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Panipat News: धागे की कीमत में सात रुपये प्रति किलोग्राम उछाल, उद्यमी को राहत
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पानीपत। डेढ़ माह बाद धागे की कीमत में उछाल आया है। मांग बढ़ने पर कीमत में सात रुपये प्रति किलोग्राम तक वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में धागे की कीमत 85 रुपये से बढ़कर 93 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इससे उद्यमियों को कुछ राहत मिली है। मांग के साथ उत्पादन बढ़ने की भी उम्मीद है।
दरअसल, अभी कंबल का पीक सीजन है, इसलिए धागे की मांग एकाएक बढ़ी है, लेकिन अब भी अमेरिका व यूरोप से धागे के ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। निर्यात पिछले साल की अपेक्षा 20 प्रतिशत तक कम है। अमेरिका में महंगाई, जर्मनी में मंदी और रूस-यूक्रेन युद्ध से पानीपत में भी धागे का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। अब अमेरिका व यूरोप में टेक्सटाइल उत्पादों की मांग न के बराबर रह गई है। इसका पानीपत टेक्सटाइल नगरी पर विपरीत असर पड़ा है। धागे के 250 उद्योग अब एक शिफ्ट में चलाने पड़ रहे हैं।
पानीपत ने 2022 में टेक्सटाइल के साथ-साथ धागा उत्पादन में भी कीर्तिमान स्थापित किया था। पानीपत ने 20 लाख किलोग्राम धागे का प्रतिदिन उत्पादन कर इटली को पीछे छोड़ दिया था। धागा उद्योग में आई क्रांति से उद्योगपतियों ने भी अपने उद्योगों को कंबल या बेडसीट से धागे में स्थानांतरित कर लिया था। पिछले चार साल में धागा उद्योग 50 प्रतिशत बढ़े हैं, लेकिन अब यहां का धागा उद्योग संकट से जूझ रहा है।
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पानीपत से पूरे देश में कंबल, बेडसीट, पिल्लो कवर, शोफे के कवर, पर्दे तौलिये समेत तमाम उत्पाद भेजे जाते हैं। अकेले पानीपत की घरेलू मार्केट 90 हजार करोड़ व निर्यात 16 हजार करोड़ का है। पानीपत से 112 देशों में निर्यात होता है।
पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और नॉर्दन इंडिया रोलर स्पिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रीतम सिंह सचदेवा ने कहा कि अब धागे के दाम में सात रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। इससे उद्यमियों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन धागा उद्योग अभी पटरी पर नहीं पा रहे। टेक्सटाइल उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मांग नहीं है, इसलिए धागे की खपत भी 50 प्रतिशत कम हो चुकी है।
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दरअसल, अभी कंबल का पीक सीजन है, इसलिए धागे की मांग एकाएक बढ़ी है, लेकिन अब भी अमेरिका व यूरोप से धागे के ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। निर्यात पिछले साल की अपेक्षा 20 प्रतिशत तक कम है। अमेरिका में महंगाई, जर्मनी में मंदी और रूस-यूक्रेन युद्ध से पानीपत में भी धागे का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। अब अमेरिका व यूरोप में टेक्सटाइल उत्पादों की मांग न के बराबर रह गई है। इसका पानीपत टेक्सटाइल नगरी पर विपरीत असर पड़ा है। धागे के 250 उद्योग अब एक शिफ्ट में चलाने पड़ रहे हैं।
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पानीपत ने 2022 में टेक्सटाइल के साथ-साथ धागा उत्पादन में भी कीर्तिमान स्थापित किया था। पानीपत ने 20 लाख किलोग्राम धागे का प्रतिदिन उत्पादन कर इटली को पीछे छोड़ दिया था। धागा उद्योग में आई क्रांति से उद्योगपतियों ने भी अपने उद्योगों को कंबल या बेडसीट से धागे में स्थानांतरित कर लिया था। पिछले चार साल में धागा उद्योग 50 प्रतिशत बढ़े हैं, लेकिन अब यहां का धागा उद्योग संकट से जूझ रहा है।
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पानीपत से पूरे देश में कंबल, बेडसीट, पिल्लो कवर, शोफे के कवर, पर्दे तौलिये समेत तमाम उत्पाद भेजे जाते हैं। अकेले पानीपत की घरेलू मार्केट 90 हजार करोड़ व निर्यात 16 हजार करोड़ का है। पानीपत से 112 देशों में निर्यात होता है।
पानीपत इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और नॉर्दन इंडिया रोलर स्पिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रीतम सिंह सचदेवा ने कहा कि अब धागे के दाम में सात रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। इससे उद्यमियों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन धागा उद्योग अभी पटरी पर नहीं पा रहे। टेक्सटाइल उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मांग नहीं है, इसलिए धागे की खपत भी 50 प्रतिशत कम हो चुकी है।