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नाले की गुणवत्ता जांचने के लिए भरवाए छह सैंपल
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पानीपत। वार्ड नंबर-10 के सेक्टर 11-12 में करीब 55 लाख रुपये की लागत से बन रहे नाले के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाए थे। उस नाले के निगम अधिकारियों ने सोमवार को छह सैंपल भरवाए हैं। इनमें से तीन सैंपल स्लैब और तीन सैंपल नाले की दीवारों के हैं। इन सैंपलों को जांच के लिए लैब भेजा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि नाले का निर्माण गुणवत्ता के साथ किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। इस दौरान अधिकारियों ने निर्माणाधीन नाले की कुछ तस्वीरें भी साझा की। इसमें नाले के निर्माण में लगाया गया सरिया तक दर्शाया।
खास बात ये रही कि इस नाले के निर्माण कार्य में कम सरिया लगाने का मामला पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने उजागर किया था लेकिन निगम अधिकारियों ने उन्हें मौके पर तक नहीं बुलाया। वहीं मौके पर निगम एक्सईएन से लेकर निगम की पूरी इंजीनियरिंग विंग समेत वार्ड पार्षद रविंद्र भाटिया तक मौजूद रहे। पूछने पर अधिकारियों ने कहा कि वे सिर्फ आदेशानुसार अपना काम कर रहे हैं। वहीं, पूर्व मेयर ने कहा कि अगर गड़बड़ी न होती तो अधिकारी उन्हें मौके पर बुलाने से क्यों कतारते। ये सब निगम अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का खेल है। जल्द ही इसे उजागर किया जाएगा।
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बता दें कि वार्ड नंबर 10 के सेक्टर 11-12 में करीब 55 लाख रुपये कंक्रीट का नाला बनाया गया था। इस नाले के निर्माण पर पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाए थे कि इसमें ठेकेदार ने केवल 30 प्रतिशत ही सरिया लगाया है, जबकि 70 प्रतिशत सरिया लगाया ही नहीं जबकि निगम के कागजों में नाले का काम सही दिखाया गया है। इसके बाद इसके निर्माण की लागत की करीब 70 प्रतिशत पेमेंट तक निगम कर चुका है। पूर्व मेयर से पहले भी शहरी विधायक नाले के निर्माण को लेकर अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं।
सभी की मिलीभगत है
सभी मिले हुए हैं। इसलिए मुझे नहीं बुलाया। स्टील महंगा है इसलिए ठेकेदार इसे कम लगा रहे हैं और अधिकारी इन ठेकेदारों बचा रहे हैं। ऐसा सिर्फ इस नाले में ही नहीं बल्कि शहर के दूसरे विकास कायोर ़ं में भी किया जा रहा है। जल्द ही सब प्रकरण जनता के सामने लाए जाएंगे। -भूपेंद्र सिंह, पूर्व मेयर, नगर निगम।
छह सैंपल लेकर भिजवाए लैब
मामला संज्ञान में आ चुका था। इसकी जांच के लिए सोमवार को टीम बुलाकर मौके से छह सैंपल भरवाए गए। तीन सेंपल स्लैब और तीन सेंपल नाले की दीवारों के लिए हैं। इनको अब किसी भी अच्छी आईएसओ सर्टिफाइड और एनएबीएल लैब से अप्रूवड लैब से टेस्ट करवाया जाएगा। -नवीन सहरावत, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।
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अधिकारियों का कहना है कि नाले का निर्माण गुणवत्ता के साथ किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। इस दौरान अधिकारियों ने निर्माणाधीन नाले की कुछ तस्वीरें भी साझा की। इसमें नाले के निर्माण में लगाया गया सरिया तक दर्शाया।
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खास बात ये रही कि इस नाले के निर्माण कार्य में कम सरिया लगाने का मामला पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने उजागर किया था लेकिन निगम अधिकारियों ने उन्हें मौके पर तक नहीं बुलाया। वहीं मौके पर निगम एक्सईएन से लेकर निगम की पूरी इंजीनियरिंग विंग समेत वार्ड पार्षद रविंद्र भाटिया तक मौजूद रहे। पूछने पर अधिकारियों ने कहा कि वे सिर्फ आदेशानुसार अपना काम कर रहे हैं। वहीं, पूर्व मेयर ने कहा कि अगर गड़बड़ी न होती तो अधिकारी उन्हें मौके पर बुलाने से क्यों कतारते। ये सब निगम अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का खेल है। जल्द ही इसे उजागर किया जाएगा।
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बता दें कि वार्ड नंबर 10 के सेक्टर 11-12 में करीब 55 लाख रुपये कंक्रीट का नाला बनाया गया था। इस नाले के निर्माण पर पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाए थे कि इसमें ठेकेदार ने केवल 30 प्रतिशत ही सरिया लगाया है, जबकि 70 प्रतिशत सरिया लगाया ही नहीं जबकि निगम के कागजों में नाले का काम सही दिखाया गया है। इसके बाद इसके निर्माण की लागत की करीब 70 प्रतिशत पेमेंट तक निगम कर चुका है। पूर्व मेयर से पहले भी शहरी विधायक नाले के निर्माण को लेकर अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं।
सभी की मिलीभगत है
सभी मिले हुए हैं। इसलिए मुझे नहीं बुलाया। स्टील महंगा है इसलिए ठेकेदार इसे कम लगा रहे हैं और अधिकारी इन ठेकेदारों बचा रहे हैं। ऐसा सिर्फ इस नाले में ही नहीं बल्कि शहर के दूसरे विकास कायोर ़ं में भी किया जा रहा है। जल्द ही सब प्रकरण जनता के सामने लाए जाएंगे। -भूपेंद्र सिंह, पूर्व मेयर, नगर निगम।
छह सैंपल लेकर भिजवाए लैब
मामला संज्ञान में आ चुका था। इसकी जांच के लिए सोमवार को टीम बुलाकर मौके से छह सैंपल भरवाए गए। तीन सेंपल स्लैब और तीन सेंपल नाले की दीवारों के लिए हैं। इनको अब किसी भी अच्छी आईएसओ सर्टिफाइड और एनएबीएल लैब से अप्रूवड लैब से टेस्ट करवाया जाएगा। -नवीन सहरावत, एक्सईएन, नगर निगम, पानीपत।