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कमरें कम, विद्यार्थी हैं ज्यादा, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना आफत
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नीरज गिरी
पानीपत। शिक्षा विभाग 21 सितंबर से सभी स्कूलों को खोलने की तैयारी में है, लेकिन स्कूलों में कमरों की संख्या विद्यार्थियों के मुकाबले न के बराबर है। अगर नौवीं से 12वीं कक्षा के सभी विद्यार्थी स्कूलों आते हैं तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना नामुमकिन है। वहीं सरकार के दिशा निर्देशों के मुताबिक सैनिटाइजेशन और मास्क के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग रखना भी नियमों में शामिल है। अगर सोशल डिस्टेंसिंग ही नहीं हो पाई तो सैनिटाइजेशन और मास्क का कोई फायदा नहीं होगा। पानीपत के चार सरकारी स्कूल में अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की, जिसमें पता चला कि सभी में स्कूलों में कमरों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है।
मॉडल संस्कृति स्कूल
स्कूल की हालत बिलकुल खस्ता है। कुछ कमरे जर्जर हालत में हैं। स्कूल के 15 से ज्यादा कमरों का प्रयोग नहीं किया जा सकता। नौवीं से लेकर बारहवीं तक 1451 विद्यार्थी हैं और केवल 10 कमरे हैं। स्कूल खुलता है तो एक कमरे में 145 विद्यार्थी को बैठाना होगा। विधायक प्रमोद विज ने स्कूल की मरम्मत का आश्वासन दिया था, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल उग्राखेड़ी
स्कूल में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की संख्या 630 है। वहीं केवल 10 कमरे उपलब्ध हैं। एक कमरे में 63 विद्यार्थियों को बैठाना होगा। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का नियमानुसार पालन करें तो एक कक्षा में सिर्फ 20 ही विद्यार्थी होने चाहिए।
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राजकीय सेकेंडरी स्कूल निंबरी
स्कूल में नौंवी व दसवीं कक्षा में 71 विद्यार्थियों पर महज दो कमरे हैं। एक कक्षा में 35 विद्यार्थियों को बैठाया जाएगा। सरकार की गाइडलांइस के अनुसार एक छात्र से दूसरे छात्र के बीच डेढ़ मीटर की दूरी होनी चाहिए, जो संभव ही नहीं है।
राजकीय सेकेंडरी स्कूल भापरा
समालखा ब्लाक का सबसे बड़ा सरकारी स्कूल है, जिसमें शहर व गांव के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। स्कूल में 9वीं से 12वीं तक के 450 विद्यार्थी हैं। इस स्कूल में अन्य स्कूलों के मुकाबले अधिक 15 कमरे हैं। यानी कि एक कमरे में 30 विद्यार्थी बैठाए जाएंगे।
स्कूल में 25 कमरों की मांग
स्कूल खोलने से पहले ही उग्राखेड़ी की प्रधानाचार्य ने स्कूल में 25 नए क्लासरूम बनवाने की मांग की थी, लेकिन स्कूल में एक भी कमरा नया नहीं बन पाया। प्रधानाचार्य मीना चौधरी ने बताया कि सैनिटाइजर और मास्क तक तो ठीक है, लेकिन कमरों की कमी से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना मुश्किल है।
अभी एक कमरे में कितने विद्यार्थियों की संख्या होगा, यह तय नहीं है। हर स्कूल में दो गेट होंगे, एक प्रवेश के लिए और एक निकासी के लिए। इसके साथ ही वहां पर बच्चों के हाथ धुलवाने का पूरा प्रबंधन किया गया है। गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कराया जाएगा।
रमेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी
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पानीपत। शिक्षा विभाग 21 सितंबर से सभी स्कूलों को खोलने की तैयारी में है, लेकिन स्कूलों में कमरों की संख्या विद्यार्थियों के मुकाबले न के बराबर है। अगर नौवीं से 12वीं कक्षा के सभी विद्यार्थी स्कूलों आते हैं तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना नामुमकिन है। वहीं सरकार के दिशा निर्देशों के मुताबिक सैनिटाइजेशन और मास्क के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग रखना भी नियमों में शामिल है। अगर सोशल डिस्टेंसिंग ही नहीं हो पाई तो सैनिटाइजेशन और मास्क का कोई फायदा नहीं होगा। पानीपत के चार सरकारी स्कूल में अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की, जिसमें पता चला कि सभी में स्कूलों में कमरों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है।
मॉडल संस्कृति स्कूल
स्कूल की हालत बिलकुल खस्ता है। कुछ कमरे जर्जर हालत में हैं। स्कूल के 15 से ज्यादा कमरों का प्रयोग नहीं किया जा सकता। नौवीं से लेकर बारहवीं तक 1451 विद्यार्थी हैं और केवल 10 कमरे हैं। स्कूल खुलता है तो एक कमरे में 145 विद्यार्थी को बैठाना होगा। विधायक प्रमोद विज ने स्कूल की मरम्मत का आश्वासन दिया था, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।
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राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल उग्राखेड़ी
स्कूल में 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की संख्या 630 है। वहीं केवल 10 कमरे उपलब्ध हैं। एक कमरे में 63 विद्यार्थियों को बैठाना होगा। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का नियमानुसार पालन करें तो एक कक्षा में सिर्फ 20 ही विद्यार्थी होने चाहिए।
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राजकीय सेकेंडरी स्कूल निंबरी
स्कूल में नौंवी व दसवीं कक्षा में 71 विद्यार्थियों पर महज दो कमरे हैं। एक कक्षा में 35 विद्यार्थियों को बैठाया जाएगा। सरकार की गाइडलांइस के अनुसार एक छात्र से दूसरे छात्र के बीच डेढ़ मीटर की दूरी होनी चाहिए, जो संभव ही नहीं है।
राजकीय सेकेंडरी स्कूल भापरा
समालखा ब्लाक का सबसे बड़ा सरकारी स्कूल है, जिसमें शहर व गांव के विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। स्कूल में 9वीं से 12वीं तक के 450 विद्यार्थी हैं। इस स्कूल में अन्य स्कूलों के मुकाबले अधिक 15 कमरे हैं। यानी कि एक कमरे में 30 विद्यार्थी बैठाए जाएंगे।
स्कूल में 25 कमरों की मांग
स्कूल खोलने से पहले ही उग्राखेड़ी की प्रधानाचार्य ने स्कूल में 25 नए क्लासरूम बनवाने की मांग की थी, लेकिन स्कूल में एक भी कमरा नया नहीं बन पाया। प्रधानाचार्य मीना चौधरी ने बताया कि सैनिटाइजर और मास्क तक तो ठीक है, लेकिन कमरों की कमी से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना मुश्किल है।
अभी एक कमरे में कितने विद्यार्थियों की संख्या होगा, यह तय नहीं है। हर स्कूल में दो गेट होंगे, एक प्रवेश के लिए और एक निकासी के लिए। इसके साथ ही वहां पर बच्चों के हाथ धुलवाने का पूरा प्रबंधन किया गया है। गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कराया जाएगा।
रमेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी