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अब सड़कों से लेकर सचिवालय और सेक्टर तक में हुआ बेसहारा पशुओं का राज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 02:30 AM IST
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Stray animals from roads to mini secretariat cause trouble
शहर में आवारा पशु अब सड़कों से लेकर कॉलोनियों, सेक्टरों व लघु सचिवालय तक पहुंच चुके हैं। कई बार ये आवारा पशु लोगों पर हमला भी कर चुके हैं, लेकिन निगम के कार्य की सुस्त रफ्तार शहरवासियों पर भारी पड़ रही है।
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नगर निगम की ओर से अब तक करीब 500 पशुओं को गोशाला भिजवाया गया, लेकिन अभी शहर में करीब दो से ढाई हजार पशु सड़कों पर हैं, जो शहरवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। निगम की पशुओं को गोशाला में पहुंचाने के काम की गति बेहद ढीली है। रोजाना अधिकतम 10 से 15 पशुओं को ही निगम गोशाला पहुंचाने का काम करता है।
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अगर रोजाना 15 पशुओं को गोशाला पहुंचाया जाए तो एक माह में निगम केवल 450 पशुओं को पहुंचा पाएगा और करीब छह माह में दो हजार के करीब पशुओं को गोशाला में छोड़ पाएगा। तब तक नए पशुओं की तादाद और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। इस हिसाब से निगम का पशु मुक्त अभियान पूरा ही नहीं होगा और शहरवासियों की समस्या बरकरार रहेगी।
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तो गोशाला से भी छोड़े जा रहे पशु!
खास बात ये है कि जिन पशुओं को निगम या आम आदमी गोशाला में भिजवाता है तो इन पशुओं के कानों पर टैग लगा दिए जाते हैं, ताकि ये पहचान रहे कि ये पशु किस गोशाला के हैं और गोशाला में पशुओं की गिनती कितनी है। जबकि अब शहर की सड़कों पर टैग लगे पशु भी घूम रहे हैं। इसका सीधा मतलब ये है कि गोशाला वाले भी इन पशुओं को छोड़ रहे हैं। इस बारे में नगर निगम के सुपरवाइज विक्रम राणा का कहना है कि वे और उनकी पूरी टीम पशुओं को उठाने में दिन रात लगे रहते हैं। अगर सभी पशुओं को जल्द हटाना है तो मैनपॉवर व संसाधन दोनों ही बढ़ाने पड़ेंगे।
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