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केवल नाम का स्टेडियम, न कोई उपकरण न ही कोई सुविधा
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गांव उग्राखेड़ी के स्टेडियम में अभ्यास करती महिला खिलाड़िया।
- फोटो : Panipat
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जिले का उग्राखेड़ी स्टेडियम केवल नाम का स्टेडियम है। यहां न तो खेलने के लिए कोई उपकरण है, न ही खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा। खिलाड़ी तीन किलोमीटर दूर जाकर गांव रिसालू में बन रहे नए स्टेडियम में अभ्यास करते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम जाने व आने में ही उनका आधा घंटा खराब हो जता है। यदि गांव में ही स्टेडियम और सभी उपकरण उपलब्ध हो जाए तो उनका समय बचेगा। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि वह किसी को इसकी शिकायत देते हैं तो नेता कहते हैं कि हम गांव को बदनाम कर रहे हैं। जबकि वे एक बार में ही समस्या का समाधान करवा सकते हैं।
खिलाड़ियों का कहना है कि पिछले कई सालों से गांव में कोई नया खेल उपकरण नहीं आया है। जबकि खेल विभाग व गांव के सरपंच को जरूरत अनुसार हर साल खेल उपकरण की मांग करनी चाहिए, तकि गांव के खिलाड़ी इसी तरह खेल में आगे बढ़ते रहे।
पॉकेट मनी इकट्ठी करके गांव की लड़कियों ने खेलने के लिए हैंडबॉल ग्राउंड तैयार किया था। उससे पहले तीन महीने तक वह खेत व अन्य खाली ग्राउंड में अभ्यास करतीं थीं। गांव की महिला खिलाड़ी ने जब पॉकेट मनी से ग्राउंड तैयार किया तब भी खेल विभाग की ओर से उनको न तो बढ़ावा दिया गया न ही कोई उपकरण।
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उग्राखेड़ी में 10 से ज्यादा नेशनल खिलाड़ी
उग्राखेड़ी में 10 से ज्यादा हैंडबॉल, कुश्ती व अन्य खेलों के नेशनल खिलाड़ी हैं, जो हर साल राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर देश में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। वहीं गांव के खेल स्टेडियम की दशा को देखने के बाद कुछ खिलाड़ी दिल्ली व पंजाब में रहकर ही खेल का अभ्यास करते हैं और वहां की टीम में ही खेलते हैं।
खुद खरीदने पड़ते हैं उपकरण
रिसालू गांव में बन रहे स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए रोजाना जाना पड़ता है। हमारे गांव के स्टेडियम में पिछले कई सालों से हमें कोई भी उपकरण उपलब्ध नहीं कराया जाता है। हमें खुद ही पैसे इकट्ठे करके उपकरण खरीदना पड़ता है।
- अमन मलिक, खिलाड़ी
फव्वारे भी तीन महीने से हैं खराब
गांव के स्टेडियम में घास लगाने के लिए फव्वारे लगाए गए थे, जो दो से तीन बार चलकर ही बंद हो गए और पिछले तीन महीने से बंद ही हैं। गांव के स्टेडियम में केवल नाम का काम होता है जो हम खिलाड़ियों को कभी नहीं दिखा है।
- विक्रांत मलिक,खिलाड़ी
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खिलाड़ियों का कहना है कि पिछले कई सालों से गांव में कोई नया खेल उपकरण नहीं आया है। जबकि खेल विभाग व गांव के सरपंच को जरूरत अनुसार हर साल खेल उपकरण की मांग करनी चाहिए, तकि गांव के खिलाड़ी इसी तरह खेल में आगे बढ़ते रहे।
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पॉकेट मनी इकट्ठी करके गांव की लड़कियों ने खेलने के लिए हैंडबॉल ग्राउंड तैयार किया था। उससे पहले तीन महीने तक वह खेत व अन्य खाली ग्राउंड में अभ्यास करतीं थीं। गांव की महिला खिलाड़ी ने जब पॉकेट मनी से ग्राउंड तैयार किया तब भी खेल विभाग की ओर से उनको न तो बढ़ावा दिया गया न ही कोई उपकरण।
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उग्राखेड़ी में 10 से ज्यादा नेशनल खिलाड़ी
उग्राखेड़ी में 10 से ज्यादा हैंडबॉल, कुश्ती व अन्य खेलों के नेशनल खिलाड़ी हैं, जो हर साल राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर देश में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। वहीं गांव के खेल स्टेडियम की दशा को देखने के बाद कुछ खिलाड़ी दिल्ली व पंजाब में रहकर ही खेल का अभ्यास करते हैं और वहां की टीम में ही खेलते हैं।
खुद खरीदने पड़ते हैं उपकरण
रिसालू गांव में बन रहे स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए रोजाना जाना पड़ता है। हमारे गांव के स्टेडियम में पिछले कई सालों से हमें कोई भी उपकरण उपलब्ध नहीं कराया जाता है। हमें खुद ही पैसे इकट्ठे करके उपकरण खरीदना पड़ता है।
- अमन मलिक, खिलाड़ी
फव्वारे भी तीन महीने से हैं खराब
गांव के स्टेडियम में घास लगाने के लिए फव्वारे लगाए गए थे, जो दो से तीन बार चलकर ही बंद हो गए और पिछले तीन महीने से बंद ही हैं। गांव के स्टेडियम में केवल नाम का काम होता है जो हम खिलाड़ियों को कभी नहीं दिखा है।
- विक्रांत मलिक,खिलाड़ी

उग्राखेड़ी स्टेडियम।- फोटो : Panipat