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नई शुगर मिल में लगेगी प्रदेश की सबसे बड़ी डिस्टलरी
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पानीपत। गांव डाहर स्थित नई शुगर मिल में डिस्टलरी लगाने वाले रुके हुए प्रोजेक्ट को एक बार फिर सरकार से हरी झंडी मिल चुकी है। अब यहां 95 की बजाय 150 करोड़ रुपये से 15 एकड़ में प्रदेश की सबसे बड़ी डिस्टलरी बनाई जाएगी। अत्याधुनिक बॉयलर और मशीनों से लैस इस डिस्टलरी में शराब नहीं बल्कि सिर्फ एथेनॉल का उत्पादन होगा। इसकी क्षमता 90 किलो लीटर प्रति दिन होगी। वहीं, गोहाना रोड स्थित पुरानी शुगर मिल की डिस्टलरी से भी कुछ प्लांट नई डिस्टलरी में शिफ्ट होंगे।
बुधवार को शुगर मिल बोर्ड की बैठक में इस डिस्टलरी की डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट फाइनल की जाएगी। इसके बाद प्रोजेक्ट की डीएनआईटी (डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर) बनाई जाएगी। इसके बाद एक माह के भीतर इस प्रोजेक्ट का टेंडर लगाया जाएगा। जिसके वर्क आर्डर जारी होने के 14 से 16 महीने के बीच डिस्टलरी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले वाले प्रोजेक्ट की डिस्टलरी की क्षमता केवल 45 किलो लीटर प्रति दिन थी, जिसे 95 करोड़ में तैयार किया जाना था। जिसे रोक दिया गया था। गौरतलब है कि देशभर में सरकार 425 डिस्टलरी लगाने जा रही हैं, इनमें प्रदेश में पानीपत की डिस्टलरी सबसे बड़ी होगी जबकि दूसरे नंबर पर शाहबाद की डिस्टलरी होगी।
इनसे बनेगा एथेनॉल, मिलेगा ईंधन में
इस डिस्टलरी में रोजाना 90 किलो लीटर एथेनॉल बनाया जाएगा। जिसमें से 60 किलोलीटर एथेनॉल का उत्पादन शुगर मिल के शीरे से होगा। वहीं, 30 किलोलीटर एथेनॉल का उत्पादन चावल से होगा। इस एथनॉल को पेट्रोल डीजल में मिलाने के लिए मिल से रिफायनरी को बेचेगा। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल ईंधन में इसकी केवल 10 प्रतिशत मात्रा ही मिलाई जाती है लेकिन 2025 तक सरकार का लक्ष्य है कि ईंधन में एथनॉल की 20 से 25 प्रतिशत मात्रा मिलाई जाएगी।
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इन प्लांटों को भी किया जाएगा शिफ्ट
नई डिस्टलरी में पुराने मिल की डिस्टलरी से एमई प्लांट, ग्रेन प्लांट, एथनॉल प्लांट, सीओटू प्लांट समेत डिस्टीलेशन प्लांट को भी शिफ्ट किया जाएगा। एमई प्लांट डिस्टलरी से निकलने वाले वेस्ट पानी को कम करके डिस्पोज ऑफ करेगा। ग्रेन प्लांट में चावल के आटे को ट्रीट करने के बाद प्लांट में भेजकर एथनॉल बनाया जाएगा।
नई डिस्टलरी में देश का सबसे आधुनिक बॉयलर लगाया जाएगा, जिसकी कीमत करीब 20 से 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ये बॉयलर डिस्टलरी के निकासी के गंदे पानी को सूखा कर इससे भांप बनाएगा।
15 एकड़ में बनेगी 150 करोड़ से आधुनिक डिस्टलरी
नए शुगर मिल की 75 एकड़ जमीन में से 15 एकड़ जमीन में 150 करोड़ रुपये से नई डिस्टलरी बनाई जाएगी। इसके एथेनॉल के उत्पादन की क्षमता काफी ज्यादा होगी। जिसे ईंधन में इस्तेेमाल किया जाएगा। -नवदीप सिंह, एमडी, शुगर मिल, पानीपत।
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बुधवार को शुगर मिल बोर्ड की बैठक में इस डिस्टलरी की डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट फाइनल की जाएगी। इसके बाद प्रोजेक्ट की डीएनआईटी (डिटेल्ड नोटिस इनवाइटिंग टेंडर) बनाई जाएगी। इसके बाद एक माह के भीतर इस प्रोजेक्ट का टेंडर लगाया जाएगा। जिसके वर्क आर्डर जारी होने के 14 से 16 महीने के बीच डिस्टलरी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले वाले प्रोजेक्ट की डिस्टलरी की क्षमता केवल 45 किलो लीटर प्रति दिन थी, जिसे 95 करोड़ में तैयार किया जाना था। जिसे रोक दिया गया था। गौरतलब है कि देशभर में सरकार 425 डिस्टलरी लगाने जा रही हैं, इनमें प्रदेश में पानीपत की डिस्टलरी सबसे बड़ी होगी जबकि दूसरे नंबर पर शाहबाद की डिस्टलरी होगी।
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इनसे बनेगा एथेनॉल, मिलेगा ईंधन में
इस डिस्टलरी में रोजाना 90 किलो लीटर एथेनॉल बनाया जाएगा। जिसमें से 60 किलोलीटर एथेनॉल का उत्पादन शुगर मिल के शीरे से होगा। वहीं, 30 किलोलीटर एथेनॉल का उत्पादन चावल से होगा। इस एथनॉल को पेट्रोल डीजल में मिलाने के लिए मिल से रिफायनरी को बेचेगा। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल ईंधन में इसकी केवल 10 प्रतिशत मात्रा ही मिलाई जाती है लेकिन 2025 तक सरकार का लक्ष्य है कि ईंधन में एथनॉल की 20 से 25 प्रतिशत मात्रा मिलाई जाएगी।
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इन प्लांटों को भी किया जाएगा शिफ्ट
नई डिस्टलरी में पुराने मिल की डिस्टलरी से एमई प्लांट, ग्रेन प्लांट, एथनॉल प्लांट, सीओटू प्लांट समेत डिस्टीलेशन प्लांट को भी शिफ्ट किया जाएगा। एमई प्लांट डिस्टलरी से निकलने वाले वेस्ट पानी को कम करके डिस्पोज ऑफ करेगा। ग्रेन प्लांट में चावल के आटे को ट्रीट करने के बाद प्लांट में भेजकर एथनॉल बनाया जाएगा।
नई डिस्टलरी में देश का सबसे आधुनिक बॉयलर लगाया जाएगा, जिसकी कीमत करीब 20 से 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ये बॉयलर डिस्टलरी के निकासी के गंदे पानी को सूखा कर इससे भांप बनाएगा।
15 एकड़ में बनेगी 150 करोड़ से आधुनिक डिस्टलरी
नए शुगर मिल की 75 एकड़ जमीन में से 15 एकड़ जमीन में 150 करोड़ रुपये से नई डिस्टलरी बनाई जाएगी। इसके एथेनॉल के उत्पादन की क्षमता काफी ज्यादा होगी। जिसे ईंधन में इस्तेेमाल किया जाएगा। -नवदीप सिंह, एमडी, शुगर मिल, पानीपत।