। सफाई के अभाव में फाल्ट आने पर हरियाणा के कई इलाकाें अंधेरे में डूब सकते हैं।
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सिवाह, पानीपत स्थित बीबीएमबी से सुपर थर्मल पावर स्टेशन की 1367.8 मेगावाट क्षमता की यूनिटाें को चलाने के लिए 220 केवी बिजली की सप्लाई मिलती है। यह सप्लाई टावर लाइनाें के माध्यम से करीब 13 किलोमीटर लंबा रास्ता तय कर थर्मल तक पहुंचती है। टावर लाइन खेतों के रास्ते से गुजरती हैं। कृषि कार्य निपटाने के दौरान मिट्टी उड़ने से इन पर धूल जमती रहती है।
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वर्षा ऋतु में बारिश के पानी से टावर लाइनाें पर लगे इंसुलेटर और डिस्क की सफाई हो जाती है मगर सर्दी के सीजन में बारिश नहीं होने के कारण टावर लाइनाें के इंसुलेटर और डिस्क पर धूूल जमती जाती है।
सर्दी के मौसम में टावर लाइनों, डिस्क और इंसुलेटरों में जमी धूल पर धुंध और कोहरा गिरने से मिट्टी की परत बन जाती है। यही परत बिजली सप्लाई को बाधित कर देती है, जिससे फॉल्ट आकर लाइन ट्रिप हो जाती है और थर्मल में उत्पादन बंद हो जाता है।
थर्मल के बंद होने पर दोबारा उत्पादन पटरी पर आने में करीब छह से सात घंटे का समय लग जाता है। एक बार ट्रिपिंग होने से एक से डेढ़ करोड़ का जेनरेशन लॉस होता है। वर्ष 2009 में कोहरे के सीजन में चार बार, 2010 में तीन, 2011 में भी तीन और 2012 में चार बार इसी फॉल्ट के चलते थर्मल की यूनिट ट्रिप होकर बंद हो गई थी।
इससे बिजली उत्पादन बंद होेने से हरियाणा के कई हिस्से अंधेरे में डूब गए थे। सोमवार 16 दिसंबर को भी ट्रिपिंग से यूनिट-छह में उत्पादन बंद हो गया था।
धूल को साफ करने की जिम्मेदारी हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम पर होती है। पहले यह काम मैनुअल होता था मगर आजकल हेलीकॉप्टर की मदद से इस काम को निपटाया जाता है। लेकिन इस सीजन में अभी तक यह काम शुरू नहीं हो पाया है।
वर्जन
बीबीएमबी से लेकर थर्मल तक जाने वाली टावर लाइनाें की सफाई के लिए पिछले दिनों एचवीपीएन के मुख्यालय पंचकूला के पास प्रस्ताव भेजा है मगर अभी तक सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया।
एनके गोयल, अधीक्षण अभियंता, बीबीएमबी
वर्जन
कोहरे में फाल्ट से बचाने के लिए थर्मल परिसर में टावर लाइन, इंसुलेटराें और डिस्क की सफाई का काम पूरा कर लिया है। बीबीएमबी से लेकर थर्मल तक की सफाई की जिम्मेदारी एचवीपीएन की है। इस बारे में एचवीपीएन को लिखा है। उन्हाेंने सफाई का काम हेलीकॉप्टर से पूरा करना था। हेलीकॉप्टर के लिए थर्मल प्रशासन से स्पेस भी मांगा था जो तैयार कर रखा है। लेकिन उसके बाद उन्हाेंने कोई संपर्क नहीं किया। सफाई के अभाव में फाल्ट आने से यूनिट ट्रिपिंग का खतरा रहता है।
एसएस दलाल, चीफ इंजीनियर थर्मल ऑपरेशन-टू
वर्जन
टावर लाइनाें, इंसुलेटराें और डिस्क की साफ सफाई के काम के टेंडर किए जा चुके हैं। एकाध दिन में सफाई का काम शुरू करा दिया जाएगा। यह कार्य पूरे हरियाणा में चलेगा।
चीफ इंजीनियर कार्यालय, एचवीपीएन, पंचकूला