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खामियों से भरी सब डिविजन पॉलिसी लोगों के लिए बनी मुसीबत
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पानीपत। सरकार ने भले ही अवैध भूखंडों को विनियमित करने और नए भूखंडों को विभाजित करने के लिए अपने गजट में छह माह के लिए सब डिवीजन पॉलिसी लागू कर दी हो, लेकिन धरातल पर इसका कोई अता पता नहीं है। निगम अधिकारियों के पास भी अब तक पॉलिसी से संबंधित कोई जानकारी नहीं है कि इस पॉलिसी के तहत आवेदन कैसे करना होगा, किस पोर्टल पर करना होगा, इसकी निर्धारित फीस क्या रहेगी, आवेदन करने वाले लोग नक्शा पहले पास करवाएंगे या बाद में, जिसने पहले ही भूखंड का निर्माण कर लिया हो वह पार्किंग और सेटबैक की जगह कैसे छोड़ेगा इत्यादि। यहां तक कि अब तक पॉलिसी के तहत आवेदन करने वाले फार्म नंबर ए और बी भी उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
शहरवासियों के सामने अब चुनौती यह है कि सरकार ने पॉलिसी तो लागू कर दी। इसके लिए समय भी कम दिया है और अब यह समय बिना जानकारी के यूं ही बीतता जा रहा है। इंतजार की इन घड़ियों में सोमवार से लेकर अब तक एनडीसी पोर्टल भी दो बार बंद होकर अपडेट हो चुका है, लेकिन इस पोर्टल पर भी अब तक सब डिवीजन पॉलिसी की कोई जानकारी नहीं है। यह पॉलिसी अब शहर के लोगों के साथ निगम अधिकारियों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। पॉलिसी की जानकारी लेने वाले लोग दिनभर निगम के चक्कर काटकर अधिकारियों से जवाब-तलब करना चाहते हैं, लेकिन अधिकारियों के पास लोगों के सवालों के जवाब नहीं हैं।
अधिवक्ता एवं डीड राइटर विकास कुमार और योगेश वर्मा ने बताया कि पॉलिसी 22 जुलाई को लागू की गई थी। इसमें आवेदन के लिए फार्म ए और बी का जिक्र किया गया था। ये फार्म अब तक न निगम के पास हैं और न किसी पोर्टल पर। फार्म भरने के बाद इसे किस पोर्टल पर अपलोड करना है, मैन्युअल फाइल निगम को जमा करवानी है, इसकी भी जानकारी किसी के पास नहीं है। बड़ी समस्या यह है कि पॉलिसी के अनुसार अवैध भूखंड यानी जिन्होंने पहले से ही अपने भूखंड कर इमारत बना ली है, वे अपने भवनों में से पार्किंग और प्लाट के आगे-पीछे की जगह पर सेटबैक की जगह कैसे छोड़ेंगे। दूसरी बात यह है कि पॉलिसी के अनुसार कम से कम 100 गज का विभाजन हो सकता है। अब 100 गज में लोग पार्किंग और आगे सेटबैक के लिए जगह छोड़ देंगे तो उनके पास कितनी जगह बचेगी। विभाजन के लिए सरकार की ओर से लाइसेंस फीस का जिक्र किया गया है। यह फीस कितनी है, कहां जमा करवानी है, इसका भी पता नहीं है। अब तक यह भी साफ नहीं हो पाया है कि भूखंड के लिए नक्शा पहले आवेदन करना होगा या बाद में। अगर किसी ने पहले मकान बनाया है तो नक्शा कैसे आवेदन से पहले देगा या बाद में। अब पॉलिसी लागू हुए दो सप्ताह बीत चुके हैं। समय कम है। अब तक जानकारी भी न होना शहरवासियों को परेेशान कर सकता है।
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वर्जन-
जैसे ही जानकारी मिलेगी सार्वजनिक करेंगे : एएमसी
अब तक पॉलिसी संबंधित सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। जैसे ही जानकारी मिलेगी, इसे जनता के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा। पॉलिसी का लाभ लोगों को ज्यादा से ज्यादा मिले, इसका प्रयास किया जाएगा।
- नरेंद्र पाल मलिक, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम।
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शहरवासियों के सामने अब चुनौती यह है कि सरकार ने पॉलिसी तो लागू कर दी। इसके लिए समय भी कम दिया है और अब यह समय बिना जानकारी के यूं ही बीतता जा रहा है। इंतजार की इन घड़ियों में सोमवार से लेकर अब तक एनडीसी पोर्टल भी दो बार बंद होकर अपडेट हो चुका है, लेकिन इस पोर्टल पर भी अब तक सब डिवीजन पॉलिसी की कोई जानकारी नहीं है। यह पॉलिसी अब शहर के लोगों के साथ निगम अधिकारियों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। पॉलिसी की जानकारी लेने वाले लोग दिनभर निगम के चक्कर काटकर अधिकारियों से जवाब-तलब करना चाहते हैं, लेकिन अधिकारियों के पास लोगों के सवालों के जवाब नहीं हैं।
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अधिवक्ता एवं डीड राइटर विकास कुमार और योगेश वर्मा ने बताया कि पॉलिसी 22 जुलाई को लागू की गई थी। इसमें आवेदन के लिए फार्म ए और बी का जिक्र किया गया था। ये फार्म अब तक न निगम के पास हैं और न किसी पोर्टल पर। फार्म भरने के बाद इसे किस पोर्टल पर अपलोड करना है, मैन्युअल फाइल निगम को जमा करवानी है, इसकी भी जानकारी किसी के पास नहीं है। बड़ी समस्या यह है कि पॉलिसी के अनुसार अवैध भूखंड यानी जिन्होंने पहले से ही अपने भूखंड कर इमारत बना ली है, वे अपने भवनों में से पार्किंग और प्लाट के आगे-पीछे की जगह पर सेटबैक की जगह कैसे छोड़ेंगे। दूसरी बात यह है कि पॉलिसी के अनुसार कम से कम 100 गज का विभाजन हो सकता है। अब 100 गज में लोग पार्किंग और आगे सेटबैक के लिए जगह छोड़ देंगे तो उनके पास कितनी जगह बचेगी। विभाजन के लिए सरकार की ओर से लाइसेंस फीस का जिक्र किया गया है। यह फीस कितनी है, कहां जमा करवानी है, इसका भी पता नहीं है। अब तक यह भी साफ नहीं हो पाया है कि भूखंड के लिए नक्शा पहले आवेदन करना होगा या बाद में। अगर किसी ने पहले मकान बनाया है तो नक्शा कैसे आवेदन से पहले देगा या बाद में। अब पॉलिसी लागू हुए दो सप्ताह बीत चुके हैं। समय कम है। अब तक जानकारी भी न होना शहरवासियों को परेेशान कर सकता है।
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जैसे ही जानकारी मिलेगी सार्वजनिक करेंगे : एएमसी
अब तक पॉलिसी संबंधित सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। जैसे ही जानकारी मिलेगी, इसे जनता के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा। पॉलिसी का लाभ लोगों को ज्यादा से ज्यादा मिले, इसका प्रयास किया जाएगा।
- नरेंद्र पाल मलिक, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम।