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Panipat News: सांग महोत्सव शुरू, उत्तानपाद और ध्रुव का सुनाया किस्सा
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पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में तीन दिवसीय सांग महोत्सव का शुक्रवार को एसडी पीजी कॉलेज में शानदार आगाज हुआ। पहले दिन सांगी वेद प्रकाश अत्री ने उत्तानपाद और ध्रुव सांग का मंचन किया। कलाकारों ने सांग के माध्यम समाज की वर्तमान स्थिति को प्रकट किया। हरियाणा कला परिषद रोहतक मंडल और दादा लक्ष्मीचंद सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में सांग का आयोजन किया गया।
सांगी वेद प्रकाश अत्री ने उत्तानपाद सांग सुनाया। सांग के माध्यम से बताया कि मनु और शतरूपा के दो पुत्र प्रियवत और उत्तानपाद थे। उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नी थी। राजा उत्तानपाद को सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नाम के दो पुत्र हुए। सुनीति बड़ी रानी थी परंतु उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था। सुनीति का पुत्र ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठा खेल रहा था । इतने में सुरुचि वहां आई और ध्रुव को उत्तानपाद की गोद में देख उसका पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकी। उसने झपट कर बालक ध्रुव को राजा की गोद से खींच लिया और अपने पुत्र उत्तम को उसकी गोद में बैठा दिया। ध्रुव को अपनी सौतेली मां के व्यवहार पर गुस्सा आया। वह भागते हुए अपनी मां सुनीति के पास आया तथा सारी बात बताई। सुनीति ने कहा कि तुम्हारे पिता हमसे दूर हो गए हैं। अब तुम भगवान को अपना सहारा बनाओ। ध्रुव ने भगवान की भक्ति के लिए घर छोड़ दिया। राजा उत्तानपाद को ध्रुव के चले जाने से बड़ा पछतावा हुआ।
इस मौके पर प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि सांग महोत्सव से छात्र-छात्राओं और आमजन को हरियाणवी संस्कृति, लोक काव्य और कला के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। इस प्रकार के आयोजन से ही समाज व संस्कृति को बचाया जा सकता है। मुख्यातिथि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि गजेंद्र सलूजा विशिष्ट अतिथि कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल रहे। ब्राह्मण समाज के प्रदेशाध्यक्ष सतीश शर्मा विशेष आमंत्रित अतिथि रहे। कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया। ट्रस्ट के प्रधान वीरेंद्र शर्मा ने सांग कला के बारे में विस्तार से बताया। मंच संचालन गुलाब पांचाल और डॉ. संतोष कुमारी ने किया।
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इस मौके पर मनोज जागलान और राजेश शर्मा ने हरियाणवी संस्कृति लोक कलाओं की विधाओं को लुप्त होने से बचाने के लिए आगे आने की सराहना की। इस अवसर पर सुरेश शर्मा, जसमेर गौतम, कंवरभान शर्मा, नरेंद्र गर्ग, उमेद कवी, दिनेश जून, रामलाल भाटिया व कुलदीप रोहिल्ला मौजूद रहे ।
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सांगी वेद प्रकाश अत्री ने उत्तानपाद सांग सुनाया। सांग के माध्यम से बताया कि मनु और शतरूपा के दो पुत्र प्रियवत और उत्तानपाद थे। उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नी थी। राजा उत्तानपाद को सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नाम के दो पुत्र हुए। सुनीति बड़ी रानी थी परंतु उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था। सुनीति का पुत्र ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठा खेल रहा था । इतने में सुरुचि वहां आई और ध्रुव को उत्तानपाद की गोद में देख उसका पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकी। उसने झपट कर बालक ध्रुव को राजा की गोद से खींच लिया और अपने पुत्र उत्तम को उसकी गोद में बैठा दिया। ध्रुव को अपनी सौतेली मां के व्यवहार पर गुस्सा आया। वह भागते हुए अपनी मां सुनीति के पास आया तथा सारी बात बताई। सुनीति ने कहा कि तुम्हारे पिता हमसे दूर हो गए हैं। अब तुम भगवान को अपना सहारा बनाओ। ध्रुव ने भगवान की भक्ति के लिए घर छोड़ दिया। राजा उत्तानपाद को ध्रुव के चले जाने से बड़ा पछतावा हुआ।
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इस मौके पर प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि सांग महोत्सव से छात्र-छात्राओं और आमजन को हरियाणवी संस्कृति, लोक काव्य और कला के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। इस प्रकार के आयोजन से ही समाज व संस्कृति को बचाया जा सकता है। मुख्यातिथि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि गजेंद्र सलूजा विशिष्ट अतिथि कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल रहे। ब्राह्मण समाज के प्रदेशाध्यक्ष सतीश शर्मा विशेष आमंत्रित अतिथि रहे। कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया। ट्रस्ट के प्रधान वीरेंद्र शर्मा ने सांग कला के बारे में विस्तार से बताया। मंच संचालन गुलाब पांचाल और डॉ. संतोष कुमारी ने किया।
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इस मौके पर मनोज जागलान और राजेश शर्मा ने हरियाणवी संस्कृति लोक कलाओं की विधाओं को लुप्त होने से बचाने के लिए आगे आने की सराहना की। इस अवसर पर सुरेश शर्मा, जसमेर गौतम, कंवरभान शर्मा, नरेंद्र गर्ग, उमेद कवी, दिनेश जून, रामलाल भाटिया व कुलदीप रोहिल्ला मौजूद रहे ।