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रोडवेज का चक्का जाम, यात्री बेहाल
अमर उजाला, पानीपत
Updated Tue, 21 Jan 2014 12:28 AM IST
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पानीपत। हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी की दो दिन की हड़ताल के पहले दिन चक्का जाम रहा। यूनियन टज्ञैर सरकार की लड़ाई के बीच का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा और दिनभर बसों को लेकर इधर-उधर भटकना पड़ा।
डिपो में यूनियन और अधिकारियों के बीच एक बस को निकलने को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई। यूनियन ने बसों को उनके ऊपर से ले जाने की चेतावनी दे दी। पुलिस अधिकारियों ने यूनियन को समझाकर शांत किया। यूनियन ने डिपो से एक-दो बसों के चलने और डिपो अधिकारियों ने 26 बसें के चलने का दावा किया।
हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के आह्वान पर दो दिन की हड़ताल का सोमवार को पहला दिन रहा। यूनियन नेताओं ने डिपो के बाहर धरना देकर सरकार विरोधी नारेबाजी की। यूनियन नेताओं ने कहा कि वे तीन बार सरकार से वार्ता कर चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों को लागू नहीं किया जा रहा। हड़ताल की चेतावनी के बाद सरकार ने यूनियन की तीन मांगों को लागू किया है।
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सरकार प्रदेश में 3519 बसों के प्राइवेट परमिट देना चाहती है। इसका यूनियन जनता के हित में विरोध कर रही है। गत रात्रि को कैथल में हुई वार्ता भी इसी विषय के चलते विफल हो गई। इस मौके पर आजाद सिंह मलिक, बलराज देशवाल, रणबीर शर्मा, राजकुमार छौक्कर, सतीश पंवार, राजपाल सिंह, सुलतान लठवाल, बलराज देशवाल, चरण सिंह, सुरेश अहलावत, दिनेश मलिक मौजूद रहे।
हरियाणा रोडवेज यूनियनों ने सुबह डिपो के बाहर डेरा डाल लिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की। डिपो अधिकारियों ने सुबह के समय बसों को निकालने का प्रयास किया और पानीपत से अलवर जाने वाली बस को निकाल दिया। इसके बाद पानीपत से दिल्ली की दो, पानीपत से शामली की बस वर्कशाप से निकाली गई। बसों को लेकर काफी हंगामा मचा रहा। यूनियन नेताओं ने इनका विरोध किया।
डिपो में हड़ताल के दौरान दोपहर के समय टकराव की स्थिति पैदा हो गई। हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर से आई सोनीपत डिपो की बस पानीपत डिपो में सवारी लेने चली गई। बस को वापस निकालते समय चालक घबरा गया। प्रशासनिक और रोडवेज अधिकारियों ने बस को निकालने का प्रयास किया।
इसका यूनियनों ने विरोध किया और यूनियन नेता धारा 144 को तोड़ते हुए वर्कशाप में पहुंच गए। यूनियन के विरोध के चलते बस नहीं चलाई जा सकी। पदाधिकारियों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को खूब खरी-खरी सुनाई। इसके बाद यात्रियों ने विरोध कर दिया। उन्होंने टिकट के पैसे वापस करने की मांग की। जिसके बाद परिचालक ने यात्रियों को पैसे वापस करने पड़े।
पानीपत डिपो में इस समय 115 बसें हैं। इन बसों पर 179 चालक व 263 परिचालक हैं। डिपो को 38 चालक रविवार को ही मिले हैं। जिनमें से 10 चालकों ने ज्वाइन कर लिया है। इन बसों से हर रोज करीब 40 हजार किलोमीटर तय किए जाते हैं, लेकिन सोमवार को हड़ताल के चलते चंद बसें ही डिपो से बाहर निकल सकी। जिससे डिपो को एक दिन में लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। यूनियन नेता दो बसों और अधिकारी 26 बसों को सड़क पर चलाने का दावा करते हैं।
रोडवेज बसों की हड़ताल के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्री दिनभर सड़क पर बसों का इंतजार करते रहे और निजी वाहनों का सहारा लेकर अपने गंतव्य को जाना पड़ा। कुछ यात्रियों को रेल का सहारा लेना पड़ा। जिसके चलते रेलों में भी पूरी भीड़ रही।
दिल्ली जा रहे विक्रांत, सतीश कुमार, बबली और पूनम ने कहा कि वे काफी देर से बसों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन रोडवेज बसें नहीं मिली। इसके चलते उनको आगे जाने की चिंता सता रही है। यूनियन व सरकार की लड़ाई का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा।
जीटी रोड पर निजी बसें और अन्य वाहन दिनभर नियम तोड़कर चलते रहे। अधिकारी भी इन वाहनों को बेरोकटोक जाने देने को राजी दिखे। कई संचालकों ने बसें अपने छोटे मार्गों को छोड़कर जीटी रोड के लंबे मार्गों पर उतार दी। यहां पर सुबह से लेकर देर रात तक मोटा कमाया।
हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी की हड़ताल को अन्य विभागों ने भी अपना समर्थन दिया और अपने-अपने कार्यालयों में गेट मीटिंग की। कई यूनियनों ने डिपो पर पहुंचकर हड़ताल को समर्थन दिया। जिसके चलते इन कार्यालयों में भी कार्य बाधित रहा।
समर्थन देने वालों में मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन से सतीश सेठी, वीएलडीए के राज्य उप प्रधान डॉ. सुरेंद्र मलिक, एएचपीसी वर्कर यूनियन से सुरेश कुमार, नगर पालिका से धर्मबीर सारसर, हुडा वर्कर यूनियन से भूपेंद्र सिंह, पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर से सुलतान देशवाल और सीटू से सुनील कुमार ने समर्थन दिया।
डिपो के सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और चीफ इंस्पेक्टर को डीसी की ओर से एक दिन टिकट (कंडक्टर बनकर ) काटने की बात पर पर खफा हो गए। इनमें से कुछ अधिकारी यहां से टल गए और यूनियन के धरने में शामिल हो गए। इन अधिकारियों का कहना है कि वे सर्विस के आखिरी सालों में इंस्पेक्टर बन पाए हैं।
ऐसे प्रशासनिक अधिकारी उनको फिर से कंडक्टर और ड्राइवर बनाने में जुटे हैं। दरअसल डिपो अधिकारियों ने डीसी के सामने कंडक्टर न मिलने की बात कही थी। जिस पर डीसी ने इंस्पेक्टर को एक दिन के लिए टिकट काटने की पेशकश कर दी।
प्रशासन और पुलिस अधिकारी रोडवेज की हड़ताल को लेकर काफी गंभीर नजर आए। डिपो पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी दिनभर तैनात रहे। डिपो में पहले पुलिस अधीक्षक सतीश बालन और फिर डीसी समीर पाल सरो पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने अधिकारियों को अलग-अलग दिशा निर्देश दिए।
यूनियन की हड़ताल के बीच डिपो की 26 बसों को चलाया। इसमें महाप्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा सहयोग रहा। उन्होंने डिपो से यात्रियों को हरसंभव सुविधा देने का प्रयास किया। डिपो से अगले दिनों में भी बसों की रवानगी जारी रहेगी। वे इसकी व्यवस्था करने में लगे हुए हैं।
संजय कुमार, यातायात प्रबंधक, रोडवेज डिपो पानीपत
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डिपो में यूनियन और अधिकारियों के बीच एक बस को निकलने को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई। यूनियन ने बसों को उनके ऊपर से ले जाने की चेतावनी दे दी। पुलिस अधिकारियों ने यूनियन को समझाकर शांत किया। यूनियन ने डिपो से एक-दो बसों के चलने और डिपो अधिकारियों ने 26 बसें के चलने का दावा किया।
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हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के आह्वान पर दो दिन की हड़ताल का सोमवार को पहला दिन रहा। यूनियन नेताओं ने डिपो के बाहर धरना देकर सरकार विरोधी नारेबाजी की। यूनियन नेताओं ने कहा कि वे तीन बार सरकार से वार्ता कर चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों को लागू नहीं किया जा रहा। हड़ताल की चेतावनी के बाद सरकार ने यूनियन की तीन मांगों को लागू किया है।
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सरकार प्रदेश में 3519 बसों के प्राइवेट परमिट देना चाहती है। इसका यूनियन जनता के हित में विरोध कर रही है। गत रात्रि को कैथल में हुई वार्ता भी इसी विषय के चलते विफल हो गई। इस मौके पर आजाद सिंह मलिक, बलराज देशवाल, रणबीर शर्मा, राजकुमार छौक्कर, सतीश पंवार, राजपाल सिंह, सुलतान लठवाल, बलराज देशवाल, चरण सिंह, सुरेश अहलावत, दिनेश मलिक मौजूद रहे।
हरियाणा रोडवेज यूनियनों ने सुबह डिपो के बाहर डेरा डाल लिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की। डिपो अधिकारियों ने सुबह के समय बसों को निकालने का प्रयास किया और पानीपत से अलवर जाने वाली बस को निकाल दिया। इसके बाद पानीपत से दिल्ली की दो, पानीपत से शामली की बस वर्कशाप से निकाली गई। बसों को लेकर काफी हंगामा मचा रहा। यूनियन नेताओं ने इनका विरोध किया।
डिपो में हड़ताल के दौरान दोपहर के समय टकराव की स्थिति पैदा हो गई। हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर से आई सोनीपत डिपो की बस पानीपत डिपो में सवारी लेने चली गई। बस को वापस निकालते समय चालक घबरा गया। प्रशासनिक और रोडवेज अधिकारियों ने बस को निकालने का प्रयास किया।
इसका यूनियनों ने विरोध किया और यूनियन नेता धारा 144 को तोड़ते हुए वर्कशाप में पहुंच गए। यूनियन के विरोध के चलते बस नहीं चलाई जा सकी। पदाधिकारियों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को खूब खरी-खरी सुनाई। इसके बाद यात्रियों ने विरोध कर दिया। उन्होंने टिकट के पैसे वापस करने की मांग की। जिसके बाद परिचालक ने यात्रियों को पैसे वापस करने पड़े।
पानीपत डिपो में इस समय 115 बसें हैं। इन बसों पर 179 चालक व 263 परिचालक हैं। डिपो को 38 चालक रविवार को ही मिले हैं। जिनमें से 10 चालकों ने ज्वाइन कर लिया है। इन बसों से हर रोज करीब 40 हजार किलोमीटर तय किए जाते हैं, लेकिन सोमवार को हड़ताल के चलते चंद बसें ही डिपो से बाहर निकल सकी। जिससे डिपो को एक दिन में लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। यूनियन नेता दो बसों और अधिकारी 26 बसों को सड़क पर चलाने का दावा करते हैं।
रोडवेज बसों की हड़ताल के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्री दिनभर सड़क पर बसों का इंतजार करते रहे और निजी वाहनों का सहारा लेकर अपने गंतव्य को जाना पड़ा। कुछ यात्रियों को रेल का सहारा लेना पड़ा। जिसके चलते रेलों में भी पूरी भीड़ रही।
दिल्ली जा रहे विक्रांत, सतीश कुमार, बबली और पूनम ने कहा कि वे काफी देर से बसों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन रोडवेज बसें नहीं मिली। इसके चलते उनको आगे जाने की चिंता सता रही है। यूनियन व सरकार की लड़ाई का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा।
जीटी रोड पर निजी बसें और अन्य वाहन दिनभर नियम तोड़कर चलते रहे। अधिकारी भी इन वाहनों को बेरोकटोक जाने देने को राजी दिखे। कई संचालकों ने बसें अपने छोटे मार्गों को छोड़कर जीटी रोड के लंबे मार्गों पर उतार दी। यहां पर सुबह से लेकर देर रात तक मोटा कमाया।
हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी की हड़ताल को अन्य विभागों ने भी अपना समर्थन दिया और अपने-अपने कार्यालयों में गेट मीटिंग की। कई यूनियनों ने डिपो पर पहुंचकर हड़ताल को समर्थन दिया। जिसके चलते इन कार्यालयों में भी कार्य बाधित रहा।
समर्थन देने वालों में मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन से सतीश सेठी, वीएलडीए के राज्य उप प्रधान डॉ. सुरेंद्र मलिक, एएचपीसी वर्कर यूनियन से सुरेश कुमार, नगर पालिका से धर्मबीर सारसर, हुडा वर्कर यूनियन से भूपेंद्र सिंह, पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर से सुलतान देशवाल और सीटू से सुनील कुमार ने समर्थन दिया।
डिपो के सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और चीफ इंस्पेक्टर को डीसी की ओर से एक दिन टिकट (कंडक्टर बनकर ) काटने की बात पर पर खफा हो गए। इनमें से कुछ अधिकारी यहां से टल गए और यूनियन के धरने में शामिल हो गए। इन अधिकारियों का कहना है कि वे सर्विस के आखिरी सालों में इंस्पेक्टर बन पाए हैं।
ऐसे प्रशासनिक अधिकारी उनको फिर से कंडक्टर और ड्राइवर बनाने में जुटे हैं। दरअसल डिपो अधिकारियों ने डीसी के सामने कंडक्टर न मिलने की बात कही थी। जिस पर डीसी ने इंस्पेक्टर को एक दिन के लिए टिकट काटने की पेशकश कर दी।
प्रशासन और पुलिस अधिकारी रोडवेज की हड़ताल को लेकर काफी गंभीर नजर आए। डिपो पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी दिनभर तैनात रहे। डिपो में पहले पुलिस अधीक्षक सतीश बालन और फिर डीसी समीर पाल सरो पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने अधिकारियों को अलग-अलग दिशा निर्देश दिए।
यूनियन की हड़ताल के बीच डिपो की 26 बसों को चलाया। इसमें महाप्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा सहयोग रहा। उन्होंने डिपो से यात्रियों को हरसंभव सुविधा देने का प्रयास किया। डिपो से अगले दिनों में भी बसों की रवानगी जारी रहेगी। वे इसकी व्यवस्था करने में लगे हुए हैं।
संजय कुमार, यातायात प्रबंधक, रोडवेज डिपो पानीपत