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Panipat News: संगीता पौष्टिक खाना खिला बनी लखपति दीदी, आज अपनी पहचान
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पानीपत। कारद गांव की संगीता एक समय पैसों की तंगी के चलते कुछ खर्च करने को भी सोचती थीं। पति की मजदूरी से घर का खर्च भी ठीक से नहीं चल पाता था। उन्होंने जून 2022 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर इसराना तहसील के बाहर दीदी की रसोई कैंटीन शुरू की। उनके हाथ का खाना खाकर लोगों का पेट भी भरा और इन तीन सालों में ही संगीता की तिजोरी भी भर गई। संगीता आज क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं।
संगीता देवी ने बताया कि वह पहले अपने घर तक ही सीमित थी। पहले उसके पिता और शादी के बाद उसके पति के नाम से ही पहचान थी। वह जून 2022 में स्वयं सहायता समूह में जुस्कर लखपति दीदी बनी थी। समूह से जुड़ने के बाद उनकी स्वयं की पहचान बनी है। सभी उसे उसके नाम से जानने लगे हैं। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। वह अब अपने गांव के साथ आस-पास के गांव की महिलाओं को भी समूह से जुड़ने व जीवन में आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक कर रही हैं।
पौष्टिक खाना हर किसी को लगता है स्वाद
संगीता ने बताया कि वह अब इसराना तहसील के बाहर दीदी की रसोई कैंटीन चला रही है। लोगों को अपने हाथों से शुद्ध व पौष्टिक खाना बनाकर खिला रही हैं। कैंटीन में उनके पति भी उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं। दोनों मिलकर एक महीने में कैंटीन से 15 हजार रुपये की आय कर रहे हैं।
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इससे उनका जीवनयापन अच्छे से हो पा रहा है। इसराना के महा पाथरी स्वयं सहायता समूह के नाम से ग्रुप बना हुआ है। जिसमें समूह की इसराना ब्लॉक से 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अब वे सभी मिलकर गांव की महिलाओं को भी समूह से जोड़कर आगे बढ़ने के लिए जागरूक कर रही हैं। संगीता ने बताया कि गांव की ही एक महिला की कैंटीन परढ़ाना रोड स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट के पास भी खुलवाई है। उनको समूह से जुड़ने के बाद कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है। जिससे वह उनकी मदद कर उन्हें आगे बढ़ने में सहयोग कर रही हैं।
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संगीता देवी ने बताया कि वह पहले अपने घर तक ही सीमित थी। पहले उसके पिता और शादी के बाद उसके पति के नाम से ही पहचान थी। वह जून 2022 में स्वयं सहायता समूह में जुस्कर लखपति दीदी बनी थी। समूह से जुड़ने के बाद उनकी स्वयं की पहचान बनी है। सभी उसे उसके नाम से जानने लगे हैं। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। वह अब अपने गांव के साथ आस-पास के गांव की महिलाओं को भी समूह से जुड़ने व जीवन में आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक कर रही हैं।
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पौष्टिक खाना हर किसी को लगता है स्वाद
संगीता ने बताया कि वह अब इसराना तहसील के बाहर दीदी की रसोई कैंटीन चला रही है। लोगों को अपने हाथों से शुद्ध व पौष्टिक खाना बनाकर खिला रही हैं। कैंटीन में उनके पति भी उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं। दोनों मिलकर एक महीने में कैंटीन से 15 हजार रुपये की आय कर रहे हैं।
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इससे उनका जीवनयापन अच्छे से हो पा रहा है। इसराना के महा पाथरी स्वयं सहायता समूह के नाम से ग्रुप बना हुआ है। जिसमें समूह की इसराना ब्लॉक से 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अब वे सभी मिलकर गांव की महिलाओं को भी समूह से जोड़कर आगे बढ़ने के लिए जागरूक कर रही हैं। संगीता ने बताया कि गांव की ही एक महिला की कैंटीन परढ़ाना रोड स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट के पास भी खुलवाई है। उनको समूह से जुड़ने के बाद कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है। जिससे वह उनकी मदद कर उन्हें आगे बढ़ने में सहयोग कर रही हैं।